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अब दूसरे राज्यों के शूटरों की टोह ले रही एसटीएफ
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 25 Jan 2017 01:10 AM IST
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जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एके बंसल हत्याकांड में स्थानीय शूटरों के साथ ही एसटीएफ और पुलिस की जांच टीम पश्चिमी यूपी, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र तक के पेशेवर सुपारी किलर की टोह ले रही है। वहां की पुलिस से ऐसे भाड़े के कातिलों की तस्वीरों समेत जानकारी ली जा रही है। हालांकि यह एसटीएफ की नाकामी है कि संदिग्ध माने गए लोकल शूटरों को पकड़ने में नाकाम रही और अब दूसरे प्रदेश के अपराधियों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
पिछले 12 रोज के दौरान एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने इलाहाबाद, कौशाम्बी, प्रतापगढ़ के अलावा पूर्वांचल, रीवा, सीधी, सतना, चित्रकूट, बांदा समेत करीब दो दर्जन जिलों के 150 से ज्यादा पेेशेवर अपराधियों को खंगाला। उनमें 50 से ज्यादा को उठाकर पूछताछ की। घटना के दौरान वे कहां थे? इसकी तस्दीक की। सबसे ज्यादा जोर दिया गया राजा पांडेय गिरोह पर जिसने कत्ल से कुछ दिन पहले इलाज में लापरवाही और पैसों के चक्कर में डॉक्टर को धमकाया था। खुद राजा तो अब भी अस्पताल में है मगर उसकी धमकी को गंभीरता से लेते हुए गिरोह से जुड़े कल्लू तिवारी, सोनू दुबे के अलावा छोटा राजन के गुर्गे नीरज वाल्मीकि को पकड़ने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे मिले नहीं। नीरज को पूर्वांचल के जिलों से लेकर बांदा, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ तक खोजा गया मगर वह मिला नहीं।
इन स्थानीय शूटरों का क्लू नहीं मिलने से निराश एसटीएफ ने पश्चिमी यूपी के मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद के शार्प शूटरों का सजरा मंगाया है। दरअसल, पश्चिमी यूपी के कई गैंगस्टर नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनके गुर्गें यहां जेल में उनसे मिलने आते हैं। नैनी जेल के इन अपराधियों द्वारा अपने गुर्गों के जरिए पश्चिमी यूपी में रंगदारी उगाही कराने तथा सुपारी लेकर कत्ल कराने का खुलासा हो चुका है। डॉ.बंसल की हत्या के तीसरे ही रोज एसटीएफ ने गाजियाबाद से नैनी जेल में बंद गैंगस्टर से मिलने आए शूटर प्रवीण पाल को दबोचा तो खुलासा हुआ कि उसे गाजियाबाद के दो कारोबारियों के कत्ल का ठेका तथा कई व्यवसाइयों से रंगदारी उगाही का काम सौंपा गया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि डॉ.बंसल के भी कत्ल की सुपारी पश्चिमी यूपी के किसी गिरोह को दी गई हो? अब एसटीएफ इस एंगल पर भी काम कर रही है। पश्चिमी यूपी की पुलिस के अलावा नैनी सेंट्रल जेल में बंद उधर के कई गैंगस्टर से भी इस बाबत संपर्क किया गया।
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पिछले 12 रोज के दौरान एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने इलाहाबाद, कौशाम्बी, प्रतापगढ़ के अलावा पूर्वांचल, रीवा, सीधी, सतना, चित्रकूट, बांदा समेत करीब दो दर्जन जिलों के 150 से ज्यादा पेेशेवर अपराधियों को खंगाला। उनमें 50 से ज्यादा को उठाकर पूछताछ की। घटना के दौरान वे कहां थे? इसकी तस्दीक की। सबसे ज्यादा जोर दिया गया राजा पांडेय गिरोह पर जिसने कत्ल से कुछ दिन पहले इलाज में लापरवाही और पैसों के चक्कर में डॉक्टर को धमकाया था। खुद राजा तो अब भी अस्पताल में है मगर उसकी धमकी को गंभीरता से लेते हुए गिरोह से जुड़े कल्लू तिवारी, सोनू दुबे के अलावा छोटा राजन के गुर्गे नीरज वाल्मीकि को पकड़ने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे मिले नहीं। नीरज को पूर्वांचल के जिलों से लेकर बांदा, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ तक खोजा गया मगर वह मिला नहीं।
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इन स्थानीय शूटरों का क्लू नहीं मिलने से निराश एसटीएफ ने पश्चिमी यूपी के मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद के शार्प शूटरों का सजरा मंगाया है। दरअसल, पश्चिमी यूपी के कई गैंगस्टर नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनके गुर्गें यहां जेल में उनसे मिलने आते हैं। नैनी जेल के इन अपराधियों द्वारा अपने गुर्गों के जरिए पश्चिमी यूपी में रंगदारी उगाही कराने तथा सुपारी लेकर कत्ल कराने का खुलासा हो चुका है। डॉ.बंसल की हत्या के तीसरे ही रोज एसटीएफ ने गाजियाबाद से नैनी जेल में बंद गैंगस्टर से मिलने आए शूटर प्रवीण पाल को दबोचा तो खुलासा हुआ कि उसे गाजियाबाद के दो कारोबारियों के कत्ल का ठेका तथा कई व्यवसाइयों से रंगदारी उगाही का काम सौंपा गया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि डॉ.बंसल के भी कत्ल की सुपारी पश्चिमी यूपी के किसी गिरोह को दी गई हो? अब एसटीएफ इस एंगल पर भी काम कर रही है। पश्चिमी यूपी की पुलिस के अलावा नैनी सेंट्रल जेल में बंद उधर के कई गैंगस्टर से भी इस बाबत संपर्क किया गया।
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