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सुरों से मुग्ध करती रहीं मालिनी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 12 Jun 2016 02:29 AM IST
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मालिनी अवस्थी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संस्था रागगीरी की पहल पर सांस्कृतिक संध्या ‘समन्वय’ में शनिवार को सांस्कृतिक केंद्र में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोकसंगीत का अद्भुत संगम हुआ। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपने सुरों के जादू के जहां दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं जानी-मानी कथक नृत्यांगना ऋचा जैन ने कथक की मनमोहक मुद्राओं से सबका दिल जीता । किराने घराने के शास्त्रीय गायक गिरिजेश कुमार ने अपनी गायकी से सबके दिलों में जगह बनाई।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने रचे हुए सोहर मिथिला ‘मगन भई आज’, ‘सियो को जनम भयो’ पर खूब तालियां बटोरीं। ‘ठाठी मैं जमुना के तीर’, ‘मछरिया बिंदिया लई गई’ दादरी के बोल भी खूब रहे।‘बाबा निमिया के पेड़ जिन काटो’, ‘सावन झड़ी लगे धीरे-धीरे’, ‘अम्मा मेरे बाबा को भेजो री’ गीतों को सभी ने खूब पसंद किया। उन्होंने सूफी और निर्गुण दोनों का संगम भी पेश किया।
इससे पूर्व जानी-मानी कथक नृत्यांगना ऋचा जैन ने कृष्ण श्लोक से शुरुआत की। इसके बाद तीन ताल और राग दरबारी करना में नृत्य पेश करते हुए‘अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी बल्लभम’ से समापन किया। उनके साथ संगत पर मां और गुरु नलिनी जैन पढंत पर थीं। शुहेब हसब ने गायन, हारमोनियम, शाहबाज खान ने तबला और रेशमा श्रीवास्तव ने सितार पर साथ दिया।
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किराना घराने के शास्त्रीय गायक गिरिजेश कुमार ने राग पूरिया कल्याण, बड़े ख्याल की विलंबित रचना एकताल से शुरुआत के बाद तीन ताल मध्य लय में प्रसिद्ध बंदिश और राग मिश्र खमाज में भावपूर्ण ठुमरी की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर विनोद मिश्र, हारमोनियम पर उस्ताद आरिफ अली खान की संगत काबिले तारीफ रही। संस्था संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया, संस्था की ओर से ऐसे आयोजन प्र्त्येक वर्ष होंगे। कलाकारों का स्वागत सांस्कृतिक केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल और प्रेम प्रकाश ने किया।
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पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने रचे हुए सोहर मिथिला ‘मगन भई आज’, ‘सियो को जनम भयो’ पर खूब तालियां बटोरीं। ‘ठाठी मैं जमुना के तीर’, ‘मछरिया बिंदिया लई गई’ दादरी के बोल भी खूब रहे।‘बाबा निमिया के पेड़ जिन काटो’, ‘सावन झड़ी लगे धीरे-धीरे’, ‘अम्मा मेरे बाबा को भेजो री’ गीतों को सभी ने खूब पसंद किया। उन्होंने सूफी और निर्गुण दोनों का संगम भी पेश किया।
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इससे पूर्व जानी-मानी कथक नृत्यांगना ऋचा जैन ने कृष्ण श्लोक से शुरुआत की। इसके बाद तीन ताल और राग दरबारी करना में नृत्य पेश करते हुए‘अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकी बल्लभम’ से समापन किया। उनके साथ संगत पर मां और गुरु नलिनी जैन पढंत पर थीं। शुहेब हसब ने गायन, हारमोनियम, शाहबाज खान ने तबला और रेशमा श्रीवास्तव ने सितार पर साथ दिया।
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किराना घराने के शास्त्रीय गायक गिरिजेश कुमार ने राग पूरिया कल्याण, बड़े ख्याल की विलंबित रचना एकताल से शुरुआत के बाद तीन ताल मध्य लय में प्रसिद्ध बंदिश और राग मिश्र खमाज में भावपूर्ण ठुमरी की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर विनोद मिश्र, हारमोनियम पर उस्ताद आरिफ अली खान की संगत काबिले तारीफ रही। संस्था संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया, संस्था की ओर से ऐसे आयोजन प्र्त्येक वर्ष होंगे। कलाकारों का स्वागत सांस्कृतिक केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल और प्रेम प्रकाश ने किया।