{"_id":"59aaff584f1c1b0b278b4e96","slug":"parmatma-tortured-on-step-by-step","type":"story","status":"publish","title_hn":"कदम-कदम पर परमात्मा को सताया","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कदम-कदम पर परमात्मा को सताया
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:39 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ट्रिपलआईटी के प्रोजेक्ट फेलो परमात्मा यादव की खुदकुशी के मामले में पुलिस ने जांच में प्रथम दृष्टया माना है कि कदम-कदम पर उसका उत्पीड़न किया गया था। यह भी सवाल उठा कि जब जून में उसकी जूनियर फेलोशिप समाप्त हो गई थी तो उसको अब तक क्यों रोक कर रखा गया था। नोड्यूज के लिए दिए गए आवेदन का निस्तारण भी नहीं किया गया और हाईस्कूल से लेकर पीजी तक के मूल प्रमाणपत्र भी आरोपी प्रो. अनुपम अग्रवाल ने वापस नहीं किए थे। इन सभी के आवेदन लैबोरेटरी से बरामद कर पुलिस ने उसे सील कर दिया है। पुलिस ने परमात्मा की अलमारी भी सील कर दी है।
वहीं आरोपी प्रो. अनुपम को पूछताछ के लिए ट्रिपलआईटी परिसर में सुरक्षा अधिकारी के जरिए तलब किया गया था, लेकिन वह नहीं आए। उन्हें जांच के दौरान अपना पक्ष रखने के लिए रविवार को सीओ सिविल लाइंस कार्यालय में तलब किया गया है। शनिवार को पुलिस उपाधीक्षक डॉ. श्रीशचंद्र परमात्मा के भाई के शिकायती पत्र की जांच के लिए ट्रिपलआईटी परिसर पहुंचे। वहां पर परमात्मा की लैबोरेटरी में पड़ताल की। उनके शोधार्थी साथियों के बयान भी लिए गए और घटना के बारे में जानकारी की गई। अधिकांश शोधार्थी का आरोप है कि प्रो. अनुपम अग्रवाल ने तीन साल तक परमात्मा का कदम-कदम पर उत्पीड़न किया। सुबह नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक शोधकार्य के स्थान घर का काम कराया जाता था। जून में उसके प्रोजेक्ट का समय पूरा हो गया था, उसके बावजूद उसे रिलीव होने के लिए नोड्यूज तक नहीं दिया गया, जिसका सबूत लैबोरेटरी में परमात्मा के हस्ताक्षर की हुई नोड्यूज एप्लीकेशन पड़ी मिली थी। उसके हाईस्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के मूल प्रमाणपत्र भी वापस नहीं किए थे। इसके लिए उसकी ओर से दिया गया आवेदनपत्र भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
अभी एक पक्ष को सुना गया है। प्रो. अनुपम अग्रवाल को अपना पक्ष रखने के लिए रविवार सुबह बुलाया है। उनका पक्ष सुनने के बाद ही जांच रिपोर्ट एसएसपी के सौंप दी जाएगी। फिर आगे की कार्रवाई होगी। -डॉ. श्रीशचंद्र, सीओ सिविल लाइंस
विज्ञापन
पुलिस उपाधीक्षक सिविल लाइंस के कार्यालय में अवनीश यादव ने छोटे भाई परमानंद का उत्पीड़न करने के सबूत सौंपे। करीब 40 संस्थानों से आए आफर की मेल की हार्ड कापी सौंपी है, जिनमें परमात्मा को इंटरव्यू के लिए बुलाया था। लेकिन मूल प्रमाणपत्र न होने के कारण वह साक्षात्कार में शामिल नहीं हो सका। इनमें एमएनआईटी इलाहाबाद, आईएसएम धनबाद और आईआईटी कानपुर, बनारस जैसे संस्थान भी शामिल हैं। कई संस्थानों में तो उसे जाने की अनुमति नहीं दी गई तो स्काई इंटरव्यू की अनुमति मांगने का जिक्र किया है। अवनीश यादव दिल्ली में सीआईएसएफ में इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने कहा है कि शोध के स्थान पर प्रो. अनुपम व्यक्तिगत कार्य कराते थे। जून में कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उन्होंने परमात्मा को रिलीव नहीं किया। पीएचडी के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास होने के बावजूद पंजीकृत नहीं कराया गया। परिवार में सभी से परमात्मा ने चर्चा की थी कि प्रो. अनुपम उसका कैरियर खराब करने पर तुले हुए हैं। वह शोध कार्य में न तो सहयोग कर रहे हैं और न ही रिलीव कर रहे हैं। उनके सहयोग न करने के कारण कैरियर चौपट होता नजर आ रहा है।
