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घूरपुर के पूर्व थानाध्यक्ष ने 11 साल में 53 लाख कमाए, खर्च किए एक करोड़ रुपये, विजिलेंस ने कसा शिकंजा

Tue, 06 Oct 2020 01:04 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 06 Oct 2020 01:04 AM IST
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Ex. SO Ghurpur earned 53 lakhs in 11 years, spent one crore rupees, Vigilance tightens
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
घूरपुर थाने के पूर्व एसओ अरविंद कुमार त्रिवेदी की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच मेें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि नौकरी के 11 सालों में आय के विभिन्न स्रोतों के माध्यम से उसने कुल 53 लाख रुपये कमाए। लेकिन इस अवधि में उसने एक करोड़ से भी ज्यादा रुपये खर्च किए। अब यह अतिरिक्त रकम कहां से आई, इस बारे में वह कोई हिसाब नहीं दे सका। 
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सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की जांच मेें पाया गया कि आरोपी पूर्व एसओ ने दिसंबर 2006 से लेकर दिसंबर 2017 तक वेतन, बैंक ऋण व खातों में जमा पर प्राप्त ब्याज सहित कुल 53.16 लाख रुपये कमाए। हालांकि इस अवधि में किए गए खर्च का हिसाब लगाया गया तो यह आंकड़ा लगभग 1.03 करोड़ रुपये निकला। इस तरह आरोपी ने उपरोक्त अवधि में अपनी कमाई से 49.69 लाख अधिक रुपये खर्च किए।
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आय से लगभग 93 प्रतिशत अधिक व्यय के मामले में जब आरोपी से पूछताछ की गई तो वह कोई हिसाब नहीं दे पाया। न ही कोई अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध करा पाया। इस तरह से वह जांच में आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाया गया। जिस पर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 
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क्या बनाई संपत्ति?

27 लाख रुपये का मकान, 20 लाख रुपये के दो भूखंड, 83 हजार की पल्सर मोटरसाइकिल, 13.5 लाख मूल्य की सफारी स्टार्म व अन्य 

जांच हो तो कई और चेहरे होंगे बेनकाब

थाने के पूर्व एसओ पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का मुकदमा दर्ज होने के बाद यहां तैनात रहे कई थानेदारों में हडक़ंप है। दरअसल कमाई के मामले में जिले का अव्वल थाना होने के कारण ही यहां पोस्टिंग की होड़ मची रहती है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि जांच हो तो आय से अधिक संपत्ति खड़ी करने वाले कई अन्य चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। 

जानकारों का कहना है कि बहुमूल्य खनिज संपदा, सैकड़ों ईट उद्योग, नो एंट्री प्वाइंट, खनिज और टोल बैरियर के चलते ही घूरपुर थाना हमेशा से चर्चा में रहा है। यही वजह है कि यहां तैनाती के लिए भी पुलिसकर्मियों में होड़ मची रहती है। यहां तैनात रहे एक दरोगा ने परिजनों के नाम पर कई जगह पर बेशकीमती प्लॉट हथियाने की भी चर्चा आम है। यहां तैनात रहे दो अन्य दरोगाओं की शहर में करोंड़ों की आलीशान कोठी है जिसमें लगने वाला ईंट, बालू, मौरंग, गिट्टी भी इसी क्षेत्र से गई।


शिकायत पर एक दरोगा के विरुद्ध जांच भी शुरू हुई लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चली गई। कमाई का ही क्रेज है कि एक पूर्व एसएसपी के कार्यकाल में थानेदारी के लिए नाम अनुमोदित न होने के बावजूद एक दरोगा जोड़तोड़ कर लंबे समय तक प्रभारी की कुर्सी पर जमा रहा। पूर्व मेें यहां तैनात रहे एक अन्य एसओ ने भी लखनऊ में आलीशान मकान बनवाया जो अब भी पुलिसकर्मियों के बीच चर्चा का विषय है।
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