फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   death sentence of accused of raping and burning the girl alive was canceled Allahabad High Court ordered to release in Hathras case

हाथरस का मामला: दुष्कर्म कर लड़की को जिंदा जलाने के आरोपी की फांसी की सजा रद्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश

Wed, 09 Mar 2022 01:52 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: सुशील कुमार Updated Wed, 09 Mar 2022 01:52 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने पीड़िता के मृत्युकालिक बयान को साबित करने के लिए बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट व डॉक्टर का बयान नहीं लिया और न ही फोरेंसिक व डीएनए जांच करायी। निचली अदालत में पीड़िता का बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट को समन करने की अर्जी भी नहीं दी।

विज्ञापन
death sentence of accused of raping and burning the girl alive was canceled Allahabad High Court ordered to release in Hathras case
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 वर्ष की नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर जिंदा जलाने के आरोपी की फांसी की सजा रद्द कर उसे बरी करने का आदेश दिया है। निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा पॉक्सो एक्ट के तहत स्वीकार्य आधारभूत सबूतों के बगैर मात्र इस अवधारणा पर सजा नहीं दी जा सकती कि अभियुक्त स्वयं को निर्दोष साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त पर स्वयं को निर्दोष साबित करने का दायित्व होता है, वहीं अभियोजन पक्ष के पास उसके अपराध में लिप्त होने का प्रथमदृष्टया पर्याप्त तथ्य व आधारभूत साक्ष्य होना चाहिए।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने पीड़िता के मृत्युकालिक बयान को साबित करने के लिए बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट व डॉक्टर का बयान नहीं लिया और न ही फोरेंसिक व डीएनए जांच करायी। निचली अदालत में पीड़िता का बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट को समन करने की अर्जी भी नहीं दी। कोर्ट ने कहा अधीनस्थ अदालतों ने सबूतों को समझने में गलती की। आरोप साबित किए बगैर इस आधार पर सजा सुना दी कि आरोपी खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सका।
विज्ञापन


अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़िता अपनी नानी के घर में थी। आरोपी ने घर में आकर छेड़छाड़ की। दुष्कर्म कर मिट्टी तेल डालकर आग लगा दी। गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 20 दिन बाद उसकी मौत हो गई, जिसकी एफआईआर हाथरस के सिकंदराराऊ थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और ट्रायल कोर्ट ने फांसी, आजीवन कारावास सहित विभिन्न अपराधों में सजा व लाखों रुपये का जुर्माना लगाया। सत्र अदालत ने अपील खारिज करते हुए सजा बहाल रखी। वरिष्ठ अधीक्षक, जिला जेल अलीगढ़ ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट को अपील संदर्भित की। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर स्वयं को निर्दोष साबित करने का भार है। यह अनुच्छेद 14 और 21 के मूल अधिकारों के विपरीत नहीं है। मगर जरूरी है कि सजा संतोषजनक व विश्वसनीय सबूतों के आधार पर दी जाए। अगर अभियोजन तथ्यों व आधारभूत सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध साबित करने में सफल रहा हो तो वहीं यह अवधारणा लागू होगी कि आरोपी स्वयं को निर्दोष साबित करे। कोर्ट ने कहा नकारात्मक तथ्य साबित करना कठिन है किंतु असंभव नहीं है। सजा के लिए आरोप संदेह से परे साबित होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed