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कोरोना को लेकर परेशान परिजन

Tue, 17 Mar 2020 01:06 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2020 01:06 AM IST
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due to corona family members are in problem
कोरोना वायरस से भयभीत लोगों को परदेस में बैठे अपनों की चिंता सताने लगी है। मुश्किल यह कि कई देशों में कोरोना वायरस की चपेट में आने के डर के साथ भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है। इसमें अमेरिका जैसे देश भी शामिल हैं। नया कटरा की अर्चना श्रीवास्तव के बेटा-बहू अमेरिका के न्यू जर्सी में रहते हैं। वहां सबकुछ ठप हो गया है। अर्चना का कहना है कि वहां खाने तक की मुश्किल खड़ी हो गई है। चावल, गेहूं बाजार में आते ही खत्म हो जा रहा है। मॉल के आगे लाइन लगानी पड़ रही है। मुश्किल यह कि बेटा आ भी नहीं सकता।
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उसे अधिकतम 21 दिन की छुट्टी मिलेगी और यहां आने पर उसे 14 दिनों तक निगरानी में रख लिया जाएगा। इसलिए छुट्टी मिलने के बावजूद वह नहीं आ पा रहा। उनका कहना है कि बस फोन से हालचाल हो पा रहा है। जार्जटाउन में रहने वाले अशोक का भांजा भी अमेरिका में डेंटल सर्जन हैं। अशोक का कहना है कि बीमारी फैलने के खतरे से वह हॉस्पिटल नहीं जा रहा। अशोक की भांजी भी दुबई में है। वहां भी बहुत जरूरी होने पर लोग घरों से निकल रहे हैं। इस तरह की पीड़ा सिर्फ अर्चना, अशोक की नहीं है। जिनके भी परिजन खासतौर पर, चीन, इटली, अमेरिका आदि देशों में हैं सभी को यह दर्द सता रहा है और फोन पर लगातार संपर्क में हैं।
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मम्फोर्डगंज की अमृता सिन्हा के पति राजेश कुमार ओमान में हैं। वहां स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि हेलीकॉप्टर से कीटनाशक के छिड़काव की नौबत आ गई है। सरकार की ओर से घोषणा की गई है कि रात में 12 बजे कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। इसलिए लोग घरों में ही रहें। अमृता ने बताया कि ऑफिस में भी जरूरी लोगों को बुलाया जा रहा है। उनमें भी ग्रुप बनाया गया है, जो सात-सात दिन ऑफिस जा रहे हैं। अन्य लोगों को घर से ही काम करने का निर्देश दिया गया है या फिर छुट्टी दे दी गई है।
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नौकरी या रोजगार की तलाश में दिल्ली, कर्नाटक, बंगलूरू आदि शहरों में गए बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मूल शहर की ओर रुख कर लिया है। दिल्ली में एक निजी संस्थान में कार्यरत निशांत प्रयागराज वापस आ गए हैं। साफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत निशांत ने बताया कि यहां अभी कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके अलावा यहां विदेश से आने वालों की संख्या बहुत कम है। इसलिए प्रयागराज अपेक्षाकृत सुरक्षित है। वहीं कंपनी की ओर से घर से काम करने का निर्देश दिया गया है। इसलिए घर वापस आ गए। अहमदाबाद में कार्यरत देवेश त्रिपाठी का भी यही कहना है। उनका कहना है कि प्रयागराज सुरक्षित है। इसके अलावा वहां काम भी बंद है। इसलिए वापस आ गए।
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