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Prayagraj News: मोबाइल एप पर आंख मूंदकर न करें भरोसा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 03:55 AM IST
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Do not trust mobile apps blindly
‘सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें लेकिन मैसेजिंग या अन्य किसी भी तरह के मोबाइल एप पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। परमिशन देते वक्त सावधानी बरतें और जब भी लगे कि अनावश्यक रूप से कोई परमिशन मांगी जा रही है तो ऐसे एप को डाउनलोड करने से बचें। ऐसा नहीं किया तो प्राइवेसी को खतरा हो सकता है।’
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यह बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में डीसीपी यमुनानगर आईपीएस विवेक चंद्र यादव ने कहीं। नैनी स्थित बेथनी कॉन्वेंट स्कूल में उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध व उनसे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से समझाया।
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कहा कि टीनएजर सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन इनके खतरों के बारे में उन्हें नहीं पता होता है। कई सोशल मीडिया एप इंस्टालेशन के वक्त आपसे आपके फोन के कॉन्टैक्ट, गैलरी, कैमरा, माइक्रोफोन समेत अन्य एप को एक्सेस करने की परमिशन मांगते हैं।
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आपको ध्यान देना है कि क्या यह आवश्यक है। ऐसा नहीं है तो एप डाउनलोड न करें वरना प्राइवेसी में सेंध लग सकती है। सोशल मीडिया से संबंधित अपराधों के अलावा उन्होंने वित्तीय साइबर धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के बारे में भी छात्रों को जागरूक किया।
कहा कि यूपीआई, रिमोट एप जैसे एनीडेस्क आदि से संबंधित अपराध लगातार हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थी अपने साथ-साथ माता-पिता व घर के अन्य परिजनों को भी अलर्ट करें। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर अपराधों जैसे वॉयस क्लोनिंग, इमेज मॉर्फिंग आदि से भी बचाव के प्रति जागरूक किया।


डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं, सिर्फ मनोवैज्ञानिक दबाव
इससे पहले साइबर थाना टीम ने भी विद्यार्थियों को टिप्स दिए। बताया कि डिजिटल अरेस्ट, जिसका शिकार आजकल बहुत से लोग हो रहे हैं, यह वास्तव में कुछ नहीं है। यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक दबाव है, जिसके जरिए साइबर अपराधी आपको डराकर अपने नियंत्रण में ले लेता है। प्रधानाचार्य सिस्टर डाॅ. शमिता ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ विद्यार्थी बल्कि शिक्षक-शिक्षिकाएं भी जागरूक होते हैं। कार्यक्रम में खेल शिक्षक मो. साबिर, रिचा पांडेय समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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