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कुंभ से पहले भ्रष्टाचार की गंगा में अफसरों की डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 19 Aug 2018 02:08 AM IST
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कुंभ में श्रद्धालुओं की डुबकी तो सात महीने बाद लगेगी, लेकिन भ्रष्टाचार की गंगा में अफसर अभी से गोता लगाने लगे हैं। कुंभ के लिए गंगा पर बनने वाले 22 अस्थाई पुलों के निर्माण के लिए साखू की लकड़ी के स्लीपर की आपूर्ति में करोड़ों रुपये की बंदरबांट का खेल शुरू हो गया है। पुल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी सस्ती के बजाय महंगी लकड़ी मंगा रहा है। जो लकड़ी अरुणाचल प्रदेश फारेस्ट कॉरपोरेशन महज 88.69 करोड़ में देने को तैयार है, वही लकड़ी विभाग पंजाब फारेस्ट कारपोरेशन से 1.17 अरब से अधिक में मंगाई जा रही है। कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद ने मामले की जांच कराने की बात कही है। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल का कहना है कि ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ वह इस मामले की जानकारी कुंभ मेला के नोडल अधिशासी अभियंता से लेंगे।
कुंभ में गंगा पर पुल निर्माण के लिए कुल 4750 क्यूबिक घन मीटर साखू की लकड़ी की आपूर्ति की जानी है। मई महीने में अस्थाई पुल के लिए साखू की लड़की की आपूर्ति के लिए पीडब्ल्यूडी की इस मांग को पूरी करने में उत्तर प्रदेश वन निगम ने असमर्थता जता दी थी। वन निगम के जीएम अतुल जिंदल का कहना है कि उनके पास इतनी भारी मात्रा में आपूर्ति देने की क्षमता नहीं है। इसके बाद अलग-अलग राज्यों को पीडब्ल्यूडी ने अपनी मांग भेजी, लेकिन सिर्फ अरुणाचल प्रदेश फारेस्ट कारपोरेशन ने आपूर्ति देने की हामी भरी। इस पर पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (कुंभ) केके पाहूजा ने अरुणाचल प्रदेश फारेस्ट करपोरेशन के एमडी को 88,69,91,250 रुपये का वर्क आर्डर दे दिया।
इस वर्क आर्डर में 39750 नग साल वूड स्लीपर और 5015 नग वुड एजिंग की आपूर्ति में ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के अलावा जीएसटी भी शामिल है। इसके लिए उसे अलग-अलग किश्तों में 20 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया है। इस बीच अरुणाचल से आपूर्ति से पहले साल स्लीपर (साखू) और साल एजिंग की गुणवत्ता की जांच उत्तर प्रदेश वन निगम से कराई जानी थी, लेकिन वन निगम ने गुणवत्ता की जांच नहीं की, अलबत्ता पंजाब फारेस्ट कॉरपोरेशन से लकड़ी की आपूर्ति के लिए अलग से इस्टीमेट मंगा लिया गया। पीडब्ल्यूडी ने 1000 क्यूबिक घन मीटर साल वुड स्लीपर की आपूर्ति का वर्क आर्डर अरुणाचल से पांच रुपये प्रति घन फीट कम रेट पर पंजाब फारेस्ट करपोरेशन को उसकी मनमानी शर्तों को नजर अंदाज कर दे दिया।
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पंजाब कारपोरेशन ने आपूर्ति की शर्तों में कहा है कि उसके डिपो से लकड़ी निकलने के बाद उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। साल स्लीपर में किसी तरह की खराबी पाए जाने पर उसे वापस भी नहीं किया जाएगा। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी पंजाब फारेस्ट कारपोरेशन का प्रति क्यूबिक फीट तीन गुना अधिक है। ट्रांसपोर्टेशन, जीएसटी व अन्य खर्चों को लेकर अरुणाचल से कुंभ मेला को जितनी लकड़ी 88.69 करोड़ रुपये में आपूर्ति होनी है, उतनी ही लकड़ी की पंजाब फारेस्ट कारपोरेशन के रेट पर कीमत 117,70,17, 176 (1.17 अरब से अधिक) रुपये देनी होगी। वन निगम के जीएम अतुल जिंदल का कहना है कि कुंभ के लिए साखू की लकड़ी की आपूर्ति में उनकी कोई भूमिका नहीं है। माल तैयार होने पर वह सिर्फ गुणवत्ता की जांच करेंगे।
मेरे पास साखू के जंगल नहीं रह गए हैं। इतनी मात्रा में लकड़ी की आपूर्ति इसी वजह से यूपी वन निगम देने से पीछे हट गया। अरुणाचल और पंजाब को लकड़ी की आपूर्ति का वर्क आर्डर देने के लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ही उत्तरदायी है।
