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कूड़े के ढेर से कच्चे घर में लगी आग, जिंदा जला मासूम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:49 AM IST
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वैष्णो देवी पहुंची उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग
- फोटो : ANI
यमुनापार के कोरांव में शुक्रवार दोपहर कूड़े के ढेर से लगी आग ने मकान को चपेट में ले लिया। आग की लपटों में घिरकर मकान के अंदर सो रहा सात साल का मासूम जिंदा जल गया। कच्चे मकान को आग से चाराें तरफ से घिरा देखकर गांव के लोग दौड़े। जब तक आग को बुझाया जाता की मासूम की जलकर मौत हो चुकी थी। आंखों के सामने बेटे को जिंदा जलते देख मां-बाप अचेत हो गए। दो घंटे बाद दमकल पहुंची तो सब कुछ जलकर राख हो चुका था। अनहोनी की इस घटना से गांव के लोग भी सहमे हुए हैं।
कोरांव के अंबेडकर गांव का अभयराज उर्फ बच्चन मजदूरी करता है। उसके दो बेटों में बड़ा बेटा अभय कुमार (7) गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक का छात्र था। अभयराज के कच्चे मकान के ठीक पीछे बांस की कोठ है। जहां लोग कूड़ा-कचरा फेंकते हैं। शुक्रवार दोपहर गर्मी होने के चलते अभयराज और उसकी पत्नी छोटे बेटे को लेकर घर के पास स्थित बाग में थी। तभी अचानक कू ड़े के ढेर में लगी आग बांस की कोठ से होकर घर तक पहुंच गई। शोरगुल सुनकर गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। लोग आग बुझाने में जुट गए, लेकिन ग्रामीणों का प्रयास आग के आगे नाकाफी साबित हो रहा था। कच्चे मकान में लकड़ी के बांस-बल्ली होने के चलते आग घर के चारों तरफ फैल गई। चारों तरफ से आग ने मकान को चपेट में ले लिया।
अभय और उनकी पत्नी शिवकुमारी को बेटे की याद आई तो वे घर के अंदर फंसे बेटे को बाहर निकालने के लिए दौड़े, लेकिन गांव के लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। आग की लपटों से कोई भी मासूम को बाहर निकालने के लिए अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। सूचना पाकर कोरांव पुलिस पहुंची। लगभग दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड पहुंची तो सबकुछ जलकर राख हो चुका था। मासूम का झुलसा शव देखकर लोगों का कलेजा कांप गया। अभयराज ने अग्निकांड में बेटे को तो खोया ही गृहस्थी का सामान भी जलकर राख हो गया। घर में कुछ नहीं बचा है।
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कोरांव के अंबेडकर गांव का अभयराज उर्फ बच्चन मजदूरी करता है। उसके दो बेटों में बड़ा बेटा अभय कुमार (7) गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक का छात्र था। अभयराज के कच्चे मकान के ठीक पीछे बांस की कोठ है। जहां लोग कूड़ा-कचरा फेंकते हैं। शुक्रवार दोपहर गर्मी होने के चलते अभयराज और उसकी पत्नी छोटे बेटे को लेकर घर के पास स्थित बाग में थी। तभी अचानक कू ड़े के ढेर में लगी आग बांस की कोठ से होकर घर तक पहुंच गई। शोरगुल सुनकर गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। लोग आग बुझाने में जुट गए, लेकिन ग्रामीणों का प्रयास आग के आगे नाकाफी साबित हो रहा था। कच्चे मकान में लकड़ी के बांस-बल्ली होने के चलते आग घर के चारों तरफ फैल गई। चारों तरफ से आग ने मकान को चपेट में ले लिया।
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अभय और उनकी पत्नी शिवकुमारी को बेटे की याद आई तो वे घर के अंदर फंसे बेटे को बाहर निकालने के लिए दौड़े, लेकिन गांव के लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। आग की लपटों से कोई भी मासूम को बाहर निकालने के लिए अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। सूचना पाकर कोरांव पुलिस पहुंची। लगभग दो घंटे बाद फायर ब्रिगेड पहुंची तो सबकुछ जलकर राख हो चुका था। मासूम का झुलसा शव देखकर लोगों का कलेजा कांप गया। अभयराज ने अग्निकांड में बेटे को तो खोया ही गृहस्थी का सामान भी जलकर राख हो गया। घर में कुछ नहीं बचा है।
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