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मौनी अमावस्या पर शाही स्नान के दौरान हुई अव्यवस्थाओं से संतों में नाराजगी, अखाड़े में आपात बैठक
Tue, 05 Feb 2019 11:46 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 05 Feb 2019 11:46 PM IST
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मौनी अमावस्या पर शाही स्नान के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर संतों में गहरी नाराजगी है। मंगलवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में संतों का गुस्सा खुलकर सामने आया। दिगंबर अखाड़े ने तो वसंत पंचमी पर होने वाले शाही स्नान के बहिष्कार तक की चेतावनी दे डाली। सोमवार को समय खत्म होने के बाद शाही स्नान के लिए पहुंचे दिगंबर अखाड़े को रोके जाने से कुछ संत खफा थे।
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परिषद की बैठक में घंटों मान मनौव्वल चली। अंतत: निर्धारित समय पर ही शाही स्नान के लिए अखाड़ों के निकलने और संगम नोज पहुंचने के अलावा सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण व प्रयागराज के प्राचीन मंदिरों, तीर्थों के कायाकल्प पर भी चर्चा की गई। शाही स्नान के दौरान हुई अव्यवस्था पर चर्चा के लिए पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में शम 3:30 बजे अखाड़ा परिषद की बैठक शुरू हुई। संतों का कहना था कि कुंभ में सिर्फ तीन दिन ही शाही स्नान के लिए उनको दिया जाता है। इस दौरान कम से कम व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए।
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दिसंबर अखाड़े के शाही स्नान से रोके जाने पर चिंता जताई गई। साथ ही यह भी बताया गया कि दिगंबर अखाड़े के संत जब शाही स्नान के लिए पहुंचे, तब उनके लिए निर्धारित समय खत्म हो चुका था। दिगंबर अखाड़े के संत आगामी 10 फरवरी को वसंत पंचमी पर होने वाले शाही स्नान का बहिष्कार करने की चेतावनी दे रहे थे। उनके प्रस्ताव पर चर्चा के बाद तय किया गया कि अखाड़े अपने निर्धारित समय पर ही संगम नोज पहुंचें। समय पर न पहुंचने पर संगम नोज पैक कर दिया जाए। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने इसकी पुष्टि की।
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उन्होंने बताया कि अखाड़ों की जिम्मेदारी है कि समय से शाही स्नान के लिए संगम पहुंचें। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। निर्मोही अखाड़े के महंत धर्मदास महाराज ने राम मंदिर निर्माण से संबंधित प्रस्ताव रखा। इस पर महामंत्री हरि गिरि का कहना था कि अयोध्या जाने की तिथि जल्द ही तय की जाएगी। इस दौरान कुंभ मेला प्रशासन से शाही स्नान के समय व्यवस्था दुरुस्त रखने की अपील की गई। इस मौके पर महंत प्रेम गिरि, महंत विद्यानंद सरस्वती, महंत उमाशंकर भारती के अलावा सभी 13 अखाड़ों के संत उपस्थित थे।