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शातिर को भारी पड़ी बैंक लोन हड़पने की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 30 Mar 2018 01:01 AM IST
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शातिर युवक को बैंक लोन हड़पने की कोशिश करना भारी पड़ गया। उसके हाथ पैसा आने से पहले ही उसकी पोल खुल गई। फर्जीवाड़ा के आरोप में एसबीआई बैंक शाखा प्रबंधक ने उस युवक के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस युवक की तलाश में लगी है।
थाना कीडगंज के मलाकराज मोहल्ला निवासी शमीम अहमद पुत्र अयूब हसन जिला हरिद्वार, उत्तराखंड का मूल निवासी है। उसने भारतीय स्टेट बैंक की सुलेमसराय शाखा में 20 फरवरी को खुद को सरकारी अध्यापक बताते हुए कार लोन के लिए आवेदन किया। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैंक ने आठ लाख का का ऋण मंजूर कर दिया। बैंक ने यह रकम लखनऊ स्थित एक कार एजेंसी को इलेक्ट्रानिक माध्यम से भेज दी। इसके बाद शमीम कार की डिलेवरी लेने लखनऊ पहुंच गया। एजेंसी पहुंचकर उसने कार लेने में असमर्थता जाहिर की और पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर कर देने को कहा। एजेंसी संचालक ने ऐसा करने से इंकार कर दिया।
उसके बाद शमीम ने दूसरी पेशकश करते हुए कम कीमत की कोई कार देकर शेष रकम खाते में ट्रांसफर कर देने की बात कही। इस पर भी एजेंसी संचालक राजी नहीं हुआ। उसने पूरा मामला शाखा प्रबंधक को बताया। शाखा प्रबंधक को शमीम पर शक हो गया। उन्होंने कार की डिलेवरी तुरंत रुकवा दी और शमीम के सारे कागजात फिर से चेक कराए। उसमें उसका फर्जीवाड़ा खुल गया। पता लगा कि बैंक की सत्यापन एजेंसी से मिलकर शमीम ने लोन के सारे कागज फर्जी लगाए थे। शाखा प्रबंधक का कहना है इस तरह का काम करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। कार लोन के अपेक्षाकृत आसान होने से शातिर अब इसके जरिये बैंकों को चूना लगाने की कोशिश कर रहे हैं। बैंक प्रबंधक ने धूमनगंज थाने में शमीम के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज करा दिया है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।
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थाना कीडगंज के मलाकराज मोहल्ला निवासी शमीम अहमद पुत्र अयूब हसन जिला हरिद्वार, उत्तराखंड का मूल निवासी है। उसने भारतीय स्टेट बैंक की सुलेमसराय शाखा में 20 फरवरी को खुद को सरकारी अध्यापक बताते हुए कार लोन के लिए आवेदन किया। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैंक ने आठ लाख का का ऋण मंजूर कर दिया। बैंक ने यह रकम लखनऊ स्थित एक कार एजेंसी को इलेक्ट्रानिक माध्यम से भेज दी। इसके बाद शमीम कार की डिलेवरी लेने लखनऊ पहुंच गया। एजेंसी पहुंचकर उसने कार लेने में असमर्थता जाहिर की और पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर कर देने को कहा। एजेंसी संचालक ने ऐसा करने से इंकार कर दिया।
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उसके बाद शमीम ने दूसरी पेशकश करते हुए कम कीमत की कोई कार देकर शेष रकम खाते में ट्रांसफर कर देने की बात कही। इस पर भी एजेंसी संचालक राजी नहीं हुआ। उसने पूरा मामला शाखा प्रबंधक को बताया। शाखा प्रबंधक को शमीम पर शक हो गया। उन्होंने कार की डिलेवरी तुरंत रुकवा दी और शमीम के सारे कागजात फिर से चेक कराए। उसमें उसका फर्जीवाड़ा खुल गया। पता लगा कि बैंक की सत्यापन एजेंसी से मिलकर शमीम ने लोन के सारे कागज फर्जी लगाए थे। शाखा प्रबंधक का कहना है इस तरह का काम करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। कार लोन के अपेक्षाकृत आसान होने से शातिर अब इसके जरिये बैंकों को चूना लगाने की कोशिश कर रहे हैं। बैंक प्रबंधक ने धूमनगंज थाने में शमीम के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज करा दिया है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।
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