{"_id":"58811c094f1c1be232efe586","slug":"make-statements-in-court-a-day-earlier-killed-dr-bansal","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट में बयान देने के एक दिन पहले ही मार दिए गए डॉ. बंसल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कोर्ट में बयान देने के एक दिन पहले ही मार दिए गए डॉ. बंसल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 20 Jan 2017 01:48 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ. एके बंसल की जिस दिन हत्या हुई थी उसके अगले दिन उनको खुद पर हुए जानलेवा हमले के मुकदमे में बयान दर्ज कराना था। स्पेशल सीजेएम कोर्ट में डा. बंसल को 13 जनवरी को अपना बयान दर्ज कराना था जबकि 12 जनवरी की शाम उनकी हत्या कर दी गई।
डॉ. बंसल के ऊपर पांच सितंबर 2015 को जानलेवा हमला हुआ था। इस मामले में उन्होंने प्रापर्टी डीलर संजीव अग्रवाल, राखी मुखर्जी आदि के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और जानलेवा हमले आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद नामजद अभियुक्तों की कोई भूमिका न पाते हुए मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। डॉ. बंसल ने पुलिस की एफआर को अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनकी प्रोटेस्ट अर्जी पर सुनवाई के बाद इस प्रकरण को परिवाद के तौर पर दर्ज कर लिया। डाक्टर बंसल को इसी परिवाद में बतौर वादी अपना बयान 13 जनवरी को दर्ज कराना था, मगर इससे महज कुछ घंटे पहले उनकी हत्या हो गई।
डॉ.बंसल के खिलाफ हाईकोर्ट के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मिश्र की मौत का मामला भी अभी लंबित था। लक्ष्मीकांत की मृत्यु जीवन ज्योति अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। इसके बाद वकीलों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की थी। वकीलों के दबाव में डॉ.बंसल के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, मारपीट आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। हाईकोर्ट बार के तत्कालीन संयुक्त सचिव सुरेंद्र कुमार मिश्र आदि अधिवक्ताओें ने हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। इस पर बाद में डॉ.बंसल को सुप्रीमकोर्ट से स्टे मिल गया था। सुरेंद्र मिश्र ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट से स्टे समाप्त करा दिया था, मगर मुकदमे में विवेचक ने अन्य धाराओं का लोप करते हुए मात्र मारपीट के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला अभी भी अवर न्यायालय में विचाराधीन है।
विज्ञापन
डॉ.बंसल पर इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत और धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से अधिकांश में उनको सुप्रीमकोर्ट से राहत मिल गई है। हालांकि, कुछ मुकदमों में पुलिस ने आरोपपत्र भी दाखिल किया है, जबकि कुछ में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। डॉ.बंसल के अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र के मुताबिक अधिकांश मामले में स्टे चल रहा है।
1- कीडगंज थाने में हत्या, मारपीट का मुकदमा 2009 में श्रीकांत मिश्र ने दर्ज करसा था।
2 गैरइरादतन हत्या का मुकदमा कीडगंज थाने में धीरज कुमार सोनी ने 2007 में दर्ज कराया था।
3-धोखाधड़ी, मारपीट आदि का मुकदमा कीडगंज थाने में राजेश कुमार द्विवेदी ने 2009 में कोर्ट से दर्ज कराया
4-डकैती और मारपीट का मुकदमा कीडगंज थाने में फतेहपुर के राजाराम कोरी ने दर्ज कराया था।
5- धोखाधड़ी का मुकदमा अतरसुइया के राकेश कुमार अग्रवाल ने कीडगंज थाने में 2009 में दर्ज कराया
6- धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र का केस 2009 में रवींद्र कुमार पांडेय ने करछना थाने में 2009 में दर्ज कराया था।
7- धोखाधड़ी का मुकदमा रामकैलाश ने करछना थाने में 2009 में दर्ज कराया।
8- औद्योगिक थाना क्षेत्र में भी 2009 में डा बंसल के खिलाफ एक मुकदमा करछना थाने से स्थानांतरित होकर आया था।
विज्ञापन
डॉ. बंसल के ऊपर पांच सितंबर 2015 को जानलेवा हमला हुआ था। इस मामले में उन्होंने प्रापर्टी डीलर संजीव अग्रवाल, राखी मुखर्जी आदि के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और जानलेवा हमले आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद नामजद अभियुक्तों की कोई भूमिका न पाते हुए मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। डॉ. बंसल ने पुलिस की एफआर को अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनकी प्रोटेस्ट अर्जी पर सुनवाई के बाद इस प्रकरण को परिवाद के तौर पर दर्ज कर लिया। डाक्टर बंसल को इसी परिवाद में बतौर वादी अपना बयान 13 जनवरी को दर्ज कराना था, मगर इससे महज कुछ घंटे पहले उनकी हत्या हो गई।
विज्ञापन
डॉ.बंसल के खिलाफ हाईकोर्ट के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मिश्र की मौत का मामला भी अभी लंबित था। लक्ष्मीकांत की मृत्यु जीवन ज्योति अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई थी। इसके बाद वकीलों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की थी। वकीलों के दबाव में डॉ.बंसल के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, मारपीट आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। हाईकोर्ट बार के तत्कालीन संयुक्त सचिव सुरेंद्र कुमार मिश्र आदि अधिवक्ताओें ने हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। इस पर बाद में डॉ.बंसल को सुप्रीमकोर्ट से स्टे मिल गया था। सुरेंद्र मिश्र ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट से स्टे समाप्त करा दिया था, मगर मुकदमे में विवेचक ने अन्य धाराओं का लोप करते हुए मात्र मारपीट के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला अभी भी अवर न्यायालय में विचाराधीन है।
विज्ञापन
डॉ.बंसल पर इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत और धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से अधिकांश में उनको सुप्रीमकोर्ट से राहत मिल गई है। हालांकि, कुछ मुकदमों में पुलिस ने आरोपपत्र भी दाखिल किया है, जबकि कुछ में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। डॉ.बंसल के अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र के मुताबिक अधिकांश मामले में स्टे चल रहा है।
1- कीडगंज थाने में हत्या, मारपीट का मुकदमा 2009 में श्रीकांत मिश्र ने दर्ज करसा था।
2 गैरइरादतन हत्या का मुकदमा कीडगंज थाने में धीरज कुमार सोनी ने 2007 में दर्ज कराया था।
3-धोखाधड़ी, मारपीट आदि का मुकदमा कीडगंज थाने में राजेश कुमार द्विवेदी ने 2009 में कोर्ट से दर्ज कराया
4-डकैती और मारपीट का मुकदमा कीडगंज थाने में फतेहपुर के राजाराम कोरी ने दर्ज कराया था।
5- धोखाधड़ी का मुकदमा अतरसुइया के राकेश कुमार अग्रवाल ने कीडगंज थाने में 2009 में दर्ज कराया
6- धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र का केस 2009 में रवींद्र कुमार पांडेय ने करछना थाने में 2009 में दर्ज कराया था।
7- धोखाधड़ी का मुकदमा रामकैलाश ने करछना थाने में 2009 में दर्ज कराया।
8- औद्योगिक थाना क्षेत्र में भी 2009 में डा बंसल के खिलाफ एक मुकदमा करछना थाने से स्थानांतरित होकर आया था।