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दुष्कर्म के आरोपी ससुर, देवर की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक , भदोही के गोपीगंज का मामला
Sat, 31 Oct 2020 08:53 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 31 Oct 2020 08:53 PM IST
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मुकदमा
- फोटो : demo pic
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहू से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी ससुर और देवर के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है और शिकायत करने वाली पीड़िता को नोटिस जारी कर उससे व राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने गोपीगंज भदोही के कड़ेदीन चौरसिया व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में 12 दिसंबर 19 को दाखिल चार्जशीट व चार मार्च 20 के समन आदेश की वैधता को चुनौती दी गई है।
याची के अधिवक्ता अश्वनी कुमार मिश्र का कहना है कि याची के बेटे अमर कुमार चौरसिया की पत्नी का 2009 में देहांत हो गया था। 2012 में उसने पीड़िता से दूसरी शादी की। पीड़िता की भी एक शादी पहले हो चुकी थी। विवाह के बाद घर आने पर वह कलह करने लगी तो पति अमर कुमार चौरसिया ने 2019 में तलाक का मुकदमा कायम किया।
याची का कहना है कि 20 सितंबर 19 को पीड़िता को तलाक का नोटिस मिला। इसके बाद उसने पेशबंदी में अपने ससुर व देवर पर सामूहिक दुष्कर्म का फर्जी आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। याचीगण पीड़िता के ससुर व देवर हैं। उनका कहना है कि पीड़िता की पहली शादी भी इसी तरह की कलह और मुकदमेबाजी की वजह से टूटी थी। याची अधिवक्ता का कहना है कि यदि केस जारी रखने की अनुमति दी गई तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार व पीड़ित बहू से जवाब मांगा है ।
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याची के अधिवक्ता अश्वनी कुमार मिश्र का कहना है कि याची के बेटे अमर कुमार चौरसिया की पत्नी का 2009 में देहांत हो गया था। 2012 में उसने पीड़िता से दूसरी शादी की। पीड़िता की भी एक शादी पहले हो चुकी थी। विवाह के बाद घर आने पर वह कलह करने लगी तो पति अमर कुमार चौरसिया ने 2019 में तलाक का मुकदमा कायम किया।
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याची का कहना है कि 20 सितंबर 19 को पीड़िता को तलाक का नोटिस मिला। इसके बाद उसने पेशबंदी में अपने ससुर व देवर पर सामूहिक दुष्कर्म का फर्जी आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। याचीगण पीड़िता के ससुर व देवर हैं। उनका कहना है कि पीड़िता की पहली शादी भी इसी तरह की कलह और मुकदमेबाजी की वजह से टूटी थी। याची अधिवक्ता का कहना है कि यदि केस जारी रखने की अनुमति दी गई तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार व पीड़ित बहू से जवाब मांगा है ।
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