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कस्तूरबा विद्यालयों के अध्यापकों ने भी मांगी शिक्षामित्रों की तरह वरीयता
Tue, 23 Jun 2020 08:53 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 23 Jun 2020 08:53 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय
कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में पढ़ा रहे अध्या पकों ने भी सहायक अध्यापक भर्ती में शामिल होने के लिए शिक्षामित्रों की ही तरह अनुभव के आधार पर वरीयता की मांग की है। इसे लेकर अध्यापकों की ओर से दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
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याचिका में उप्र बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली के नियम-14 के परिशिष्ट एक क्लाज 06 की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। रीति चौधरी व 35 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया कि याचीगण की नियुक्ति सर्व शिक्षा अभियान के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में की गई।
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मगर, इनको अध्यापक नहीं माना जाता और इनके अध्यापन अनुभव को सहायक अध्यापक भर्ती में वरीयता नही दी जा रही है। याचीगण का कहना है कि शिक्षामित्रों के अध्यापन अनुभव को वरीयता देने का फैसला लिया गया है, जबकि याची कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को पढ़ाते हैं। इसके बावजूद उनको वरीयता नहीं दी जा रही है।
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शिक्षामित्रों को वरीयता देना तथा याचियों को न देना भेदभावपूर्ण होने के कारण रद्द किया जाए। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि कक्षा एक से पांच तक पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। यह अलग स्किल है। कक्षा छह से आठ तक के सीनियर बेसिक स्कूलों के अध्यापकों की तुुलना जूनियर बेसिक स्कूलों के अध्यापकों से नहीं की जा सकती। कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय माना और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।