अतुल जिंदल, महाप्रबंधक, उत्तर प्रदेश वन निगम।
यह कुंभ है। इसमें सबको गले लगाकर चलना पड़ेगा। यूपी वन निगम से तीन हजार क्यूबिक घन मीटर लकड़ी ले रहा हूं। अरुणाचल और पंजाब को भी वर्क आर्डर दिया गया है। विवेक पचौरिया, एक्सईएन(कुंभ मेला) पीडब्ल्यूडी।
पंजाब और अरुणाचल प्रदेश को दिए गए साल स्लीपर के वर्क आर्डर की जांच कराई जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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कुंभ में गंगा पर पुल निर्माण के लिए कुल 4750 क्यूबिक घन मीटर साखू की लकड़ी की आपूर्ति की जानी है। मई महीने में अस्थाई पुल के लिए साखू की लड़की की आपूर्ति के लिए पीडब्ल्यूडी की इस मांग को पूरी करने में उत्तर प्रदेश वन निगम ने असमर्थता जता दी थी। वन निगम के जीएम अतुल जिंदल का कहना है कि उनके पास इतनी भारी मात्रा में आपूर्ति देने की क्षमता नहीं है। इसके बाद अलग-अलग राज्यों को पीडब्ल्यूडी ने अपनी मांग भेजी, लेकिन सिर्फ अरुणाचल प्रदेश फारेस्ट कारपोरेशन ने आपूर्ति देने की हामी भरी। इस पर पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (कुंभ) केके पाहूजा ने अरुणाचल प्रदेश फारेस्ट करपोरेशन के एमडी को 88,69,91,250 रुपये का वर्क आर्डर दे दिया।
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इस वर्क आर्डर में 39750 नग साल वूड स्लीपर और 5015 नग वुड एजिंग की आपूर्ति में ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के अलावा जीएसटी भी शामिल है। इसके लिए उसे अलग-अलग किश्तों में 20 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया है। इस बीच अरुणाचल से आपूर्ति से पहले साल स्लीपर (साखू) और साल एजिंग की गुणवत्ता की जांच उत्तर प्रदेश वन निगम से कराई जानी थी, लेकिन वन निगम ने गुणवत्ता की जांच नहीं की, अलबत्ता पंजाब फारेस्ट कॉरपोरेशन से लकड़ी की आपूर्ति के लिए अलग से इस्टीमेट मंगा लिया गया। पीडब्ल्यूडी ने 1000 क्यूबिक घन मीटर साल वुड स्लीपर की आपूर्ति का वर्क आर्डर अरुणाचल से पांच रुपये प्रति घन फीट कम रेट पर पंजाब फारेस्ट करपोरेशन को उसकी मनमानी शर्तों को नजर अंदाज कर दे दिया।
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पंजाब कारपोरेशन ने आपूर्ति की शर्तों में कहा है कि उसके डिपो से लकड़ी निकलने के बाद उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। साल स्लीपर में किसी तरह की खराबी पाए जाने पर उसे वापस भी नहीं किया जाएगा। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी पंजाब फारेस्ट कारपोरेशन का प्रति क्यूबिक फीट तीन गुना अधिक है। ट्रांसपोर्टेशन, जीएसटी व अन्य खर्चों को लेकर अरुणाचल से कुंभ मेला को जितनी लकड़ी 88.69 करोड़ रुपये में आपूर्ति होनी है, उतनी ही लकड़ी की पंजाब फारेस्ट कारपोरेशन के रेट पर कीमत 117,70,17, 176 (1.17 अरब से अधिक) रुपये देनी होगी। वन निगम के जीएम अतुल जिंदल का कहना है कि कुंभ के लिए साखू की लकड़ी की आपूर्ति में उनकी कोई भूमिका नहीं है। माल तैयार होने पर वह सिर्फ गुणवत्ता की जांच करेंगे।
मेरे पास साखू के जंगल नहीं रह गए हैं। इतनी मात्रा में लकड़ी की आपूर्ति इसी वजह से यूपी वन निगम देने से पीछे हट गया। अरुणाचल और पंजाब को लकड़ी की आपूर्ति का वर्क आर्डर देने के लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ही उत्तरदायी है।
अतुल जिंदल, महाप्रबंधक, उत्तर प्रदेश वन निगम।
यह कुंभ है। इसमें सबको गले लगाकर चलना पड़ेगा। यूपी वन निगम से तीन हजार क्यूबिक घन मीटर लकड़ी ले रहा हूं। अरुणाचल और पंजाब को भी वर्क आर्डर दिया गया है। विवेक पचौरिया, एक्सईएन(कुंभ मेला) पीडब्ल्यूडी।
पंजाब और अरुणाचल प्रदेश को दिए गए साल स्लीपर के वर्क आर्डर की जांच कराई जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।