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High Court : दस साल से लंबित अंतिम रिपोर्ट का तीन हफ्ते में करें निस्तारण, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Fri, 26 Jul 2024 03:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 26 Jul 2024 03:13 PM IST
सार

मामला मेरठ का है। वर्ष 2010-11 में प्रदेश सरकार की ओर से मदरसा के प्रबंधकों के खाते में चार करोड़ रुपये छात्रवृत्ति की मद में ट्रांसफर किए गए थे। इसके वितरण में अनियमितता पाए जाने पर तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और याची संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ 98 मुकदमे दर्ज हुए थे।

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Final report pending for ten years should be disposed of in three weeks, High Court ordered
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत को 13 साल पुराने मदरसा छात्रवृत्ति घोटाले में दाखिल अंतिम रिपोर्ट पर तीन हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की अदालत ने अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय ने आरोपी वरिष्ठ सहायक संजय त्यागी की ओर से आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है।

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मामला मेरठ का है। वर्ष 2010-11 में प्रदेश सरकार की ओर से मदरसा के प्रबंधकों के खाते में चार करोड़ रुपये छात्रवृत्ति की मद में ट्रांसफर किए गए थे। इसके वितरण में अनियमितता पाए जाने पर तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और याची संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ 98 मुकदमे दर्ज हुए थे। विवेचना के बाद पुलिस ने याची के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। जो भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत में विगत दस साल से विचाराधीन है।
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इसी दौरान आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन मेरठ ने फिर से मामले की जांच शुरू कर दी। हालांकि, इस नई जांच के खिलाफ हाइकोर्ट पहुंचीं तत्कालीन अल्पसंख्यक अधिकारी सुमन गौतम को कोर्ट ने राहत देते हुए किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। वहीं, विवेचक ने दुबारा आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ याची संजय तक त्यागी ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि एक बार जांच में अंतिम रिपोर्ट लग जाने के बाद और ट्रायल कोर्ट ने लंबित रहने के दौरान की गई अग्रिम विवेचना विधिसंगत नहीं है। वह भी तब जब दस साल से अदालत में लंबित अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ पुलिस या किसी जांच एजेंसी की ओर से कोई आपत्ति भी दाखिल नहीं की गई। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को पूर्व दाखिल अंतिम रिपोर्ट पर तीन हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया है।

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