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धनतेरस आज, घर-घर विराजेंगे लक्ष्मी-गणेश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 17 Oct 2017 01:33 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दीपपर्व की शुरूआत मंगलवार को धनतेरस से हो रही है। इस दिन यम और धनवंतरि की पूजा अर्चना होगी। परंपरानुसार लोग लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा के साथ सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन समेत तमाम चीजों की खरीददारी करेंगे। शाम को यम के निमित्त दीपदान होगा। ज्योतिषियों का कहना है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि सोमवार रात 12:43 से आरंभ होकर मंगलवार रात 11:55 तक रहेगी। खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 7.27 बजे से लेकर रात 11:55 बजे तक रहेगा। प्रदोष व्रत, मास की शिवरात्रि का व्रत भी किया जाएगा।
गणेश-लक्ष्मी प्रतिमा को आसन देने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त गोधूलि बेला है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के अनुसार पूजा स्थल को स्वच्छ करने के उपरांत चौकी रखें। उसे लाल और पीले रंग से सजाएं। पूजा के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग करें। पूजा की थाली में अक्षत (चावल) रोली (कुंकुम) हल्दी, दूर्वा, कपूर, पांच या सात कौड़ी रखें।
लक्ष्मी गणेश पूजन में लाल, पीला हरा, सफेद रंग का सर्वाधिक प्रयोग शुभकारी है। लाल रंग शुभता, समृद्धि, पीला रंग सौम्यता, संपन्नता एवं आरोग्यता, हरा रंग परिवर्तन, खुशहाली और सफेद रंग शांति समृद्धि ऊर्जा प्रदान करने वाला है। जिन घरों में लोग अक्सर बीमार रहते हैं वे आरोग्यता के लिए धनवंतरि पूजा करें।
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लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व में स्थापित करें। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार लक्ष्मी जी की प्रतिमा को गणेश जी की प्रतिमा के दाहिने स्थापित करें। पुराने सिक्के और कौड़िया सामने रखें। घी का दीप प्रज्वलित कर देवी पधारने के लिए प्रार्थना करें।
यम के निमित्त दीप दान का क्रम धनतेरस से शुरू होगा। घर में आंगन की नाली के पास सरसों के तेल का दीप जलेगा। जो रात भर जलता रहेगा। ज्योतिर्विद आदित्य कीर्ति का कहना है कि गोधूलि बेला में दीप घर के मुख्यद्वार पर दोनों तरफ दीपक अवश्य जलाएं इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा और घर-परिवार में सुख समृद्धि रहेगी। पूजा स्थल पर रात भर दीप जलाए। आंगन में जो दीप जलाए जाएं उसे रात भर जलते रहने दें।
धनतेरस पर खरीदारी का सर्वोत्तम मुहूर्त मंगलवार को दिन में 12:04 से 1:04 बजे और शाम 4:56 से 5:56 बजे तक है। इस बार त्रयोदशी तिथि में सूर्योदय और सूर्यास्त होने से खरीददारी का शुभ मुहूर्त सुबह 7.27 बजे से लेकर रात 11:55 तक रहेगा। श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में धनवंतरि पूजन शाम सात बजे होगा। श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के दारागंज स्थित आश्रम में धनवंतरि पूजा श्रीमहंत राम सेवक गिरि की देखरेख में होगा।
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गणेश-लक्ष्मी प्रतिमा को आसन देने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त गोधूलि बेला है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के अनुसार पूजा स्थल को स्वच्छ करने के उपरांत चौकी रखें। उसे लाल और पीले रंग से सजाएं। पूजा के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग करें। पूजा की थाली में अक्षत (चावल) रोली (कुंकुम) हल्दी, दूर्वा, कपूर, पांच या सात कौड़ी रखें।
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लक्ष्मी गणेश पूजन में लाल, पीला हरा, सफेद रंग का सर्वाधिक प्रयोग शुभकारी है। लाल रंग शुभता, समृद्धि, पीला रंग सौम्यता, संपन्नता एवं आरोग्यता, हरा रंग परिवर्तन, खुशहाली और सफेद रंग शांति समृद्धि ऊर्जा प्रदान करने वाला है। जिन घरों में लोग अक्सर बीमार रहते हैं वे आरोग्यता के लिए धनवंतरि पूजा करें।
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लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व में स्थापित करें। ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार लक्ष्मी जी की प्रतिमा को गणेश जी की प्रतिमा के दाहिने स्थापित करें। पुराने सिक्के और कौड़िया सामने रखें। घी का दीप प्रज्वलित कर देवी पधारने के लिए प्रार्थना करें।
यम के निमित्त दीप दान का क्रम धनतेरस से शुरू होगा। घर में आंगन की नाली के पास सरसों के तेल का दीप जलेगा। जो रात भर जलता रहेगा। ज्योतिर्विद आदित्य कीर्ति का कहना है कि गोधूलि बेला में दीप घर के मुख्यद्वार पर दोनों तरफ दीपक अवश्य जलाएं इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा और घर-परिवार में सुख समृद्धि रहेगी। पूजा स्थल पर रात भर दीप जलाए। आंगन में जो दीप जलाए जाएं उसे रात भर जलते रहने दें।
धनतेरस पर खरीदारी का सर्वोत्तम मुहूर्त मंगलवार को दिन में 12:04 से 1:04 बजे और शाम 4:56 से 5:56 बजे तक है। इस बार त्रयोदशी तिथि में सूर्योदय और सूर्यास्त होने से खरीददारी का शुभ मुहूर्त सुबह 7.27 बजे से लेकर रात 11:55 तक रहेगा। श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में धनवंतरि पूजन शाम सात बजे होगा। श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के दारागंज स्थित आश्रम में धनवंतरि पूजा श्रीमहंत राम सेवक गिरि की देखरेख में होगा।