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मेड़बंदी के झगड़े में बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Dec 2016 01:53 AM IST
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Murder
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यमुनापार के घूरपुर इलाके में शुक्रवार सुबह खेत में मेड़बंदी को लेकर दो पक्ष भिड़ गए। एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के एक बुजुर्ग को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। चीख पुकार पर गांव के लोग दौड़े तो हमलावर भाग निकले। खून से लथपथ बुजुर्ग को लेकर घरवाले जसरा सीएचसी भागे। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बुजुर्ग की हत्या से नाराज घरवालों और ग्रामीणों ने शव सीएचसी के बाहर रखकर चक्काजाम कर हंगामा काटा। किसी तरह पुलिस ने समझा-बुझाकर शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने आनन-फानन में दबिश देकर एक आरोपी को दबोच लिया। कत्ल के बाद से गांव में तनाव का माहौल है।
घूरपुर में पंवर गांव के पूर्व प्रधान स्व. रामलाल यादव के पुत्र अंबिका यादव (60) किसान थे। उनका खेत में मेड़ बांधने को लेकर गांव के ही शंभू यादव से झगड़ा चल रहा था। शुक्रवार की सुबह लगभग 7 बजे शंभू यादव, उसका पुत्र विनोद यादव और भतीजा राधेश्याम यादव खेत पर पहुंचे और मेड़ बांधने लगे। अंबिका को इसकी खबर लगी तो अकेले ही खेत पर पहुंच गए और मेड़ बांधने का विरोध किया। दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। नौबत मारपीट तक पहुंच गई। शंभू, उसके बेटे और भतीजे अंबिका पर टूट पड़े। उन्हें घेरकर लाठी-डंडों से इस कदर पीटा कि अंबिका लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।
बुजुर्ग के अचेत होकर गिरते ही हमलावर भाग निकले। गांव के लोगों ने मारपीट होते देखी तो शोर मचाया। चीख पुकार सुनकर अंबिका के घरवाले और गांववाले भागकर पहुंचे। मरणासन्न पड़े अंबिका को लेकर बेटे घूरपुर थाने से सीएचसी जसरा पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बुजुर्ग की पीटकर हत्या से परिजनों और गांव के लोगों में आक्रोश था। नाराज लोग शव लेकर सीएचसी के बाहर आ गए और चक्काजाम कर हंगामा करने लगे। सूचना पर घूरपुर एसओ समेत कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन देकर शव कब्जे में लेकर चीरघर भेजा। घटना से गांव में तनाव बना हुआ।
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घूरपुर पुलिस ने आनन-फानन में घेरेबंदी कर मुख्य आरोपी शंभू यादव को कुछ देर में गांव के बाहर से दबोच लिया। मृत अंबिका यादव के बेटे संतोष की तहरीर पर घूरपुर पुलिस ने हत्या का मुकदमा लिख लिया है। अन्य आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है। वहीं हत्याकांड से अंबिका के घर में कोहराम मचा है। दोनों बेटे संतोष, राकेश और पत्नी लालती देवी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस और पीएसी तैनात है।
खेत में मेड़ बनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सालों से रंजिश चल रही थी। पहले दो बार झगड़ा हुआ था। तब घूरपुर पुलिस ने दोनों पक्षों का शांतिभंग में चालान कर खानापूर्ति कर दी थी। पुलिस ने कभी भी इस विवाद का हल निकालने का प्रयास नहीं किया। जिसके चलते अंबिका को जान गंवानी पड़ी। अंबिका की पत्नी लालती देवी रोते हुए बार-बार पुलिस और प्रशासन को कोस रही थीं कि पुलिस की लापरवाही के चलते पति की हत्या हो गई।
अंबिका यादव को सुबह दूसरे पक्ष के मेड़ बांधने की जानकारी हुई तो वह गुस्से में अकेले ही और निहत्थे खेत की तरफ भागकर पहुंच गए। उसके दोनों बेटे भी घर पर थे। अंबिका ने न तो बेटों को बताया और न ही घर में रखी लाइसेंसी बंदूक लेकर गए। उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि नौबत मारपीट तक पहुंच जाएगी।
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घूरपुर में पंवर गांव के पूर्व प्रधान स्व. रामलाल यादव के पुत्र अंबिका यादव (60) किसान थे। उनका खेत में मेड़ बांधने को लेकर गांव के ही शंभू यादव से झगड़ा चल रहा था। शुक्रवार की सुबह लगभग 7 बजे शंभू यादव, उसका पुत्र विनोद यादव और भतीजा राधेश्याम यादव खेत पर पहुंचे और मेड़ बांधने लगे। अंबिका को इसकी खबर लगी तो अकेले ही खेत पर पहुंच गए और मेड़ बांधने का विरोध किया। दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। नौबत मारपीट तक पहुंच गई। शंभू, उसके बेटे और भतीजे अंबिका पर टूट पड़े। उन्हें घेरकर लाठी-डंडों से इस कदर पीटा कि अंबिका लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।
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बुजुर्ग के अचेत होकर गिरते ही हमलावर भाग निकले। गांव के लोगों ने मारपीट होते देखी तो शोर मचाया। चीख पुकार सुनकर अंबिका के घरवाले और गांववाले भागकर पहुंचे। मरणासन्न पड़े अंबिका को लेकर बेटे घूरपुर थाने से सीएचसी जसरा पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बुजुर्ग की पीटकर हत्या से परिजनों और गांव के लोगों में आक्रोश था। नाराज लोग शव लेकर सीएचसी के बाहर आ गए और चक्काजाम कर हंगामा करने लगे। सूचना पर घूरपुर एसओ समेत कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन देकर शव कब्जे में लेकर चीरघर भेजा। घटना से गांव में तनाव बना हुआ।
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घूरपुर पुलिस ने आनन-फानन में घेरेबंदी कर मुख्य आरोपी शंभू यादव को कुछ देर में गांव के बाहर से दबोच लिया। मृत अंबिका यादव के बेटे संतोष की तहरीर पर घूरपुर पुलिस ने हत्या का मुकदमा लिख लिया है। अन्य आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है। वहीं हत्याकांड से अंबिका के घर में कोहराम मचा है। दोनों बेटे संतोष, राकेश और पत्नी लालती देवी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस और पीएसी तैनात है।
खेत में मेड़ बनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सालों से रंजिश चल रही थी। पहले दो बार झगड़ा हुआ था। तब घूरपुर पुलिस ने दोनों पक्षों का शांतिभंग में चालान कर खानापूर्ति कर दी थी। पुलिस ने कभी भी इस विवाद का हल निकालने का प्रयास नहीं किया। जिसके चलते अंबिका को जान गंवानी पड़ी। अंबिका की पत्नी लालती देवी रोते हुए बार-बार पुलिस और प्रशासन को कोस रही थीं कि पुलिस की लापरवाही के चलते पति की हत्या हो गई।
अंबिका यादव को सुबह दूसरे पक्ष के मेड़ बांधने की जानकारी हुई तो वह गुस्से में अकेले ही और निहत्थे खेत की तरफ भागकर पहुंच गए। उसके दोनों बेटे भी घर पर थे। अंबिका ने न तो बेटों को बताया और न ही घर में रखी लाइसेंसी बंदूक लेकर गए। उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि नौबत मारपीट तक पहुंच जाएगी।