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सट्टेबाजी : मोबाइल में नाम व लेनदेन के सबूत, केस डायरी में नहीं किया शामिल

Sat, 01 Jul 2023 01:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 01 Jul 2023 01:36 PM IST
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Evidence of name and transaction in mobile, not included in case diary
सट्टेबाज गिरोह के सदस्य की यूपीआई पेमेंट हिस्ट्री के स्क्रीनशॉट, जिसमें लेनदेन के स - फोटो : अमर उजाला।

झूंसी में सट्टेबाज गिरोह के पांच सदस्यों के नाम मुकदमे से निकाले जाने के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि पिछले साल मौके पर पकड़े जाने के दौरान सरगना के दाहिने हाथ माने जाने वाले उसके गुर्गे के मोबाइल से गैंग के अन्य सदस्यों के नाम व उनकी सटोरियों से हुई लेनदेन के सारे सबूत मिल गए थे। इसके बावजूद विवेचक ने इसे केस डायरी का हिस्सा नहीं बनाया। बाद में नाम-पता तस्दीक न होने की बात लिखते हुए पांचों का नाम निकाल दिया।

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पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले साल नौ जुलाई को गिरोह के भंडाफोड़ के दौरान सरगना समेत जो तीन लोग मौके से पकड़े गए, उनके कब्जे से कुल पांच मोबाइल फोन बरामद हुए। इनमें से एक आईफोन 13 प्रो मॉडल था और यह गिरोह के ही झूंसी के आवास विकास कॉलोनी निवासी एक सदस्य का था जो सरगना का दाहिना हाथ माना जाता है। खास बात यह है कि इस मोबाइल में गिरोह के सभी सदस्यों के नाम व मोबाइल नंबर के अलावा गैंग की ओर से सट्टेबाजी के संबंध में किए गए सभी लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड था।
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सूत्रों का यह भी कहना है कि यूपीआई पेमेंट हिस्ट्री देखने से यह खुलासा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने पेमेंट हिस्ट्री के स्क्रीन शॉट भी लिए। बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि विवेचना के दौरान इन स्क्रीन शॉट्स को केस डायरी का हिस्सा नहीं बनाया गया। इसमें सिर्फ यह लिखा गया कि सरगना विकास केशरवानी ने कई लोगों से लेनदेन किया लेकिन लेनदेन किससे और किस माध्यम से हुआ, इसका कोई जिक्र नहीं किया गया। जबकि पूरा रिकाॅर्ड पुलिस के पास मौजूद था।

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लगातार हो रहा था लेनदेन

गैंग के एक सदस्य की यूपीआई पेमेंट हिस्ट्री के कुछ स्क्रीन शॉट अमर उजाला के भी हाथ लगे हैं। इनमें से एक तो नौ जुलाई के गिरोह के भंडाफोड़ के दो दिन पहले यानी सात जुलाई का है। इस दिन महज चार घंटे के भीतर इस सट्टेबाज के यूपीआई अकाउंट से 92 हजार का लेनदेन हुआ। इनमें से 72500 रुपये दिनेश कुमार यादव को भेजे गए जबकि 20 हजार रुपये एक अज्ञात नंबर से प्राप्त हुआ।

एक खास बात यह कि मुकदमे में नामजद व गैंग के सदस्य जिस रिंकू डिश का नाम-पता तस्दीक नहीं हो पाया, उससे भी लेनदेन के सबूत इस मोबाइल में मिले। छह जुलाई 2022 को उसने 37,300, 29 जून को 30 हजार और 27 जून को दो बार में 70 हजार रुपये भेजे। बड़ी बात यह है कि इसके बावजूद पुलिस उसका नाम-पता तस्दीक नहीं कर पाई।

सीडीआर से बेनकाब होंगे धंधेबाज
सूत्रों का कहना है कि मौके से जो भी आरोपी पकड़े गए हैं, पुलिस अफसर अब उनके फोन की सीडीआर की जांच करवाएंगे। इससे पता लगाया जाएगा कि आखिर इस धंधे में कौन-कौन लोग उनके सहयोगी हैं। इसके अलावा उनके यूपीआई व बैंक अकाउंट का डिटेल भी निकलवाया जाएगा। जानकारी जुटाई जाएगी कि सट्टेबाज गिरोह के सरगना समेत अन्य लोगों से किन-किन लोगों का लेनदेन हुआ।

इस पूरे प्रकरण की गहनता से छानबीन कराई जा रही है। गैंग के सदस्यों से किन-किन लोगों का लेनदेन हुआ, उसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। - चिराग जैन, एसीपी झूंसी

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