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फर्जी शस्त्र लाइसेंस में पूर्व एसपी पर भी उंगली
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:15 AM IST
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शुआट्स वीसी समेत अन्य अधिकारियों को प्रतापगढ़ में फर्जी पते पर लाइसेंस लेने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में अब तत्कालीन एसपी पर भी उंगली उठी है। दूसरी ओर शुआट्स प्रशासन ने मुख्यमंत्री समेत पुलिस के अन्य आला अधिकारियों को पत्र भेजकर इस मामले में अपना पक्ष रखा है।
शुआट्स वीसी आरबी लाल, बिनोद बी लाल और राविंस एस प्रसाद समेत अन्य अधिकारियों के नाम पर प्रतापगढ़ जिले से सन 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी हुए थे। इस बात की शिकायत मम्फोर्डगंज में एनजीओ चलाने वाले राकेश द्विवेदी ने 2012 में प्रतापगढ़ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्रतापगढ़ के फर्जी पते पर लाइसेंस जारी किए गए हैं।
हालांकि पुलिस ने तीन दिन में ही इस मामले में एफआर लगा दी थी। अब इस मामले की दोबारा जांच शुरू हुई है। इस मामले में पता चला है कि प्रतापगढ़ में शुआट्स ने प्रतापगढ़ के शैलेंद्र कुमार सिंह के घर में कृषि प्रसार के लिए कार्यालय खोला था। प्रतापगढ़ के तत्कालीन एसपी रामेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर शस्त्र लाइसेंस का फार्म भरा गया था। न तो लेखपाल की रिपोर्ट देखी गई थी न ही एलआईयू से जांच कराई गई थी। तमाम विधिक प्रक्रियाओं को नजरंदाज कर शस्त्र लाइसेंस निर्गत कर दिया गया था। लाइसेंस के आवेदन पत्र पर पहले एसपी ने दस्तखत किए, बाद में थाना प्रभारी ने।
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इस मामले में शुआट्स प्रशासन ने मुख्यमंत्री तथा जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि उन्होंने प्रार्थनापत्र में साफ लिखा था कि वे स्थायी रूप से इलाहाबाद के रहने वाले हैं। प्रतापगढ़ में कृषि प्रसार केंद्र होने के कारण वीसी समेत अन्य अधिकारियों का वहां आना जाना लगा रहता था। इस कारण आवेदन किया था। पुलिस ने अगर विधिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। इस मामले में एफआर लग चुका है। इसके बाद फिर इस मामले को साजिश के तहत खोला जा रहा है।
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शुआट्स वीसी आरबी लाल, बिनोद बी लाल और राविंस एस प्रसाद समेत अन्य अधिकारियों के नाम पर प्रतापगढ़ जिले से सन 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी हुए थे। इस बात की शिकायत मम्फोर्डगंज में एनजीओ चलाने वाले राकेश द्विवेदी ने 2012 में प्रतापगढ़ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्रतापगढ़ के फर्जी पते पर लाइसेंस जारी किए गए हैं।
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हालांकि पुलिस ने तीन दिन में ही इस मामले में एफआर लगा दी थी। अब इस मामले की दोबारा जांच शुरू हुई है। इस मामले में पता चला है कि प्रतापगढ़ में शुआट्स ने प्रतापगढ़ के शैलेंद्र कुमार सिंह के घर में कृषि प्रसार के लिए कार्यालय खोला था। प्रतापगढ़ के तत्कालीन एसपी रामेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर शस्त्र लाइसेंस का फार्म भरा गया था। न तो लेखपाल की रिपोर्ट देखी गई थी न ही एलआईयू से जांच कराई गई थी। तमाम विधिक प्रक्रियाओं को नजरंदाज कर शस्त्र लाइसेंस निर्गत कर दिया गया था। लाइसेंस के आवेदन पत्र पर पहले एसपी ने दस्तखत किए, बाद में थाना प्रभारी ने।
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इस मामले में शुआट्स प्रशासन ने मुख्यमंत्री तथा जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि उन्होंने प्रार्थनापत्र में साफ लिखा था कि वे स्थायी रूप से इलाहाबाद के रहने वाले हैं। प्रतापगढ़ में कृषि प्रसार केंद्र होने के कारण वीसी समेत अन्य अधिकारियों का वहां आना जाना लगा रहता था। इस कारण आवेदन किया था। पुलिस ने अगर विधिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। इस मामले में एफआर लग चुका है। इसके बाद फिर इस मामले को साजिश के तहत खोला जा रहा है।