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पूर्व अध्यक्ष को नामांकन से रोका, बढ़ा विवाद

Wed, 18 Mar 2020 01:36 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2020 01:36 AM IST
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former president stopped frome nomination controversy increased
इलाहाबाद विश्वविद्यालय मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन का 20 मार्च को चुनाव होना है। इस चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो गई है लेकिन जब संगठन के पूर्व अध्यक्ष संतोष सहाय नामांकन के लिए पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया। इस मामले में संतोष विजिटर को पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
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दरअसल, चुनाव से दो वोटर लिस्ट तैयार की गई थी। यह वोटर लिस्ट जब चुनाव अधिकारी के पास भेजी गई तो उन्हें इसे वापस कर दिया, क्योंकि दोनों लिस्ट में वोटरों के नाम में अंतर था। चुनाव अधिकारी ने इविवि प्रशासन को लिस्ट वापस करते हुए कहा था कि संशोधित सूची भेजी जाए, ताकि कोई विवाद न रहे। पूर्व अध्यक्ष संतोष सहाय का कहना है कि वह जब नामांकन के लिए पहुंचे तो उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि लिस्ट में उनका नाम नहीं है। संतोष का आरोप है कि संशोधित सूची तैयार नहीं नहीं की गई और उन्हें साजिशन चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है। इस बीच यह बात भी सामने आ रही है कि उन्होंने सदस्यता शुल्क जमा नहीं किया है, जो महज पांच रुपये है। फिलहाल पूर्व अध्यक्ष ने विजिटर को पत्र भेजकर मामले में शिकायत दर्ज कराई है और चुनाव निरस्त करने का आदेश पारित करने की मांग की है।
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एमए-एमएससी गणित की परीक्षा स्थगित
कोरोना वायरस के मद्देनजर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमए/एमएससी गणित द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर 2019-20 की मिड सेमेस्टर की 19 मार्च को प्रस्तावित परीक्षा स्थगित कर दी गई है। यह जानकारी विभागाध्यक्ष प्रो. मोना खरे ने दी है। उन्होंने बताया कि स्थगित की गई परीक्षा की नई तिथि बाद में घोषित की जाएगी।
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ऑटा अध्यक्ष पर पूर्व उपाध्यक्ष ने साधा निशाना
कार्य परिषद की बैठक स्थगित किए जाने के विरोध में ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे की ओर से विजिटर को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराए जाने को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। ऑटा की पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने प्रो. रामसेवक दुबे के इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के हर सही-गलत कदम का आंख मूंदकर समर्थन करने वाले लोग अब इविवि को अस्थित करने के प्रयास में लगे हैं। प्रो. लालसा यादव का कहना है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहना है। परीक्षाएं, बैठकें आदि स्थगित कर दी गई हैं तो कार्य परिषद की बैठक को स्थगित किया जाना गलत नहीं है।
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