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पूर्व राष्ट्रपति बोले : हम श्रीराम को मानते हैं, लेकिन राम की नहीं मानते, राम की बात मानने से झिझकते हैं

Mon, 20 Jan 2025 03:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 20 Jan 2025 03:48 PM IST
सार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैंने देखा है कि हम श्रीराम को मानते हैं, उनके चरित्र को मानते हैं, उनके चरित्र को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं, उनकी शिक्षाओं को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन राम की नहीं मानते हैं।

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Former President said: We believe in Shri Ram, but do not believe in Ram, we hesitate to listen to Ram
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वागत करते कथावाचक मोरारी बापू। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैंने देखा है कि हम श्रीराम को मानते हैं, उनके चरित्र को मानते हैं, उनके चरित्र को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं, उनकी शिक्षाओं को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन राम की नहीं मानते हैं। मानने में हम सभी लोग पहले हैं, परंतु जहां राम की बात मानने की बात आती है, वहां हम थोड़े से झिझकने लगते हैं। यह एक चुनौती है और इसे कैसे हम अपने जीवन में लाएं, इसके लिए हमें धीरे-धीरे चलते रहना होगा चरैवेति चरैवेति ताकि प्रभु श्रीराम का चरित्र हम सब के जीवन में आए।

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वह सोमवार को अरैल स्थित परमार्थ निकेतन शिविर में चल रही मोरारी बापू की कथा में पहुंचे थे। स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने पूर्व राष्ट्रपति और परिवार का इलायची की माला पहनाकर स्वागत किया। रामनाथ कोविंद ने महाकुंभ व मानस संगम में संत और श्रद्धालुओं का अभिवादन करते हुए कहा कि आप सब मेरा परिवार हैं। मेरे मन में एक ही बात है कि बापू की श्रीराम कथा शृंखला की 950वीं कथा है, यह एक सुखद संयोग है और हम एक हजार श्रीराम कथाओं तक पहुंचने की ओर बढ़ रहे हैं।
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कथावाचक मोरारी बापू ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपनी पुरानी स्मृतियों का स्मरण करते हुए कहा कि आपके सानिध्य में बिताए दृश्य अद्भुत और अलौकिक हैं। आज भी मुझे याद है, जब आप गुरुकुल आए थे, सभी व्यवस्थाएं एक ओर थीं, पर आपकी आस्था एक ओर थी। आपने हमारे पूरे गांव को कहा था कि यदि कभी दिल्ली आओ तो कहीं और मत रुकना, राष्ट्रपति भवन में रुकना। इस प्रकार आपने राष्ट्रपति भवन को राष्ट्र भवन के रूप में सभी को दर्शन कराए। उन्होंने कहा कि यह बात और है कि वह खामोश खड़े होते हैं, लेकिन जो बड़े होते हैं, वह बड़े ही होते हैं।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मोरारी बापू सनातन की परम ज्योति हैं, उन्होंने जिसे छू लिया, उसे अपना बना लिया। बापू का जीवन सदैव सेतु निर्माण करता रहा और इसके लिए उन्होंने अनेक संघर्ष झेले, वे अपनी हर श्वास को पूरे विश्वास के साथ जी रहे हैं। कहा कि समुद्र मंथन संग्राम से शुरू हुआ और संगम तक पहुंचा, अमृत तक पहुंचा। बापू का जीवन संग्राम नहीं, संग-राम को चरितार्थ करता है। इस बार का कुंभ ग्लोबल कुंभ बन गया है।

वास्तव में इस बार का कुंभ अद्भुत है। सत्ता से नहीं सत्य से परिवर्तन होता है। यह सृजन से संगम की यात्रा है। अब समय आ गया है कि हमारे दिल और हमारे घर के आगे मोहब्बत लिखा हो। अब समय आ गया है कि हम न बटेंगे, न बाटेंगे, न डरेंगे, न डराएंगे, न कटेंगे, न कटेंगे, न लड़ेंगे, न लड़ाएंगे। यही संगम के तट से संगम का संदेश है, जो हमारे देश के संगम को बचा के रखेगा।

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