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दही वाले बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस से साफ होंगे नाले
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Drains will be cleaned with yogurt bacteria
प्रयागराज। गंगा-यमुना में सीधे गिर रहे 46 नालों के गंदे पानी को दही वाले बैक्टीरिया ‘लैक्टोबैसिलस’ से साफ किया जाएगा। कुंभ की तर्ज पर यह काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई कराएगी। बायो रेमिडीशन का काम बुधवार से शुरू किया जाएगा। माघ मेला के पहले स्नान पर्व से पहले नालों का पानी ट्रीटमेंट के बाद ही नदियों में जाएगा। इससे बीओडी-सीओडी की मात्रा नियंत्रित रहेगी, जिसकी प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जाएगी।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने शहर के छोटे-बड़े 82 नालों में 36 को कुंभ के दौरान टेप कर किसी न किसी एसटीपी से जोड़ा था। अन्य नालों का बायो रेमिडीशन तकनीक से ट्रीटमेंट किया गया। अब माघ मेला के दौरान करीब दो महीने गंगा साफ रहें, इसके लिए 46 नालों का बायो रेमिडीशन ट्रीटमेंट किया जाएगा।
गंगा-यमुना में सीधे गिर रहे 46 नालों में 22 नैनी, झूंसी और फाफामऊ के हैं। इन 46 नालों में छह का ट्रीटमेंट नागपुर की संस्था नीरी करेगी। अन्य नालों की सफाई का काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ठेकेदारों से कराएगी। इसके लिए संस्थाओं का चयन किया जा चुका है। अनुमानत: प्रतिदिन 150 एमएलडी गंदा पानी सीधे नदियों में गिर रहा है।
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क्या है बायो रेमिडीशन
इस तकनीक के तहत नालों के रास्तों में छोटे-छोटे पांड (तालाब) बनाकर गंदा पानी रोका जाएगा। बायो रेमिडीशन तकनीक से बैक्टीरियल इनोकुलम मिश्रित कर नालों के गंदे पानी की सफाई की जाएगी। इस प्रक्रिया में दही वाला बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस इस्तेमाल किया जाएगा।
-- माघ मेला के दौरान गंगा-यमुना में सीधे गिरने वाले सभी नालों के पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा। बैक्टीरिया शोधित पानी में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होगा। इसमें बीओडी और सीओडी की मात्रा मानक के अनुरूप होगी। इसकी दिन में दो बार जांच की जाएगी।- पीके अग्रवाल, महाप्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने शहर के छोटे-बड़े 82 नालों में 36 को कुंभ के दौरान टेप कर किसी न किसी एसटीपी से जोड़ा था। अन्य नालों का बायो रेमिडीशन तकनीक से ट्रीटमेंट किया गया। अब माघ मेला के दौरान करीब दो महीने गंगा साफ रहें, इसके लिए 46 नालों का बायो रेमिडीशन ट्रीटमेंट किया जाएगा।
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गंगा-यमुना में सीधे गिर रहे 46 नालों में 22 नैनी, झूंसी और फाफामऊ के हैं। इन 46 नालों में छह का ट्रीटमेंट नागपुर की संस्था नीरी करेगी। अन्य नालों की सफाई का काम गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ठेकेदारों से कराएगी। इसके लिए संस्थाओं का चयन किया जा चुका है। अनुमानत: प्रतिदिन 150 एमएलडी गंदा पानी सीधे नदियों में गिर रहा है।
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क्या है बायो रेमिडीशन
इस तकनीक के तहत नालों के रास्तों में छोटे-छोटे पांड (तालाब) बनाकर गंदा पानी रोका जाएगा। बायो रेमिडीशन तकनीक से बैक्टीरियल इनोकुलम मिश्रित कर नालों के गंदे पानी की सफाई की जाएगी। इस प्रक्रिया में दही वाला बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस इस्तेमाल किया जाएगा।
-- माघ मेला के दौरान गंगा-यमुना में सीधे गिरने वाले सभी नालों के पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा। बैक्टीरिया शोधित पानी में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होगा। इसमें बीओडी और सीओडी की मात्रा मानक के अनुरूप होगी। इसकी दिन में दो बार जांच की जाएगी।- पीके अग्रवाल, महाप्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई