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सवालों के घेरे में आई रेलवे अस्पताल की सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:59 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उत्तर मध्य रेलवे के केंद्रीय चिकित्सालय में आठ अगस्त की रात एक युवती से हुए गैंगरेप ने अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहने तो केंद्रीय चिकित्सालय एनसीआर जोन का सबसे बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां सुरक्षा व्यवस्था का हाल उसके अनुरूप नहीं है। महज चार होमगार्ड के सहारे ही अस्पताल की पूरी सुरक्षा व्यवस्था है। इतना ही नहीं सीसीटीवी कैमरे की जद में पूरा अस्पताल भी नहीं है। यहां मुख्य गेट के अलावा भी प्रवेश के रास्ते हैं। इन रास्तों से अस्पताल परिसर में कभी भी प्रवेश किया जा सकता है। खास बात यह है कि संबंधित रास्ते पर एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है।
दरअसल अस्पताल की मुख्य ओपीडी के पीछे खाली पड़े स्थान पर आठ अगस्त की रात एक युवती से गैंगरैप हो गया था। इस मामले में अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के बीच लगातार कानाफूसी हो रही थी। गैंगरेप में पांच में चार अभियुक्त रेलवे अस्पताल में काम करने वाले ही कर्मचारी थे, इस वजह से एमडी डा. विनीत अग्रवाल तक यह मामला पहुंच गया। उन्होंने चारों आरोपी कर्मचारी बुलाए तो उसमें से एक ने रेप की बात भी कबूल ली। उसके द्वारा कबूलने के बाद एमडी ने एसएसपी को इसकी जानकारी दे दी। हालांकि चार दिन बाद यह मामला सामने को लेकर तमाम तरह के सवाल भी खड़े हो गए हैं। इस मामले में एक होमगार्ड भी गिरफ्तार हुआ है। अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था यहां की शुरू से ही राम भरोसे है। यहां तीन शिफ्ट में चार-चार होमगार्ड की ड्यूटी रहती है। इसके अलावा कुछ प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी यहां तैनात है। अस्पताल परिसर के चुनिंदा स्थानों पर कुल 23 सीसीटीवी कैमरे हैं। जो एक बड़े अस्पताल की सुरक्षा की दृष्टि से नाकाफी है। इसके अलावा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 11 की साइड से भी एनसीआरईएस के कार्यालय के बगल से सीधा रास्ता अस्पताल परिसर में आता है। यहां एडीईएन लाइन ऑफिस के साथ जूनियर इंजीनियर वर्क्स का कार्यालय है। इस पूरे रास्ते में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है। इसी रास्ते में अस्पताल परिसर की दीवार भी टूटी हुई है। इस रास्ते से भी यहां आसानी से प्रवेश किया जा सकता है।
गैंगरेप प्रकरण की जांच करने के लिए रेलवे द्वारा गठित कमेटी ने सोमवार को अस्पताल परिसर में जाकर जांच पड़ताल की। इस कमेटी में उत्तर मध्य रेलवे केंद्रीय चिकित्सालय के एमडी डा. विनीत अग्रवाल, सीएससी आरसी मीणा एवं सीपीओ प्रशासन ने कईकर्मियों से पूछताछ की। सोमवार को अस्पताल परिसर स्थित एमडी के कक्ष में तमाम अस्पताल कर्मियों के बयान दर्ज दिए गए। घटना स्थल का भी अफसरों ने निरीक्षण किया। वहां फोटोग्राफी भी करवाई गई। साथ ही अस्पताल परिसर में प्रवेश के सभी रास्तों को भी देखा गया। इलाहाबाद मंडल के सीनियर डीएससी अरुणेश कुमार भी आरपीएफ जवानों के साथ केंद्रीय चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने भी एमडी से मुलाकात की। तय किया गया कि यहां सुरक्षा और मजबूत की जाए। एनसीआर के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बसंल का कहना है यहां अब दस और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। उन्होंने जांच कमेटी की रिपोर्ट भी इसी सप्ताह आएगी। कहा कि चारों आरोपी पुलिस की कस्टडी में है। अगर वे छूटते हैं तो उनसे भी तीन सदस्यीय जांच टीम पूछताछ करेगी।
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केंद्रीय चिकित्सालय में गैंगरेप प्रकरण में नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन एवं एपवा की ओर से सोमवार को अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में हुए दुष्कर्म के दोषियों को सजा दिलाने एवं निर्देश लोगों ने न फंसाए जाने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने इस पूरे प्रकरण में अस्पताल प्रशासन की भूमिका को ही संदिग्ध बताया। यूनियन महामंत्री मनोज पांडेय के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कहा कि जब घटना आठ अगस्त को हुई तो इसमें इतने विलंब से क्यों कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे अस्पताल परिसर में संबंधित कर्मचारियों से मारपीट कर उनसे जबरन बयान लिखवाया गया। कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने अस्पताल परिसर में आरपीएफ तैनाती की भी मांग की। उधर प्रदर्शन में शामिल एपवा की जिला संयोजिका अमित चारू लेखा ने कहा कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं है। कहा कि रेलवे प्रशासन अस्पताल में महिलाओं की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम करे। इस दौरान विनय तिवारी, डीबी सिंह, सैय्यद इरफात अली, संजय तिवारी, सुरेश सिंह, संदीप सिंह, रजनी सोनकर, प्रज्ञा पाठक, सुषमा पाल, आरती निषाद, शोभा वर्मा, सीमा देवी, राजन पांडेय आदि मौजूद रहे।
रेलवे अस्पताल में युवती से गैंगरेप की गुत्थी दूसरे दिन सुलझने के बाद और उलझ गई। पुलिस ने भले ही मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया हो लेकिन घटना को लेकर अभी वह खुद पसोपेश में है। उधर जांच पड़ताल के दौरान यह बात भी सामने आई है कि युवती को अस्पताल परिसर में अपने साथ लेकर आरोपियों में शामिल अटेंडेट लेकर गया था। पुलिस सूत्रों की मानें तो हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ में जो भी बातें सामने आई हैं, उससे मामला सुलझने की जगह और उलझ गया है। पता चला है कि आरोपियों में शामिल अस्पताल का अटेंडेंट रविशंकर बिंद ही युवती को लेकर अस्पताल परिसर में पहुंचा था। पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि उसे युवती रॉयल होटल चौराहे के पास तब मिली थी जब वह वहां चाय पीने गया था। वहां युवती ने उससे कुछ रुपये मांगे जिसपर अटेंडेंट ने मना कर दिया।
उसने भूख लगने की बात कही जिस पर उसे नाश्ता कराने के बार रविशंकर ही अपने साथ अस्पताल लाया। यह बात रविशंकर भी कबूल कर रहा है। हालांकि इसके बाद क्या हुआ, इस बारे में पूछने पर आरोपी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि रात में युवती के ओटी असिस्टेंट मनमोहन लाल के राजापुर के गंगानगर स्थित घर जाने की भी बात सामने आई है। जहां से रहस्यमय हालात में वह सुबह गायब हो गई। पुलिस का कहना है कि डॉक्टर की तहरीर के मुताबिक नामजद सभी आरोपी घटना में शामिल थे। जबकि आरोपी खुद को निर्दोष बता रहे हैं। ऐसे में युवती के बयान के बाद ही सब कुछ साफ हो सकेगा। फिलहाल युवती को ढूढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उधर पुलिस देर शाम डॉ. संजीव कुमार हांडू का बयान दर्ज करने रेलवे अस्पताल पहुंची। वहां डॉक्टर से मामले से संबंधित जानकारी हासिल की गई। सूत्रों की मानें तो डॉक्टर ने अपने बयान में कहा है कि उन्हेें अपने स्टाफ से इस घटना की जानकारी मिली। युवती से रेप की बात एक आरोपी ने उनके सामने स्वीकार की है जिसमें उसने बताया है कि घटना अस्पताल के पीछे बने स्टैंड में टिनशेड के नीचे हुई। जानकारी के बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की।
पुलिस के सामने एक चुनौती यह भी है कि घटना के संबंध में एक भी गवाह या सबूत उसके पास नहीं है। दरअसल जिस जगह घटना की बात सामने आ रही है वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं है। ऐसे में किसी तरह के फुटेज के होने की संभावना भी खत्म हो गई। इसके अलावा फिलहाल ऐसा कोई गवाह सामने नहीं आया है जो घटना का चश्मदीद हो। ऐेसे में पीड़िता ही घटना के संबंध में कुछ बता सकती है।
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दरअसल अस्पताल की मुख्य ओपीडी के पीछे खाली पड़े स्थान पर आठ अगस्त की रात एक युवती से गैंगरैप हो गया था। इस मामले में अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के बीच लगातार कानाफूसी हो रही थी। गैंगरेप में पांच में चार अभियुक्त रेलवे अस्पताल में काम करने वाले ही कर्मचारी थे, इस वजह से एमडी डा. विनीत अग्रवाल तक यह मामला पहुंच गया। उन्होंने चारों आरोपी कर्मचारी बुलाए तो उसमें से एक ने रेप की बात भी कबूल ली। उसके द्वारा कबूलने के बाद एमडी ने एसएसपी को इसकी जानकारी दे दी। हालांकि चार दिन बाद यह मामला सामने को लेकर तमाम तरह के सवाल भी खड़े हो गए हैं। इस मामले में एक होमगार्ड भी गिरफ्तार हुआ है। अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था यहां की शुरू से ही राम भरोसे है। यहां तीन शिफ्ट में चार-चार होमगार्ड की ड्यूटी रहती है। इसके अलावा कुछ प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी यहां तैनात है। अस्पताल परिसर के चुनिंदा स्थानों पर कुल 23 सीसीटीवी कैमरे हैं। जो एक बड़े अस्पताल की सुरक्षा की दृष्टि से नाकाफी है। इसके अलावा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 11 की साइड से भी एनसीआरईएस के कार्यालय के बगल से सीधा रास्ता अस्पताल परिसर में आता है। यहां एडीईएन लाइन ऑफिस के साथ जूनियर इंजीनियर वर्क्स का कार्यालय है। इस पूरे रास्ते में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है। इसी रास्ते में अस्पताल परिसर की दीवार भी टूटी हुई है। इस रास्ते से भी यहां आसानी से प्रवेश किया जा सकता है।
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गैंगरेप प्रकरण की जांच करने के लिए रेलवे द्वारा गठित कमेटी ने सोमवार को अस्पताल परिसर में जाकर जांच पड़ताल की। इस कमेटी में उत्तर मध्य रेलवे केंद्रीय चिकित्सालय के एमडी डा. विनीत अग्रवाल, सीएससी आरसी मीणा एवं सीपीओ प्रशासन ने कईकर्मियों से पूछताछ की। सोमवार को अस्पताल परिसर स्थित एमडी के कक्ष में तमाम अस्पताल कर्मियों के बयान दर्ज दिए गए। घटना स्थल का भी अफसरों ने निरीक्षण किया। वहां फोटोग्राफी भी करवाई गई। साथ ही अस्पताल परिसर में प्रवेश के सभी रास्तों को भी देखा गया। इलाहाबाद मंडल के सीनियर डीएससी अरुणेश कुमार भी आरपीएफ जवानों के साथ केंद्रीय चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने भी एमडी से मुलाकात की। तय किया गया कि यहां सुरक्षा और मजबूत की जाए। एनसीआर के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बसंल का कहना है यहां अब दस और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। उन्होंने जांच कमेटी की रिपोर्ट भी इसी सप्ताह आएगी। कहा कि चारों आरोपी पुलिस की कस्टडी में है। अगर वे छूटते हैं तो उनसे भी तीन सदस्यीय जांच टीम पूछताछ करेगी।
