{"_id":"5fdcc2680acef47c16237881","slug":"farhan-is-co-accused-in-several-cases-with-atik-more-than-two-dozen-cases","type":"story","status":"publish","title_hn":"अतीक संग कई मामलों में सहअभियुक्त है फरहान, दो दर्जन से ज्यादा केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अतीक संग कई मामलों में सहअभियुक्त है फरहान, दो दर्जन से ज्यादा केस
Fri, 18 Dec 2020 08:23 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 18 Dec 2020 08:23 PM IST
विज्ञापन
माफिया अतीक अहमद
- फोटो : amar ujala
आईएस 227 गिरोह का सक्रिय सदस्य फरहान अतीक अहमद का बेहद करीबी है। राजूपाल हत्याकांड समेत कई सनसनीखेज वारदातों में वह अतीक संग नामजद है। मरियाडीह दोहरे हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। वर्तमान में उस पर दो दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। जिनमें हत्या के साथ ही लूट, अपहरण, रंगदारी मांगना समेत अन्य शामिल हैं।
फरहान पुत्र अनीस धूमनगंज के मरियाडीह का रहने वाला है। उसका नाम धूमनगंज थाने के टॉप 10 अपराधियों में शुमार है जो वर्तमान में जेल में है। वर्तमान में उस पर कुल 30 केस दर्ज हैं। राजूपाल हत्याकांड के साथ ही 2015 में मरियाडीह में हुए अल्कमा सुरजीत हत्याकांड में भी उसे आरोपी बनाया गया था। जिसमें वह अतीक अहमद संग नामजद है। दो साल पहले राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल ने गवाही न देने के लिए धमकाने के मामले में अतीक समेत पांच लोगों को नामजद कराया था।
इस मामले में भी फरहान का नाम शामिल था। आरोप था कि उसने जेल के भीतर रहते हुए उमेश पाल को फोन से धमकी दी। पुलिस ने बताया कि पूर्व में दर्ज मामलों में जमानत पर चल रहे फरहान को पिछले साल दिसंबर में पांच लाख की रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वादी सरायममरेज निवासी धनीराम पाल ने आरोप लगाया था कि वह आठ नवंबर को गयासुद्दीनपुर उपरहार में अपनी रजिस्ट्री की जमीन पर बाउंड्री के लिए नींव खुदवा रहा था तभी अपने छह अन्य साथियों संग पहुंचे फरहान ने गालियां देते हुए काम बंद करवा दिया। साथ ही कहा कि पांच लाख गुंडा टैक्स देने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। उस पर गुंडा अधिनियम के साथ ही सामूहिक दुष्कर्म का भी मामला दर्ज है।
विज्ञापन
खास बात यह कि इसके बावजूद उसके खिलाफ 14(1) की कार्रवाई नहीं की जा सकी। दो साल पहले दर्ज गैंगस्टर के मामले में उसके साथ अतीक के भाई अशरफ, शूटर आबिद प्रधान समेत कुल 14 लोग आरोपी बनाए गए हैं। लेकिन विवेचक दो साल के बाद भी आरोपियों की संपत्ति नहीं ढूढ़ पाए। जबकि पीडीए की टीम ने न सिर्फ उसकी संपत्ति को खोज निकाला,बल्कि बुलडोजर चलवाकर उसे जमीदोंज भी करवा दिया।
विज्ञापन
फरहान पुत्र अनीस धूमनगंज के मरियाडीह का रहने वाला है। उसका नाम धूमनगंज थाने के टॉप 10 अपराधियों में शुमार है जो वर्तमान में जेल में है। वर्तमान में उस पर कुल 30 केस दर्ज हैं। राजूपाल हत्याकांड के साथ ही 2015 में मरियाडीह में हुए अल्कमा सुरजीत हत्याकांड में भी उसे आरोपी बनाया गया था। जिसमें वह अतीक अहमद संग नामजद है। दो साल पहले राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल ने गवाही न देने के लिए धमकाने के मामले में अतीक समेत पांच लोगों को नामजद कराया था।
विज्ञापन
इस मामले में भी फरहान का नाम शामिल था। आरोप था कि उसने जेल के भीतर रहते हुए उमेश पाल को फोन से धमकी दी। पुलिस ने बताया कि पूर्व में दर्ज मामलों में जमानत पर चल रहे फरहान को पिछले साल दिसंबर में पांच लाख की रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वादी सरायममरेज निवासी धनीराम पाल ने आरोप लगाया था कि वह आठ नवंबर को गयासुद्दीनपुर उपरहार में अपनी रजिस्ट्री की जमीन पर बाउंड्री के लिए नींव खुदवा रहा था तभी अपने छह अन्य साथियों संग पहुंचे फरहान ने गालियां देते हुए काम बंद करवा दिया। साथ ही कहा कि पांच लाख गुंडा टैक्स देने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। उस पर गुंडा अधिनियम के साथ ही सामूहिक दुष्कर्म का भी मामला दर्ज है।
विज्ञापन
पीडीए ने की कार्रवाई, पुलिस को ढूढ़े नहीं मिल रही संपत्ति
सूत्रों के मुताबिक, अतीक अहमद गिरोह के सक्रिय सदस्य जिस फरहान के खिलाफ पीडीए ने कार्रवाई की, उस पर तीन बार गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो चुका है। राजूपाल हत्याकांड के बाद पहली बार 2007 में उस पर गैंगस्टर लगा। इसके बाद 2012 में फिर गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज हुआ। मरियाडीह दोहरे हत्याकांड समेत करीब एक दर्जन वारदातों में नाम सामने आने पर छह साल बाद 2018 में उस पर फिर गैंगस्टर की कार्रवाई हुई।खास बात यह कि इसके बावजूद उसके खिलाफ 14(1) की कार्रवाई नहीं की जा सकी। दो साल पहले दर्ज गैंगस्टर के मामले में उसके साथ अतीक के भाई अशरफ, शूटर आबिद प्रधान समेत कुल 14 लोग आरोपी बनाए गए हैं। लेकिन विवेचक दो साल के बाद भी आरोपियों की संपत्ति नहीं ढूढ़ पाए। जबकि पीडीए की टीम ने न सिर्फ उसकी संपत्ति को खोज निकाला,बल्कि बुलडोजर चलवाकर उसे जमीदोंज भी करवा दिया।