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जिला अधिवक्ता संघ का शताब्दी वर्ष समारोह
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:48 PM IST
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जिला अधिवक्ता संघ ने देश को ऐसी विभूतियां दी हैं जो कानून के पंडित थे। अधिवक्ता पर कानून और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। हमें कानून के पालन की संस्कृति को पैदा करना है। कथनी और करनी का भेद मिटाना होगा। जिला अधिवक्ता संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के मौके पर गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएस सिन्हा ने यह बात कहीं। जस्टिस सिन्हा ‘लोकतंत्र में अधिवक्ताओं का सामाजिक दायित्व’ विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे थे। शनिवार को संघ के दो दिवसीय समारोह के पहले सत्र का उद्घाटन अतिथियों ने दीप जला कर किया।
संगोष्ठी के विषय पर विचार रखते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने अधिवक्ताओं को उनके सामाजिक दायित्व की याद दिलाते हुए कहा कि हड़ताल से किसी को फायदा नहीं होता है। पीड़ितों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है। हमारा दायित्व है कि हम विश्वास के साथ ईमानदारी से अपना काम करें तभी न्याय मिल सकेगा।
संगोष्ठी के वक्ता न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि देश को आजादी दिलाने मेें वकीलों ने अहम भूमिका निभाई है। अब समय बदल गया है अधिवक्ता मौजूदा परिस्थितियों में चुनौतियों के सामने खड़े हों और समाज को नेतृत्व दें। जस्टिस टंडन ने वकीलों से भ्रष्टाचार और अशिक्षा के खिलाफ लड़ने का अह्वान किया।
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जस्टिस एपी शाही ने कहा कि अधिवक्ता सिपाही नहीं नायक है जो अंधेरे में भी रोशनी दिखाता है। वादकारी पीड़ित व्यक्ति होता है जो वकील के पास उसी विश्वास से आता है जैसे बीमार डाक्टर के पास। हमारा समाज के प्रति दायित्व है वकालत व्यवसाय नहीं है।
पूर्व न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त जस्टिस शंभूनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा समय में वकीलों की समाज निर्माण में भागीदारी कम हुई है। क्योंकि हम अपने व्यवसाय में अधिक व्यस्त हो गए हैं। अधिवक्ताओं ने समाज निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत सरकार के एडिशनल सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता ने कहा कि आज हम दायित्व को छोड़कर अधिकार की बात करते हैं। न्याय खरीदे या बेचे जाने की चीज नहीं है। न्याय कारोबार नहीं है इसलिए वादकारी उपभोक्ता नहीं हो सकता। वकीलों को मानवीय पक्ष पर विचार करना होगा। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने अधिवक्ता संघ के सभी सदस्यों का स्वागत और अभिनंदन किया। जिला जज डीएस त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव और संघ के मंत्री देवेंद्र मिश्र नगरहा ने किया। आयोजन समिति के सदस्योें जगतपाल सिंह, ताराचंद्र गुप्ता, नरेंद्र देव पांडेय, गंगा प्रसाद पांडेय, उमाशंकर तिवारी ने अतिथियों को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।
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संगोष्ठी के विषय पर विचार रखते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने अधिवक्ताओं को उनके सामाजिक दायित्व की याद दिलाते हुए कहा कि हड़ताल से किसी को फायदा नहीं होता है। पीड़ितों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है। हमारा दायित्व है कि हम विश्वास के साथ ईमानदारी से अपना काम करें तभी न्याय मिल सकेगा।
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संगोष्ठी के वक्ता न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि देश को आजादी दिलाने मेें वकीलों ने अहम भूमिका निभाई है। अब समय बदल गया है अधिवक्ता मौजूदा परिस्थितियों में चुनौतियों के सामने खड़े हों और समाज को नेतृत्व दें। जस्टिस टंडन ने वकीलों से भ्रष्टाचार और अशिक्षा के खिलाफ लड़ने का अह्वान किया।
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जस्टिस एपी शाही ने कहा कि अधिवक्ता सिपाही नहीं नायक है जो अंधेरे में भी रोशनी दिखाता है। वादकारी पीड़ित व्यक्ति होता है जो वकील के पास उसी विश्वास से आता है जैसे बीमार डाक्टर के पास। हमारा समाज के प्रति दायित्व है वकालत व्यवसाय नहीं है।
पूर्व न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त जस्टिस शंभूनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा समय में वकीलों की समाज निर्माण में भागीदारी कम हुई है। क्योंकि हम अपने व्यवसाय में अधिक व्यस्त हो गए हैं। अधिवक्ताओं ने समाज निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत सरकार के एडिशनल सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता ने कहा कि आज हम दायित्व को छोड़कर अधिकार की बात करते हैं। न्याय खरीदे या बेचे जाने की चीज नहीं है। न्याय कारोबार नहीं है इसलिए वादकारी उपभोक्ता नहीं हो सकता। वकीलों को मानवीय पक्ष पर विचार करना होगा। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने अधिवक्ता संघ के सभी सदस्यों का स्वागत और अभिनंदन किया। जिला जज डीएस त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव और संघ के मंत्री देवेंद्र मिश्र नगरहा ने किया। आयोजन समिति के सदस्योें जगतपाल सिंह, ताराचंद्र गुप्ता, नरेंद्र देव पांडेय, गंगा प्रसाद पांडेय, उमाशंकर तिवारी ने अतिथियों को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया।