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फीस वृद्धि पर डीएम ने लगाई रोक
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 04 Apr 2015 11:58 PM IST
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किताब, कॉपी, ड्रेस की मनमानी कीमत वसूलने और फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। निजी स्कूलों की मनमानी पर ‘अमर उजाला’ में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद डीएम भवनाथ सिंह ने शनिवार को आदेश जारी करते स्कूलों में फीस वृद्धि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही चेतावनी जारी की है कि इस साल जिन स्कूलों ने फीस बढ़ाई है, उनकी मान्यता वापस ली जाएगी। कार्रवाई के लिए उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही स्कूल परिसर या बाहर दुकानदार से साठगांठ कर कॉपी-किताब और ड्रेस की मनमानी कीमत वसूलने वाले स्कूलों और दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके लिए मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी भी लगा दी है।
किताब, कॉपी, ड्रेस की कीमत हर साल बढ़ा दी जाती है। फीस भी हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। स्कूलों की इस मनमानी पर रोक का प्रावधान है लेकिन कई वर्षों से इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि कार्रवाई के लिए कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए। स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ ‘अमर उजाला’ ने अभियान छेड़ा तो प्रशासन की नींद भी खुल गई। डीएम ने शनिवार को आदेश जारी किया कि निजी क्षेत्र के पब्लिक स्कूलों में मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि कर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। डीएम ने इस आदेश के तहत स्कूलों में फीस वृद्धि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए चेतावनी जारी की है कि अगर कोई निजी स्कूल पिछले वर्ष की तुलना में इस साल फीस बढ़ाता है तो उसकी मान्यता वापस लेने की कार्यवाही की जाएगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि निजी क्षेत्र के स्कूल ड्रेस एवं किताबों की आपूर्ति खुद या किसी अन्य व्यक्ति अथवा दुकानदार के माध्यम से करा रहे हैं और इसके लिए अभिभावकों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है, जो गलत है। अभिभावकों को किसी दुकान या संस्थान से किताबें और स्कूल खरीदने के लिए बाध्य करना आपराधिक मामला बनता है। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, सभी अपर नगर मजिस्ट्रेट और उप जिलाधिकारी निजी क्षेत्र के पब्लिक स्कूलों का निरीक्षण करें। अगर किसी स्कूल में किताब या ड्रेस की बिक्री पाई गई तो उन्हें तत्काल जब्त कर लें।
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किताब, कॉपी, ड्रेस की कीमत हर साल बढ़ा दी जाती है। फीस भी हर साल बढ़ोतरी की जा रही है। स्कूलों की इस मनमानी पर रोक का प्रावधान है लेकिन कई वर्षों से इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि कार्रवाई के लिए कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए। स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ ‘अमर उजाला’ ने अभियान छेड़ा तो प्रशासन की नींद भी खुल गई। डीएम ने शनिवार को आदेश जारी किया कि निजी क्षेत्र के पब्लिक स्कूलों में मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि कर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। डीएम ने इस आदेश के तहत स्कूलों में फीस वृद्धि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए चेतावनी जारी की है कि अगर कोई निजी स्कूल पिछले वर्ष की तुलना में इस साल फीस बढ़ाता है तो उसकी मान्यता वापस लेने की कार्यवाही की जाएगी।
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आदेश में यह भी कहा गया है कि निजी क्षेत्र के स्कूल ड्रेस एवं किताबों की आपूर्ति खुद या किसी अन्य व्यक्ति अथवा दुकानदार के माध्यम से करा रहे हैं और इसके लिए अभिभावकों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है, जो गलत है। अभिभावकों को किसी दुकान या संस्थान से किताबें और स्कूल खरीदने के लिए बाध्य करना आपराधिक मामला बनता है। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, सभी अपर नगर मजिस्ट्रेट और उप जिलाधिकारी निजी क्षेत्र के पब्लिक स्कूलों का निरीक्षण करें। अगर किसी स्कूल में किताब या ड्रेस की बिक्री पाई गई तो उन्हें तत्काल जब्त कर लें।
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