धूना तपस्या : वसंत पंचमी पर शुरू हुई पंच अग्नि तपस्या, जानें क्या है इसका महात्म्य
माघ मेले में खाक चौक पर वसंत पंचमी से धूना तपस्या शुरू हुई। कठिन तपस्या मानी जाने वाली धून तपस्या अग्नि के घेरे में बैठकर विधि विधान पूर्वक की जाती है। संन्यासियों की इस तपस्या को देखने के लिए भीड़ लगी रही।
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संगम की रेती वसंतोत्सव पर पंच अग्नि साधना की साक्षी बनी। मौका था तपस्वी नगर में धूना तपस्या के श्रीगणेश का। तपस्वी और महात्यागी परंपरा के संतों ने पंच अग्नि का घेरा बनाकर उसके बीच तपस्या आरंभ की। पंचमी पर माघ मेले में गंगा किनारे अनूठी ध्यान-साधना आरंभ हुई। खाक चौक के तपस्वीनगर में त्यागी परंपरा के संतों ने अग्नि का घेरा बनाकर धूना तपस्या शुरू की। अग्नि के घेरे में कुछ संतों ने सिर पर भी मिट्टी के घड़ों में अग्नि प्रज्जवलित की। जेष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी यानी गंगा दशहरा के दिन इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।
सिर पर घड़ा रख ध्यान में लीन रहे संत
खाक चौक के तपस्वी नगर में कई शिविरों में धूना तपस्या आरंभ हुई। एक साथ कई संत अग्नि के घेरे में सिर पर घड़ा रखकर ध्यान में लीन नजर आए। यह अग्नि साधना तपस्वीनगर में माघी पूर्णिमा तक चलेगी। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या बढ़ी है। अखिल भारतीय श्रीपंच तेरह भाई त्यागी अयोध्या के महंत राम संतोष दास ने इस बार भी धूना तपस्या शुरू की है। अग्नि साधना को वह श्रेष्ठतम तप बताते हैं। उनका कहना है कि सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं।
वह बताते हैं कि धूना तपस्या का संकल्प लेने वाले सुबह से शाम तक साधना करेंगे। गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प लेकर उसे फिर से आरंभ किया जाएगा। इस बार ज्यादातर संतों ने धूना तपस्या राष्ट्र की रक्षा और खुशहाली की कामना से आरंभ की है।
सात चरणों में होती है अग्नि साधना
अग्नि साधना की बात आते ही वह इसकी महिमा बताने लगते हैं। उनके मुताबिक सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या करीब 500 से अधिक है।
लोक कल्याण के लिए की जाती है साधना
धूना तपस्या करने वाले संतों का कहना है कि धूना तपस्या का संकल्प लेने वाले सुबह से शाम तक साधना करेंगे। गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प लेकर उसे फिर से आरंभ किया जाएगा।