चिकित्सकों की हिदायत : कान खोलकर सुन लें...एआई डॉक्टर नहीं, बिगड़ सकती है सेहत
एआई कोई डॉक्टर नहीं...। चिकित्सकों की यह हिदायत उन लोगों के लिए है, जो एआई से पूछकर इलाज करते हैं। जब मामला बिगड़ जाता है जो अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मरीज इलाज में भी मुश्किल पैदा कर रहे हैं।
विस्तार
सिविल लाइंस निवासी एक युवक को करीब पांच महीने पहले बास्केटबॉल खेलते समय घुटने में गंभीर चोट लगी। उसने एआई चैटबॉट में अपनी चोट को मोच बताया। चैटबॉट ने उसके गलत इनपुट के आधार पर आराम, बर्फ, दबाव और ऊंचाई (राइस प्रोटोकॉल) व दर्द निवारक दवाएं लेने की सलाह दी। असल में उसके घुटने का एसीएल टूट चुका था और घुटने की गद्दी फट गई थी। राहुल ने दो सप्ताह तक डॉक्टर को नहीं दिखाया। बर्फ लगाता रहा और दर्द निवारक दवाएं खाता रहा। अंतत: उसे जटिल सर्जरी करानी पड़ी।
एआई की सलाह पर एक महीने खाई हार्ट की दवा
अल्लापुर निवासी 45 वर्षीय महिला को एक महीने से सीने में रह-रहकर दर्द हो रहा था। महिला ने एआई से पूछकर बिना डॉक्टर की सलाह के खून पतला करने व अन्य प्रकार की दवा शुरू कर दी। सोमवार की रात सीने में अधिक दर्द होने की समस्या को लेकर महिला एसआरएन अस्पताल के हृदय रोग विभाग पहुंची, जहां चिकित्सकों ने इसे गैस की समस्या बताई। महिला एआई से मिले ज्ञान के आधार पर एंजियोग्राफी कराने की जिद करने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने सीटी एंजियोग्राफी कराने के लिए महिला को राजी किया। फिलहाल जांच में सब सामान्य निकला।
बंद कर दी इन्सुलिन, पहुंच गए आईसीयू
सोहबतियाबाग निवासी 50 वर्षीय युवक का एसआरएन अस्पताल से टाइप वन मधुमेह का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें इन्सुलिन लेने की सलाह दी थी। वहीं मरीज ने बिना डॉक्टर की सलाह के एआई से पूछकर इन्सुलिन लेना बंद कर दिया। इस दौरान वह दवा लेने लगा। करीब एक महीने पहले मरीज की हालत काफी बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
आजकल मरीज अपने एक्सरे व एमआरआई की तस्वीरें खींचकर एआई में डाल रहे हैं। वे इसका मतलब खुद समझने की कोशिश करते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है। एआई मेडिकल रिपोर्ट की बारीकियों और मरीज की शारीरिक स्थिति को देखे बिना सटीक परिणाम नहीं दे सकता। यह प्रवृत्ति मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। - डॉ. सचिन यादव, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।
एआई से जानकारी लेना गलत नहीं है, लेकिन चिकित्सक को बिना दिखाए उन बातों पर यकीन करना खतरनाक हो सकता हैं। मरीज को चाहिए कि वह बिना डॉक्टर को दिखाए कोई दवा न लें। - डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, वरिष्ठ जनरल फिजीशियन, एसआरएन अस्पताल।
अधिकांश युवा सीने में दर्द होने पर एआई से पूछकर इलाज शुरू कर देते हैं। यह एक बड़ा जोखिम है। इसके अलावा वह डॉक्टर के पर्चे को एआई पर डालकर 50 तरह के सवाल पूछते हैं। जिसकी वजह से डॉक्टर को उपचार करने में परेशानी होती है। - डॉ. अभिषेक सचदेवा, हृदय रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।
डॉक्टर अगर किसी मरीज को दवा लिख रहा है तो उसपर भरोसा करना चाहिए। कई मरीज एआई से बात करके कभी भी दवा बंद कर देते हैं। इन्सुलिन लेने से कतराते हैं, वहीं जब हालत बिगड़ जाती है, तो डॉक्टर के पास आते हैं। - डॉ. विभु रंजन खरे, मधुमेह रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल
अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार एआई से जानकारी लेकर खुद निर्णय कर लेते हैं। मरीज की कौन सी जांच होनी है, क्या दवा चलेगी, ऑक्सीजन की आवश्यकता है कि नहीं व वेंटिलेटर पर मरीज को रखना है कि नहीं, उन्हें समझना चाहिए कि एआई सुझाव दे सकता है, मगर उपचार डॉक्टर ही करेगा। - डॉ. वैशाली सिंह, प्रमुख अधीक्षक, छावनी सामान्य