{"_id":"59d92e7b4f1c1bc8678b4a35","slug":"four-missing-including-bank-cashier-drowned-in-middle-ganges","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीच गंगा में डूबी नाव, बैंक कैशियर समेत चार लापता","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बीच गंगा में डूबी नाव, बैंक कैशियर समेत चार लापता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:16 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हंडिया के टेला घाट से मेजा के मदरा घाट की ओर जा रही एक छोटी नाव (डोंगी) शनिवार की शाम बीच गंगा में डूब गई। हादसे में एक बैंक कैशियर समेत चार लोग लापता हो गए। बाकी 12 लोगों ने तैरकर जान बचा ली। घटना से दोनों घाट पर घंटों हाहाकार मचा रहा। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से लापता लोगों की खोजबीन शुरू कर दी है। देर रात तक गोताखोर उन्हें खोजते रहे।
हंडिया के टेला गंगा घाट से मेजा के मदरा घाट की ओर जाने वाली स्टीमर शनिवार शाम खराब हो गई थी। ठेकेदार विनय ने मदरा गांव के बनकेश निषाद को फोन कर टेला घाट पर नाव मंगा ली। बनकेश के दो साथी उसमें पहले से सवार थे। नाव पर नाविक ने 16 लोगों को बिठा लिया और पांच बाइक और पांच साइकिल भी लाद ली। ओवरलोड होने से नाव शुरुआत से ही डगमग कर रही थी। बीच नदी में पहुंचते ही नाव में पानी भरने लगा। लोग दहशत से चीखने लगे। जब नाव में ज्यादा पानी भरा तो उस पर सवार लोग कूदने लगे। इसी आपाधापी में नाव डूब गई। बाकी लोग तो निकल आए, लेकिन मेजा के चुरबना गांव निवासी विकास पटेल (35), ओनउर गांव के धीरज मिश्रा (30) और मेजा के भिंगारी गांव के संदीप मिश्रा (32) और हंडिया के भेलसी गांव के निखिल यादव (35) लापता हो गए। विकास पटेल बैंक आफ बड़ौदा की बरौत शाखा में कैशियर हैं। उनके साथ बैंक के चपरासी लाल जी (50) भी थे। लालजी तैरकर मदरा घाट पहुंच गए। उनके साथ इदरीस, अजय मिश्रा (32) निवासी ओनउर, तरवा गांव के मंगला प्रसाद (35), मदरा गांव के मयंक मिश्रा (28), निशांत मिश्रा (22), विशाल मिश्रा (28), राजू मिश्रा और भोर कुमार का 22 साल का बेटा भी तैरकर किनारे पहुंच गए थे। अन्य लोग अपने घर चले गए थे।
घटना का पता चलते ही दोनों घाट पर सैकड़ों लोग इकट्ठे हो गए। जिन घरों के लोग लापता हुए थे, उनके परिजनों की चीख चिल्लाहट से माहौल गमगीन हो गया। एडीएम, एसडीएम, सीओ और कई थानों के थानेदार गोताखोरों की टीम के साथ पहुंचे। चारों लापता लोगों की खोजबीन शुरू हुई। तमाम तैरने वाले स्थानीय लोग भी नदी में उतरे और खोजने में मदद की। देर रात नाव मिल गई थी। हालांकि, किसी भी लापता के मिलने की कोई खबर नहीं थी। एसपी यमुनापार ने बताया कि गोताखोर के साथ स्थानीय लोग खोजबीन कर रहे हैं। पीएसी तथा पुलिस के गोताखोरों को शहर से बुलाया गया है। खोजबीन रात भर होती रहेगी।
विज्ञापन
मदरा गांव के राम प्रकाश और शंकर लाल भी टेला घाट से उसी नाव पर बैठे थे, लेकिन जब नाविक ने 16 लोगों के साथ पांच बाइक और पांच साइकिल भी लाद दी तब वे दहशत में आ गए और अनहोनी की आशंका जताते हुए नाव से उतर गए। मदरा घाट पर उन दोनों ने ही घटना की पूरी जानकारी दी।
बैंक आफ बड़ौदा के कैशियर विकास पटेल ने नाव पर बैठने से पहले पिता विजय पटेल को फोन किया था कि वह नाव पर बैठ रहा है। वह मदरा घाट पर आ जाएं। पिता मदरा घाट पर पहुंच गए थे। उसी समय विकास ने दोबारा उन्हें फोन किया कि नाव डूब रही है। विजय यही बात बता-बताकर रो रहे थे। विकास की अभी शादी नहीं हुई थी। मां-बाप की वह इकलौती संतान थे। मां शिवकली का रो-रोकर बुरा हाल था। घरवालों ने बताया कि विकास सोमवार सुबह बड़ौत चले जाते थे, शनिवार तक काम करने के बाद शाम को वापस स्टीमर से लौटते थे।