परमानंद की शादी आठ महीने गोरखपुर से 20 किलोमीटर दूर एक गांव की रितु यादव से हुई थी। रितु ने एमएसपी प्रथमश्रेणी में की है और वह भी जेआरएफ कंपटीशन की तैयारी में थीं। परमात्मा ट्रिपिल आईटी के निकट एक मकान में पत्नी रितु और मां के साथ रह रहे थे। ट्रिपलआईटी के प्रोजेक्ट फेलो परमात्मा के चार दिन पहले आत्महत्या करने की जांच एसएसपी आनंद कुलकर्णी के आदेश पर की जा रही है। उनसे परमात्मा के भाई अवनीश मिले थे। उन्होंने एसएसपी के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किए और कहा कि मेरे भाई ने प्रोफेसर के स्तर से किए गए उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की है। एसएसपी ने बड़े भाई के ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए सीओ सिविल लाइंस को जांच के आदेश दिए थे। उसी के बाद इस प्रकरण की जांच शुरू हुई है।
विज्ञापन
वहीं आरोपी प्रो. अनुपम को पूछताछ के लिए ट्रिपलआईटी परिसर में सुरक्षा अधिकारी के जरिए तलब किया गया था, लेकिन वह नहीं आए। उन्हें जांच के दौरान अपना पक्ष रखने के लिए रविवार को सीओ सिविल लाइंस कार्यालय में तलब किया गया है। शनिवार को पुलिस उपाधीक्षक डॉ. श्रीशचंद्र परमात्मा के भाई के शिकायती पत्र की जांच के लिए ट्रिपलआईटी परिसर पहुंचे। वहां पर परमात्मा की लैबोरेटरी में पड़ताल की। उनके शोधार्थी साथियों के बयान भी लिए गए और घटना के बारे में जानकारी की गई। अधिकांश शोधार्थी का आरोप है कि प्रो. अनुपम अग्रवाल ने तीन साल तक परमात्मा का कदम-कदम पर उत्पीड़न किया। सुबह नौ बजे से लेकर रात नौ बजे तक शोधकार्य के स्थान घर का काम कराया जाता था। जून में उसके प्रोजेक्ट का समय पूरा हो गया था, उसके बावजूद उसे रिलीव होने के लिए नोड्यूज तक नहीं दिया गया, जिसका सबूत लैबोरेटरी में परमात्मा के हस्ताक्षर की हुई नोड्यूज एप्लीकेशन पड़ी मिली थी। उसके हाईस्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के मूल प्रमाणपत्र भी वापस नहीं किए थे। इसके लिए उसकी ओर से दिया गया आवेदनपत्र भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
विज्ञापन
अभी एक पक्ष को सुना गया है। प्रो. अनुपम अग्रवाल को अपना पक्ष रखने के लिए रविवार सुबह बुलाया है। उनका पक्ष सुनने के बाद ही जांच रिपोर्ट एसएसपी के सौंप दी जाएगी। फिर आगे की कार्रवाई होगी। -डॉ. श्रीशचंद्र, सीओ सिविल लाइंस
विज्ञापन
पुलिस उपाधीक्षक सिविल लाइंस के कार्यालय में अवनीश यादव ने छोटे भाई परमानंद का उत्पीड़न करने के सबूत सौंपे। करीब 40 संस्थानों से आए आफर की मेल की हार्ड कापी सौंपी है, जिनमें परमात्मा को इंटरव्यू के लिए बुलाया था। लेकिन मूल प्रमाणपत्र न होने के कारण वह साक्षात्कार में शामिल नहीं हो सका। इनमें एमएनआईटी इलाहाबाद, आईएसएम धनबाद और आईआईटी कानपुर, बनारस जैसे संस्थान भी शामिल हैं। कई संस्थानों में तो उसे जाने की अनुमति नहीं दी गई तो स्काई इंटरव्यू की अनुमति मांगने का जिक्र किया है। अवनीश यादव दिल्ली में सीआईएसएफ में इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने कहा है कि शोध के स्थान पर प्रो. अनुपम व्यक्तिगत कार्य कराते थे। जून में कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उन्होंने परमात्मा को रिलीव नहीं किया। पीएचडी के लिए एंट्रेंस एग्जाम पास होने के बावजूद पंजीकृत नहीं कराया गया। परिवार में सभी से परमात्मा ने चर्चा की थी कि प्रो. अनुपम उसका कैरियर खराब करने पर तुले हुए हैं। वह शोध कार्य में न तो सहयोग कर रहे हैं और न ही रिलीव कर रहे हैं। उनके सहयोग न करने के कारण कैरियर चौपट होता नजर आ रहा है।
परमानंद की शादी आठ महीने गोरखपुर से 20 किलोमीटर दूर एक गांव की रितु यादव से हुई थी। रितु ने एमएसपी प्रथमश्रेणी में की है और वह भी जेआरएफ कंपटीशन की तैयारी में थीं। परमात्मा ट्रिपिल आईटी के निकट एक मकान में पत्नी रितु और मां के साथ रह रहे थे। ट्रिपलआईटी के प्रोजेक्ट फेलो परमात्मा के चार दिन पहले आत्महत्या करने की जांच एसएसपी आनंद कुलकर्णी के आदेश पर की जा रही है। उनसे परमात्मा के भाई अवनीश मिले थे। उन्होंने एसएसपी के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किए और कहा कि मेरे भाई ने प्रोफेसर के स्तर से किए गए उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की है। एसएसपी ने बड़े भाई के ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए सीओ सिविल लाइंस को जांच के आदेश दिए थे। उसी के बाद इस प्रकरण की जांच शुरू हुई है।