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शहीद मुकेश का हुआ अंतिम संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2014 01:17 AM IST
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नवाबगंज/कौड़िहार (इलाहाबाद)। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान मुकेश कुमार का बृहस्पतिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ शृंग्वेरपुर घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों और सीआरपीएफ के जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया और पिता पृथ्वीपाल ने मुखाग्नि दी। जब सलामी दी जा रही थी तब घाट ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, मुकेश तेरा नाम रहेगा’ के नारे से गूंज उठा।
बुधवार को नवाबगंज स्थित शहीद के गांव नवाबगंज थाना क्षेत्र के बजहा के डिहवा में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने और परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार नहीं होने दिया था।
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बृहस्पतिवार को पुलिस अफसरों ने परिजनों तथा ग्रामीणों से बात की और उनको अंतिम संस्कार के लिए राजी करवा लिया। परिजनों ने बुधवार को शव रोकने की घटना पर खेद प्रकट किया। कहा कि तमाशा बनाना उनकी मंशा नहीं थी। आरोप यह भी लगा कि गांव के बाहर के कुछ लोगों ने नेतागिरी चमकाने के लिए ग्रामीणों को भड़काया था।
शहीद के गांव सुबह नौ बजे सीआरपीएफ के कमांडेंट यूबी मिश्रा पहुंच गए थे।
सीओ नवाबगंज निशिकांत राय, सीओ सोरांव लाल प्रताप सिंह भी शहीद के पिता से मिले और उनको भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव मदद करेगी। इसके कुछ ही देर बाद सीआरपीएफ की टुकड़ी तीन गाड़ियों के साथ पहुंच गई। पहले परिजनों और ग्रामीणों ने शहीद को कंधा दिया। बाद सीआरपीएफ के कमांडेंट समेत जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। पार्थिव शरीर को प्राथमिक विद्यालय तक कंधे पर लाया गया। प्राथमिक विद्यालय से शव को वाहन से शृंग्वेरपुर घाट तक लाया गया। घाट पर 11.45 बजे सीआरपीएफ के जवानों द्वारा अंतिम सलामी दी गई।
सीआरपीएफ के 16 जवानों ने तीन-तीन राउंड कुल 48 फायर कर शहीद को अंतिम सलामी दी। जिस वक्त अंतिम सलामी दी जा रही थी, परिजनों, ग्रामीणों के साथ ही सीआरपीएफ जवानों की आंखें भी भर आईं। मुकेश के पिता को सीआरपीएफ के अफसरों ने गले लगाकर सांत्वना दी। कमांडेंट ने पुष्प चक्र अर्पित किया।
शहीद के अंतिम संस्कार में एसडीएम सोरांव आलोक वर्मा, पूर्व विधायक गुरु प्रसाद मौर्य, भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के प्रतिनिधि एवं पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय, कुंदन यादव, शिव प्रसाद मिश्र, बाबूलाल भंवरा, जिला पंचायत सदस्य आशीष पांडेय, दूधनाथ पटेल, रामआसरे सरोज, रामकै लाश सरोज, जवाहरलाल पटेल, रामचंद्र फौजी, रामचंद्र सरोज, राजू मौर्या, संजय तिवारी, शैलेंद्र शुक्ल दीपक, आनंद पांडेय, कन्हैयालाल पांडेय, जिया लाल गौतम आदि शामिल हुए।
अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस की स्थिति बृहस्पतिवार सुबह तब तक बनी रही जब तक अफसरों ने शहीद के पिता पृथ्वीपाल से बात नहीं कर ली। जब परिजनों ने हामी भर दी तो आसपास का पूरा इलाका श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़ा। नवाबगंज चौराहे पर भी शव यात्रा को कुछ देर के लिए रोका गया जहां लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सीआरपीएफ की तीन गाड़ियों में से एक ने शव यात्रा के आरंभ होते ही धोखा दे दिया। गाड़ी जैसे ही गांव के बाहर निकली, उसका पहिया पंक्चर हो गया। इस कारण शवयात्रा 15 मिनट तक रुकी रही।
अंतिम संस्कार में पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अफसर शामिल नहीं हुए। लोग डीएम एवं एसएसपी का इंतजार ही करते रह गए।
अंतिम सलामी के दौरान सीआरपीएफ जवानों की राइफलें फायरिंग के दौरान कई बार फंसीं। लोग तो यह भी कहते रहे कि जब राइफलें यहां धोखा दे रही हैं तो दुश्मनों से मोर्चे लेते वक्त क्या हाल होता होगा।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी शुक्रवार शाम छह बजे शहीद मुकेश कुमार के गांव आएंगे। भाजपा नेता कन्हैया लाल पांडेय ने बताया कि शहीद के परिजनों को भाजपा की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में ही पिछले वर्ष सात जनवरी को नक्सली हमले में शहीद हुए मलाक बलऊ गांव के शहीद बाबूलाल पटेल के नाम पर शहीद द्वार बनाने का काम बृहस्पतिवार को आरंभ हो गया। शहीद द्वार के निर्माण में पौने चार लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। विधायक अंसार अहमद ने बताया कि लोकसभा चुनाव की वजह से निर्माण कार्य में विलंब हुआ। प्रदेश सरकार की अनुमति पर जनेश्वर मिश्र के नाम पर शुरू की गई योजना के तहत द्वार का निर्माण कराया जाएगा।