हंडिया के मॉल में काम करते थे धीरज
नाव हादसे में लापता हुए धीरज मिश्रा हंडिया के एक मॉल में काम करते थए। वह शनिवार को घर वापस लौटते थे। संदीप मिश्रा वाराणसी में कहीं काम करते थे। दोनों के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल था।
विज्ञापन
हंडिया के टेला गंगा घाट से मेजा के मदरा घाट की ओर जाने वाली स्टीमर शनिवार शाम खराब हो गई थी। ठेकेदार विनय ने मदरा गांव के बनकेश निषाद को फोन कर टेला घाट पर नाव मंगा ली। बनकेश के दो साथी उसमें पहले से सवार थे। नाव पर नाविक ने 16 लोगों को बिठा लिया और पांच बाइक और पांच साइकिल भी लाद ली। ओवरलोड होने से नाव शुरुआत से ही डगमग कर रही थी। बीच नदी में पहुंचते ही नाव में पानी भरने लगा। लोग दहशत से चीखने लगे। जब नाव में ज्यादा पानी भरा तो उस पर सवार लोग कूदने लगे। इसी आपाधापी में नाव डूब गई। बाकी लोग तो निकल आए, लेकिन मेजा के चुरबना गांव निवासी विकास पटेल (35), ओनउर गांव के धीरज मिश्रा (30) और मेजा के भिंगारी गांव के संदीप मिश्रा (32) और हंडिया के भेलसी गांव के निखिल यादव (35) लापता हो गए। विकास पटेल बैंक आफ बड़ौदा की बरौत शाखा में कैशियर हैं। उनके साथ बैंक के चपरासी लाल जी (50) भी थे। लालजी तैरकर मदरा घाट पहुंच गए। उनके साथ इदरीस, अजय मिश्रा (32) निवासी ओनउर, तरवा गांव के मंगला प्रसाद (35), मदरा गांव के मयंक मिश्रा (28), निशांत मिश्रा (22), विशाल मिश्रा (28), राजू मिश्रा और भोर कुमार का 22 साल का बेटा भी तैरकर किनारे पहुंच गए थे। अन्य लोग अपने घर चले गए थे।
विज्ञापन
घटना का पता चलते ही दोनों घाट पर सैकड़ों लोग इकट्ठे हो गए। जिन घरों के लोग लापता हुए थे, उनके परिजनों की चीख चिल्लाहट से माहौल गमगीन हो गया। एडीएम, एसडीएम, सीओ और कई थानों के थानेदार गोताखोरों की टीम के साथ पहुंचे। चारों लापता लोगों की खोजबीन शुरू हुई। तमाम तैरने वाले स्थानीय लोग भी नदी में उतरे और खोजने में मदद की। देर रात नाव मिल गई थी। हालांकि, किसी भी लापता के मिलने की कोई खबर नहीं थी। एसपी यमुनापार ने बताया कि गोताखोर के साथ स्थानीय लोग खोजबीन कर रहे हैं। पीएसी तथा पुलिस के गोताखोरों को शहर से बुलाया गया है। खोजबीन रात भर होती रहेगी।
विज्ञापन
मदरा गांव के राम प्रकाश और शंकर लाल भी टेला घाट से उसी नाव पर बैठे थे, लेकिन जब नाविक ने 16 लोगों के साथ पांच बाइक और पांच साइकिल भी लाद दी तब वे दहशत में आ गए और अनहोनी की आशंका जताते हुए नाव से उतर गए। मदरा घाट पर उन दोनों ने ही घटना की पूरी जानकारी दी।
बैंक आफ बड़ौदा के कैशियर विकास पटेल ने नाव पर बैठने से पहले पिता विजय पटेल को फोन किया था कि वह नाव पर बैठ रहा है। वह मदरा घाट पर आ जाएं। पिता मदरा घाट पर पहुंच गए थे। उसी समय विकास ने दोबारा उन्हें फोन किया कि नाव डूब रही है। विजय यही बात बता-बताकर रो रहे थे। विकास की अभी शादी नहीं हुई थी। मां-बाप की वह इकलौती संतान थे। मां शिवकली का रो-रोकर बुरा हाल था। घरवालों ने बताया कि विकास सोमवार सुबह बड़ौत चले जाते थे, शनिवार तक काम करने के बाद शाम को वापस स्टीमर से लौटते थे।
हंडिया के मॉल में काम करते थे धीरज
नाव हादसे में लापता हुए धीरज मिश्रा हंडिया के एक मॉल में काम करते थए। वह शनिवार को घर वापस लौटते थे। संदीप मिश्रा वाराणसी में कहीं काम करते थे। दोनों के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल था।