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Prayagraj : विद्युत कर्मचारियों ने की बिजली महापंचायत, सीएम योगी से निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग

Sun, 05 Jan 2025 08:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 05 Jan 2025 08:01 PM IST
सार

जार्ज टाउन में आज हुई बिजली पंचायत में भारी भीड़ उमड़ी। हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी, अभियंता और उपभोक्ता सम्मिलित हुए। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा के लोग बड़ी संख्या में बिजली पंचायत में आए।

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Electricity employees held Electricity Mahapanchayat, demanded CM Yogi to withdraw the decision
जार्ज टाउन में निजीकरण के विरोध में पंचायत करते बिजली कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बिजली पंचायत में निजीकरण का निर्णय वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री से मांग की गई। समस्याओं का समाधान करने के लिए हाईकोर्ट के निर्णय के आदेश का पालन न करने का पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया। निजीकरण के विरोध में करो या मरो की भावना से संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया गया महाकुंभ के दौरान श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

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जार्ज टाउन में आज हुई बिजली पंचायत में भारी भीड़ उमड़ी। हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी, अभियंता और उपभोक्ता सम्मिलित हुए। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा के लोग बड़ी संख्या में बिजली पंचायत में आए। बिजली पंचायत में निजीकरण के विरोध में करो या मरो की भावना से निर्णायक संघर्ष का निर्णय लिया गया।संघर्ष समिति ने पॉवर कारपोरेशन पर  आरोप लगाया कि प्रबंधन हाईकोर्ट के पांच नवंबर को दिए गए आदेश का पालन नहीं कर रहा है, जिसमें पॉवर कारपोरेशन और सरकार को यह निर्देश दिया गया है कि वे बिजली कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल व्यवस्था बनाएं।

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Electricity employees held Electricity Mahapanchayat, demanded CM Yogi to withdraw the decision
निजीकरण के विरोध में पंचायत करते बिजली कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा, औरंगाबाद, नागपुर,जलगांव, समस्तीपुर, गया, भागलपुर, उज्जैन, सागर, ग्वालियर,आगरा और ग्रेटर नोएडा में पूरी तरह विफल हो चुका है। इसलिए निजीकरण के इस विफल प्रयोग को देश के सबसे बड़े प्रांत उत्तर प्रदेश में लागू करना उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हित में नहीं होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि जहां सरकारी क्षेत्र की कंपनी के लिए बिजली एक सेवा है वहीं निजी घरानों के लिए बिजली एक व्यापार है। उप्र की सरकारी बिजली कंपनियां घाटा उठाकर किसानों और आम घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली दे रही हैं। दूसरी ओर निजी बिजली कंपनियां मुनाफे के लिए काम करती हैं।

बिजली पंचायत को मुख्यतया शैलेंद्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पीके दीक्षित, सुहेल आबिद, श्रीचंद, वीसी उपाध्याय, जवाहर लाल विश्वकर्मा, छोटेलाल दीक्षित, राम कुमार झा, माया शंकर तिवारी, प्रेमनाथ राय, आरएस मिश्र, डॉ. आशीष मित्तल, घनश्याम राय, संयुक्त किसान मोर्चा के एकादशी यादव ने संबोधित किया और एटक, इंटक, सीटू, ऐक्टू और अन्य ऑल इंडिया ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों ने समर्थन दिया।
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