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केंद्रीय चिकित्सालय में गैंगरेप प्रकरण में नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन एवं एपवा की ओर से सोमवार को अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में हुए दुष्कर्म के दोषियों को सजा दिलाने एवं निर्देश लोगों ने न फंसाए जाने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने इस पूरे प्रकरण में अस्पताल प्रशासन की भूमिका को ही संदिग्ध बताया। यूनियन महामंत्री मनोज पांडेय के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कहा कि जब घटना आठ अगस्त को हुई तो इसमें इतने विलंब से क्यों कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे अस्पताल परिसर में संबंधित कर्मचारियों से मारपीट कर उनसे जबरन बयान लिखवाया गया। कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने अस्पताल परिसर में आरपीएफ तैनाती की भी मांग की। उधर प्रदर्शन में शामिल एपवा की जिला संयोजिका अमित चारू लेखा ने कहा कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं है। कहा कि रेलवे प्रशासन अस्पताल में महिलाओं की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम करे। इस दौरान विनय तिवारी, डीबी सिंह, सैय्यद इरफात अली, संजय तिवारी, सुरेश सिंह, संदीप सिंह, रजनी सोनकर, प्रज्ञा पाठक, सुषमा पाल, आरती निषाद, शोभा वर्मा, सीमा देवी, राजन पांडेय आदि मौजूद रहे।
रेलवे अस्पताल में युवती से गैंगरेप की गुत्थी दूसरे दिन सुलझने के बाद और उलझ गई। पुलिस ने भले ही मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया हो लेकिन घटना को लेकर अभी वह खुद पसोपेश में है। उधर जांच पड़ताल के दौरान यह बात भी सामने आई है कि युवती को अस्पताल परिसर में अपने साथ लेकर आरोपियों में शामिल अटेंडेट लेकर गया था। पुलिस सूत्रों की मानें तो हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ में जो भी बातें सामने आई हैं, उससे मामला सुलझने की जगह और उलझ गया है। पता चला है कि आरोपियों में शामिल अस्पताल का अटेंडेंट रविशंकर बिंद ही युवती को लेकर अस्पताल परिसर में पहुंचा था। पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि उसे युवती रॉयल होटल चौराहे के पास तब मिली थी जब वह वहां चाय पीने गया था। वहां युवती ने उससे कुछ रुपये मांगे जिसपर अटेंडेंट ने मना कर दिया।
उसने भूख लगने की बात कही जिस पर उसे नाश्ता कराने के बार रविशंकर ही अपने साथ अस्पताल लाया। यह बात रविशंकर भी कबूल कर रहा है। हालांकि इसके बाद क्या हुआ, इस बारे में पूछने पर आरोपी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि रात में युवती के ओटी असिस्टेंट मनमोहन लाल के राजापुर के गंगानगर स्थित घर जाने की भी बात सामने आई है। जहां से रहस्यमय हालात में वह सुबह गायब हो गई। पुलिस का कहना है कि डॉक्टर की तहरीर के मुताबिक नामजद सभी आरोपी घटना में शामिल थे। जबकि आरोपी खुद को निर्दोष बता रहे हैं। ऐसे में युवती के बयान के बाद ही सब कुछ साफ हो सकेगा। फिलहाल युवती को ढूढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उधर पुलिस देर शाम डॉ. संजीव कुमार हांडू का बयान दर्ज करने रेलवे अस्पताल पहुंची। वहां डॉक्टर से मामले से संबंधित जानकारी हासिल की गई। सूत्रों की मानें तो डॉक्टर ने अपने बयान में कहा है कि उन्हेें अपने स्टाफ से इस घटना की जानकारी मिली। युवती से रेप की बात एक आरोपी ने उनके सामने स्वीकार की है जिसमें उसने बताया है कि घटना अस्पताल के पीछे बने स्टैंड में टिनशेड के नीचे हुई। जानकारी के बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की।
पुलिस के सामने एक चुनौती यह भी है कि घटना के संबंध में एक भी गवाह या सबूत उसके पास नहीं है। दरअसल जिस जगह घटना की बात सामने आ रही है वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं है। ऐसे में किसी तरह के फुटेज के होने की संभावना भी खत्म हो गई। इसके अलावा फिलहाल ऐसा कोई गवाह सामने नहीं आया है जो घटना का चश्मदीद हो। ऐेसे में पीड़िता ही घटना के संबंध में कुछ बता सकती है।