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High Court : पुनर्विवाह के बाद कैसे दिया भरण-पोषण का आदेश, झांसी परिवार न्यायालय के जज से स्पष्टीकरण तलब

Fri, 10 Jul 2026 03:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 Jul 2026 03:59 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्विवाह के बाद पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश देने पर हैरानी जताई है। इस पर झांसी परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश से स्पष्टीकरण तलब किया है।

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Explanation sought from Jhansi Family Court judge regarding maintenance order issued after remarriage
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्विवाह के बाद पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश देने पर हैरानी जताई है। इस पर झांसी परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश से स्पष्टीकरण तलब किया है। पूछा है कि पुनर्विवाह के बाद उन्होंने भरण-पोषण का आदेश कैसे पारित किया। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने झांसी के राजेश की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। राजेश ने परिवार न्यायालय के 10 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें पुनर्विवाह करने वाली पत्नी को 10 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया था।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 30 जुलाई 2025 को दोनों का तलाक हो चुका था। इस फैसले के खिलाफ पति की अपील लंबित है, लेकिन इसी दौरान पत्नी ने तीन सितंबर 2025 को पुनर्विवाह कर लिया। इस तथ्य का उल्लेख स्वयं पत्नी ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने शपथपत्र में किया था। पति ने 30 अक्तूबर 2025 को परिवार न्यायलय में भी आपत्ति दाखिल कर पुनर्विवाह की जानकारी दी थी।
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इसके बावजूद अदालत ने इस पर विचार किए बिना पत्नी को 10 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश पारित कर दिया। पति की ओर से यह भी कहा गया कि पुनर्विवाह के बाद पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रह जाती। हालांकि, उसने नाबालिग बेटे को पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। हाईकोर्ट ने पत्नी को भी नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अब मामले की सुनवाई 21 जुलाई को होगी। 

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