Umesh Pal Hatyakand : धूमनगंज पुलिस फिर बोली, माफिया अतीक के नाबालिग बेटों को नहीं लिया हिरासत में
उमेश पाल हत्याकांड के मामले में अतीक अहमद के दो नाबालिग बेटों के उठाए जाने के मामले में शाइस्ता परवीन की ओर से दाखिल अर्जी पर धूमनगंज पुलिस ने शुक्रवार को भी पुरानी आख्या ही प्रस्तुत की है, जिसमें कहा गया कि उसने अतीक के नाबालिग बेटों को हिरासत में नहीं लिया है।
विस्तार
उमेश पाल हत्याकांड के मामले में अतीक अहमद के दो नाबालिग बेटों के उठाए जाने के मामले में शाइस्ता परवीन की ओर से दाखिल अर्जी पर धूमनगंज पुलिस ने शुक्रवार को भी पुरानी आख्या ही प्रस्तुत की है, जिसमें कहा गया कि उसने अतीक के नाबालिग बेटों को हिरासत में नहीं लिया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट आख्या देने का निर्देश दिया है।
सीजेएम अदालत ने इसी तरह अशरफ के ससुर मंसूर अहमद की अर्जी पर भी स्पष्ट जानकारी देने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने पूरामुफ्ती थाने से भी दोनों मामलों में रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने याचियों से अर्जी की दो-दो प्रतियां भी देने को कहा है।
इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही अधिवक्ता मनीष खन्ना और विजय मिश्रा की ओर से धूमनगंज पुलिस की ओर से दी गई आख्या पर आपत्ति जताई गई। कहा गया कि आख्या एक दिन पहले वाली है। केवल नाम बदल गया है। एक दिन पहले भेजी गई आख्या एक सिपाही के जरिये भेजी गई, जबकि शुक्रवार को भेजी गई आख्या थानाध्यक्ष की ओर से भेजी गई, जिसमें अदालत के आदेश के बावजूद कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। अदालत ने भी इसे सही माना और धूमनगंज और पूरामुफ्ती थाने से रिपोर्ट देने को कहा। सीजेएम अदालत ने इस मामले में शनिवार को फिर सुनवाई करने को कहा है।
शाइस्ता की अर्जी में कहा गया है कि धूमनगंज थाने की पुलिस उनके दोनों नाबालिग बेटों को 24 फरवरी 2023 की रात घर से उठा ले गई है और अभी तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। जबकि, अशरफ के ससुर मंसूर अहमद ने अपनी अर्जी में अपनी बेटी जैनब फातिमा, उनकी ननद आयश नूरी और उंजिला नूरी को 28 फरवरी 2023 की रात्रि करीब तीन बजे विधि विरुद्ध तरीके से उठा ले जाने का आरोप लगाया है। कहा है कि बिना महिला पुलिस के इनको उठाया गया। आज तक पुलिस इन लोगों के बारे में जानकारी नहीं दे रही है।
अतीक के अधिवक्ताओं ने कहा, झूठा है चश्मदीद गवाह
जिला न्यायालय की विशेष अदालत (एमपीएमएलए) में उमेश पाल अपहरण कांड में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अतीक के अधिवक्ताओं ने कहा कि राजू पाल अपहरण कांड का चश्मदीद गवाह उमेश झूठा है। वह मौके पर था ही नहीं। जब गोलियां चल रहीं थी तो वह कैसे मौके पर पहुंच गया। उसने दबाव में अपनी गवाही दी है। फिलहाल शुक्रवार को बहस पूरी नहीं हो सकी। अदालत शनिवार को फिर सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एलपी द्विवेदी और चंद्रशेखर की ओर से तर्क प्रस्तुत किए गए। उनकी ओर से कहा गया कि मामले में महीनों बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। विधायक की वजह से उसने अपना बयान दिया। वह सिर्फ नाम का वकील था। उसका काम प्रापर्टी डीलिंग से जुड़ा हुआ था। बाद में उसने अतीक से भी समझौता कर लिया था। इसी वजह से वह 100 रुपये की मजदूरी करते हुए करोड़ों की प्रापर्टी का मालिक बन गया।
फिलहाल अदालत ने बहस के दौरान कई सवाल भी किए। इस दौरान उमेश पाल के अधिवक्ता विक्रम सिन्हा, जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि, सहायक शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य मौजूद रहे।