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मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंडियन ऑयल कारपोरेशन की मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ जिला पंचायत मथुरा द्वारा चलाई जा रही आपराधिक कार्यवाही और सीजीएम मथुरा द्वारा जारी सम्मन आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि इसी मामले में सिविल सूट न्यायालय में लंबित है, ऐसे में प्रकरण को आपराधिक मुकदमे में घसीटने का कोई औचित्य नहीं बनता है। सिविल प्रकृति के विवाद में आपराधिक प्रक्रिया अपनाना उचित नहीं है। मथुरा रिफाइनरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा ने दिया है।
रिफाइनरी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि जिला पंचायत मथुरा ने मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ लाइसेंस फीस न जमा करने पर जिला पंचायत अधिनियम की धारा 240 के तहत आपराधिक प्रक्रिया प्रारंभ की। सीजीएम मथुरा ने 30 मार्च 1996 को जनरल मैनेजर मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ सम्मन आदेश जारी किया।
इस आदेश को हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दाखिल अर्जी में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता का कहना था कि जिला पंचायत ने लाइसेंस फीस वसूली के लिए सिविल सूट दाखिल कर रखा है, जो अभी लंबित है। सुप्रीमकोर्ट के इंद्र मोहन गोस्वामी केस का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि सिविल नेचर के विवादों में क्रिमिनल प्रोसिडिंग प्रारंभ करना उचित नहीं है। कोर्ट ने दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि जिला पंचायत की ओर से दाखिल सिविल सूट अभी लंबित है, ऐसे में इस मामले को आपराधिक केस में घसीटना उचित नहीं है। कोर्ट ने सीजेएम मथुरा की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही और सीएम द्वारा जारी समन आदेश रद्द कर दिया है।
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रिफाइनरी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि जिला पंचायत मथुरा ने मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ लाइसेंस फीस न जमा करने पर जिला पंचायत अधिनियम की धारा 240 के तहत आपराधिक प्रक्रिया प्रारंभ की। सीजीएम मथुरा ने 30 मार्च 1996 को जनरल मैनेजर मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ सम्मन आदेश जारी किया।
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इस आदेश को हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दाखिल अर्जी में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता का कहना था कि जिला पंचायत ने लाइसेंस फीस वसूली के लिए सिविल सूट दाखिल कर रखा है, जो अभी लंबित है। सुप्रीमकोर्ट के इंद्र मोहन गोस्वामी केस का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि सिविल नेचर के विवादों में क्रिमिनल प्रोसिडिंग प्रारंभ करना उचित नहीं है। कोर्ट ने दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि जिला पंचायत की ओर से दाखिल सिविल सूट अभी लंबित है, ऐसे में इस मामले को आपराधिक केस में घसीटना उचित नहीं है। कोर्ट ने सीजेएम मथुरा की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही और सीएम द्वारा जारी समन आदेश रद्द कर दिया है।
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