शहीद मुकेश कुमार के नाम पर भी नवाबगंज क्षेत्र में शहीद द्वार का निर्माण होगा। भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के प्रतिनिधि पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय ने बताया कि इसके लिए सांसद ने 10 लाख रुपये देने की घोषणा की है।
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परिजनों और सीआरपीएफ के जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया और पिता पृथ्वीपाल ने मुखाग्नि दी। जब सलामी दी जा रही थी तब घाट ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, मुकेश तेरा नाम रहेगा’ के नारे से गूंज उठा।
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बुधवार को नवाबगंज स्थित शहीद के गांव नवाबगंज थाना क्षेत्र के बजहा के डिहवा में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने और परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार नहीं होने दिया था।
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बृहस्पतिवार को पुलिस अफसरों ने परिजनों तथा ग्रामीणों से बात की और उनको अंतिम संस्कार के लिए राजी करवा लिया। परिजनों ने बुधवार को शव रोकने की घटना पर खेद प्रकट किया। कहा कि तमाशा बनाना उनकी मंशा नहीं थी। आरोप यह भी लगा कि गांव के बाहर के कुछ लोगों ने नेतागिरी चमकाने के लिए ग्रामीणों को भड़काया था।
शहीद के गांव सुबह नौ बजे सीआरपीएफ के कमांडेंट यूबी मिश्रा पहुंच गए थे।
सीओ नवाबगंज निशिकांत राय, सीओ सोरांव लाल प्रताप सिंह भी शहीद के पिता से मिले और उनको भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव मदद करेगी। इसके कुछ ही देर बाद सीआरपीएफ की टुकड़ी तीन गाड़ियों के साथ पहुंच गई। पहले परिजनों और ग्रामीणों ने शहीद को कंधा दिया। बाद सीआरपीएफ के कमांडेंट समेत जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। पार्थिव शरीर को प्राथमिक विद्यालय तक कंधे पर लाया गया। प्राथमिक विद्यालय से शव को वाहन से शृंग्वेरपुर घाट तक लाया गया। घाट पर 11.45 बजे सीआरपीएफ के जवानों द्वारा अंतिम सलामी दी गई।
सीआरपीएफ के 16 जवानों ने तीन-तीन राउंड कुल 48 फायर कर शहीद को अंतिम सलामी दी। जिस वक्त अंतिम सलामी दी जा रही थी, परिजनों, ग्रामीणों के साथ ही सीआरपीएफ जवानों की आंखें भी भर आईं। मुकेश के पिता को सीआरपीएफ के अफसरों ने गले लगाकर सांत्वना दी। कमांडेंट ने पुष्प चक्र अर्पित किया।
शहीद के अंतिम संस्कार में एसडीएम सोरांव आलोक वर्मा, पूर्व विधायक गुरु प्रसाद मौर्य, भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के प्रतिनिधि एवं पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय, कुंदन यादव, शिव प्रसाद मिश्र, बाबूलाल भंवरा, जिला पंचायत सदस्य आशीष पांडेय, दूधनाथ पटेल, रामआसरे सरोज, रामकै लाश सरोज, जवाहरलाल पटेल, रामचंद्र फौजी, रामचंद्र सरोज, राजू मौर्या, संजय तिवारी, शैलेंद्र शुक्ल दीपक, आनंद पांडेय, कन्हैयालाल पांडेय, जिया लाल गौतम आदि शामिल हुए।
अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस की स्थिति बृहस्पतिवार सुबह तब तक बनी रही जब तक अफसरों ने शहीद के पिता पृथ्वीपाल से बात नहीं कर ली। जब परिजनों ने हामी भर दी तो आसपास का पूरा इलाका श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़ा। नवाबगंज चौराहे पर भी शव यात्रा को कुछ देर के लिए रोका गया जहां लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सीआरपीएफ की तीन गाड़ियों में से एक ने शव यात्रा के आरंभ होते ही धोखा दे दिया। गाड़ी जैसे ही गांव के बाहर निकली, उसका पहिया पंक्चर हो गया। इस कारण शवयात्रा 15 मिनट तक रुकी रही।
अंतिम संस्कार में पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अफसर शामिल नहीं हुए। लोग डीएम एवं एसएसपी का इंतजार ही करते रह गए।
अंतिम सलामी के दौरान सीआरपीएफ जवानों की राइफलें फायरिंग के दौरान कई बार फंसीं। लोग तो यह भी कहते रहे कि जब राइफलें यहां धोखा दे रही हैं तो दुश्मनों से मोर्चे लेते वक्त क्या हाल होता होगा।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी शुक्रवार शाम छह बजे शहीद मुकेश कुमार के गांव आएंगे। भाजपा नेता कन्हैया लाल पांडेय ने बताया कि शहीद के परिजनों को भाजपा की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में ही पिछले वर्ष सात जनवरी को नक्सली हमले में शहीद हुए मलाक बलऊ गांव के शहीद बाबूलाल पटेल के नाम पर शहीद द्वार बनाने का काम बृहस्पतिवार को आरंभ हो गया। शहीद द्वार के निर्माण में पौने चार लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है। विधायक अंसार अहमद ने बताया कि लोकसभा चुनाव की वजह से निर्माण कार्य में विलंब हुआ। प्रदेश सरकार की अनुमति पर जनेश्वर मिश्र के नाम पर शुरू की गई योजना के तहत द्वार का निर्माण कराया जाएगा।
शहीद मुकेश कुमार के नाम पर भी नवाबगंज क्षेत्र में शहीद द्वार का निर्माण होगा। भाजपा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के प्रतिनिधि पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय ने बताया कि इसके लिए सांसद ने 10 लाख रुपये देने की घोषणा की है।