Prayagraj : बाढ़ में फिर डूबा मेला क्षेत्र, पीछे हुए महाकुंभ के काम, मेला प्रशासन ने भी बनाई रणनीति
दशाश्वमेध पक्का घाट के लिए अभी स्लैब डाला गया था लेकिन अचानक गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर वह भी डूब गया। छतनाग मेत अन्य पांच घाटों पर हो रहे पक्के निर्माण का भी यही हाल है। निर्माणाधीन सभी घाट पानी में डूब गए हैं। इसकी वजह से काम पूरी तरह से ठप तो ही गया है, पहले से हुए निर्माण को भी नुकसान पहुचंने की बात कही जा रही है।
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मेला क्षेत्र के एक बार फिर बाढ़ में डूब जाने से महाकुंभ के कार्यों को समय से पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है। कॉरिडोर के साथ समतलीकरण का काम भी पीछे हो जाएगा। ऐसे में समय के भीतर काम पूरा करने के लिए उपकरणों एवं श्रमिकों की संख्या बढ़ानी होगी। मेला प्रशासन की ओर से भी इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। हनुमान मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का काम अक्तूबर में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अब पानी भर जाने से काम पूरी तरह से ठप हो गया है। मनकामेश्वर मंदिर कॉरिडोर का काम भी रूक गया है।
दशाश्वमेध पक्का घाट के लिए अभी स्लैब डाला गया था लेकिन अचानक गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर वह भी डूब गया। छतनाग मेत अन्य पांच घाटों पर हो रहे पक्के निर्माण का भी यही हाल है। निर्माणाधीन सभी घाट पानी में डूब गए हैं। इसकी वजह से काम पूरी तरह से ठप तो ही गया है, पहले से हुए निर्माण को भी नुकसान पहुचंने की बात कही जा रही है।
सबसे अधिक परेशानी बसवाट वाले मेला क्षेत्र में तैयारी को लेकर आई है। मेला 25 सेक्टर में बसाया जाएगा और इसके दायरे में आने वाला पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया है। 2019 के कुंभ से पहले अगस्त में मेला क्षेत्र डूबा था और पानी भी जल्दी निकल गया था। इसके बावजूद मेला बसाने का काम अंतिम समय तक चलता रहा।
इसके विपरीत इस बार सितंबर में क्षेत्र डूबा है। इसके अलावा महाकुंभ के मद्देनजर मेले का दायरा भी बढ़ गया है। इतना ही नहीं महाकुंभ की शुरुआत ही मकर संक्रांति स्नान से ही हो जाएगी। यानि, महाकुंभ में पहले-दूसरे दिन ही करोड़ों लोग आएंगे। साथ में इससे कम से कम एक सप्ताह पहले संतों के आने का क्रम शुरू हो जाएगा। ऐसे में मेला प्रशासन के सामने महाकुंभ शुरू होने से पहले पूरी तैयारी कर लेनी होगी।
ऐसे में सितंबर में बसावट वाले क्षेत्र के डूब जाने से मेला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। मुश्किल यह कि अभी गंगा और यमुना दोनों नदियों में पानी बढ़ रहा है। इसके अलावा पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में आगे लंबे समय तक बसावट वाला क्षेत्र डूबा रहा तो जमीन समतलीकरण का काम ही समय से शुरू नहीं हो पाएगा। अफसरों का कहना है कि पानी निकलने के बाद भी दलदल बनेगा रहेगा। ऐसे में जल्दी पानी निकल जाए तब भी 15 अक्तूबर से समतलीकरण काम शुरू हो पाना मुश्किल होगा। इससे काम पिछड़ने की आशंका बन गई है।
नदियों का जलस्तर बढ़ने से महाकुंभ के काम प्रभावित हुए हैं। मेला क्षेत्र के निर्माण रुक गए हैं लेकिन समय से काम पूरा कर लिए जाएंगे। आयोजन की तारीख तय है। ऐसे में पानी निकनले के बाद युद्ध स्तर पर काम शुरू किए जाएंगे। उपकरण एवं श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - विजय किरन आनंद, कुंभ मेलाधिकारी
संजीव ओझा बनाए गए अपर मेलाधिकारी
संजीव ओझा को अपर मेलाधिकारी कुंभ बनाया गया है। उनके सोमवार को कार्यभार ग्रहण करने की उम्मीद है। अभी वह बस्ती में सीआरओ के पद पर तैनात हैं। संजीव ओझा कुंभ-2019 में भी बतौर सेक्टर मजिस्ट्रेट यहां तैनात थे। उनके इस अनुभव को देखते हुए फिर से महाकुंभ में तैनाती दी गई है। अभी दयानंद और विवेक चतुर्वेदी दो अपर मेलाधिकारियों की नियुक्ति हुई है। संजीव ओझा के आने के बाद तीन अपर मेलाधिकारी हो जाएंगे। अभी दो से तीन और अपर मेलाधिकारियों की नियुक्ति की बात कही जा रही है।