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हवाई ख्वाहिशों के फेर में गंवाई जान

Thu, 11 Aug 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 11 Aug 2016 02:01 AM IST
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High aspirations apparently lost lives
मृतक संदीप ‌स‌िंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अपने परिवार छोड़कर भागे संदीप सिंह और नूतन ओझा उर्फ रीतू उर्फ नीतू पांडेय के कत्ल की वारदात किसी फिल्मी कहानी सरीखी है। बेहद ऊंची महत्वाकांक्षा और जल्द से जल्द करोड़ों रुपये कमाने की हसरत ने उन्हें राह से भटका दिया। वे कारोबार की बजाय अपराध के रास्ते पर बढ़ते गए। नतीजा सामने है।
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उनके परिचितों से बातचीत में पता चला कि वे बेहद तेज रफ्तार से आगे बढ़ना चाहते थे। बिना ज्यादा समय गंवाए दौलतमंद बनने का ख्वाब देख रहे थे। चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। एनजीओ और रीयल एस्टेट के कारोबार की आड़ में वे तमाम ऐसे काम कर रहे थे, जो पुलिस की नजर में अपराध हैं। दोहरे कत्ल के पीछे जल निगम के अधिकारी के अपहरण और फिरौती वसूली का खेल उजागर होने से भी उनकी आपराधिक गतिविधियों का पता चला है। इस बारे में पता चलने के  बाद से उन दोनों के परिजन, करीबी, ससुराल वाले तथा रिश्तेदार सकते में हैं।
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मूल रूप से कौशाम्बी में पिपरी इलाके के चिल्ला गांव निवासी तेज सिंह कुछ ही दिन पहले एयरफोर्स के मैकेनिक पद से रिटायर हुए हैं। संदीप उनके दो बेटों में बड़ा था। छोटा भाई प्रदीप उर्फ गोलू पढ़ाई कर रहा है। उनकी तीन बेटियां हैं। तेज सिंह परिवार सहित शहर के ट्रांसपोर्ट नगर में रहने लगे। संदीप की नौकरी एमईएस (मिलेट्री इंजीनियरिंग सर्विस) में लग गई थी। उसकी तैनाती सप्लाई डिपो के पास कार्यालय में थी। हैप्पी होम के पास सरकारी कमरा भी मिला था।
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उसका ब्याह तीन साल पहले सरायइनायत के हबूसा बहादुरपुर गांव निवासी राकेश सिंह की बेटी रिंदू सिंह से किया गया था। राकेश का सीमेंट-सरिया का कारोबार है। रिंदू ने बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम चाहत रखा गया है। रिश्तेदार बताते हैं कि संदीप ऊंचे ख्यालात वाला शख्स था। उसे एमईएस की चतुर्थ श्रेणी की नौकरी नहीं पसंद थी और न ही पारिवारिक जीवन। वह ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने के लिए प्रापर्टी के धंधे से जुड़ गया और नौकरी पर जाना कम कर दिया।  इसी दौरान उसका संपर्क नूतन ओझा से हो गया, जो उससे भी ज्यादा हवाई ख्वाबों वाली थी। करीब दो साल पहले उनकी मुलाकात हुई। कुछ महीने बाद वे अपने-अपने परिवार को छोड़ लखनऊ भाग गए। 

एसपी गंगापार ने बताया कि मारी गई नूतन ओझा उर्फ रीतू सिंह उर्फ नीतू पांडेय करेली के बेनीगंज में रहने वाले त्रिलोचन पांडेय की बेटी थी। उसका ब्याह प्रतापगढ़ में हथिगवां इलाके के अरविंद ओझा से किया गया था, जिसके ईंट भट्ठे हैं। अरविंद पत्नी नूतन के साथ शहर के अल्लापुर में रहने लगा था। मगर दंपति में बनी नहीं। अपने हवाई सपने पूरे करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार नूतन को अपने ही ख्यालात वाले संदीप का साथ मिला और वह उसके साथ शहर छोड़कर चली गई। नूतन का भाई अरविंद शाम को पोस्टमार्टम हाउस आया तो पुलिस को बहन के बारे में बताते समय उसके चेहरे पर गुस्सा ज्यादा झलक रहा था। उसने पूछताछ कर रहे दरोगा से कहा-क्या बताऊं साहब, ये तो होना ही था। 

संदीप की करतूत ने उसके ससुरालियों तथा परिवार के लोगों को बेहद दुखी कर दिया था। साल भर पहले एक रोज संदीप अचानक बिना कुछ बताए घर से लापता हो गया था। खोजबीन की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला तो पिता तेज सिंह ने धूमनगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। कुछ समय बाद मालूम हुआ कि वह किसी शादीशुदा युवती के साथ लखनऊ में टिका है। कुछ धंधा करने लगा है। नाराज पिता तेज सिंह ने संदीप को जायदाद से बेदखल कर उसके हिस्से की संपत्ति बहू रिंदू के नाम वसीयत कर दी। परिवार के लोगों ने बताया कि घर छोड़कर जाने के बाद से संदीप ने परिजनों या रिश्तेदारों से संपर्क नहीं रखा। उसके जीजा नरेंद्र सिंह सिक्योरिटी गार्ड है। 2013 में संदीप ने स्कार्पियो खरीदी थी, जिसमें नरेंद्र को गारंटर बनाया था।


पिता तेज सिंह ने बताया कि दो माह पहले संदीप अपने बाबा की बीमारी की खबर पाकर इलाहाबाद में घर आया था। उसने नूतन को नहीं बताया था क्योंकि वह घर जाने और परिजनों से कोई भी वास्ता रखने का विरोध करती थी। संदीप बिना बताए घर आया तो बौखलाई नूतन उसे खोजते यहां चिल्ला गांव और टीपी नगर में घर पहुंच गई थी। उसने घर आकर काफी झगड़ा और हंगामा किया था। फिर वह संदीप के साथ लखनऊ लौट गई थी।
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