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बड़े नेताओं के जिलों में नहीं तय हुए परीक्षा केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 13 Dec 2015 11:58 PM IST
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यूपी बोर्ड की ओर से 18 फरवरी से बोर्ड परीक्षा कराने के ऐलान के बाद भी परीक्षा केंद्रों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। बोर्ड ने इसी सप्ताह परीक्षा कार्यक्रम जारी करने की घोषणा की है। अभी तक सत्ताधारी दल से जुड़े कई बड़े नेताओं के जिले में केंद्रों की घोषणा नहीं हो सकी है। परीक्षा केंद्र तय नहीं होने वाले जिलों में प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित उससे जुड़ा हरदोई जिला भी शामिल है। परीक्षा केंद्रों की घोषणा नहीं होने से यूपी बोर्ड परीक्षा प्रभावित हो सकती है।
सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं से जुड़े जिलों लखनऊ, हरदोई, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, कन्नौज एवं प्रतापगढ़ सहित कई अन्य में जिला स्तरीय कमेटी की ओर से परीक्षा केंद्रों को तय नहीं किया जा सका है। सबसे अधिक परेशानी बोर्ड के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े जिलों में दिखाई पड़ रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण परीक्षा केंद्रों को तय करना अधिकारियों के लिए मुश्किल हो रहा है। प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव के जिले आजमगढ़ में भी परीक्षा केंद्र तय नहीं हो सका है। कन्नौज से मुख्यमंत्री की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं, यहां भी परीक्षा केंद्र तय नहीं हो सके हैं। गाजीपुर जिला प्रदेश के कई मंत्रियों से जुड़ा होने के कारण यहां भी केंद्र तय नहीं हो सके हैं। सबसे अधिक दबाव लखनऊ, हरदोई जैसे जिलों में है जहां 90 फीसदी विद्यालय नकल के आरोप में डिबार हैं।
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सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं से जुड़े जिलों लखनऊ, हरदोई, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, कन्नौज एवं प्रतापगढ़ सहित कई अन्य में जिला स्तरीय कमेटी की ओर से परीक्षा केंद्रों को तय नहीं किया जा सका है। सबसे अधिक परेशानी बोर्ड के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े जिलों में दिखाई पड़ रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण परीक्षा केंद्रों को तय करना अधिकारियों के लिए मुश्किल हो रहा है। प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव के जिले आजमगढ़ में भी परीक्षा केंद्र तय नहीं हो सका है। कन्नौज से मुख्यमंत्री की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं, यहां भी परीक्षा केंद्र तय नहीं हो सके हैं। गाजीपुर जिला प्रदेश के कई मंत्रियों से जुड़ा होने के कारण यहां भी केंद्र तय नहीं हो सके हैं। सबसे अधिक दबाव लखनऊ, हरदोई जैसे जिलों में है जहां 90 फीसदी विद्यालय नकल के आरोप में डिबार हैं।
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