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सात लाख के जाली नोट जब्त
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 31 Aug 2015 11:35 PM IST
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एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट ने सात लाख से ज्यादा कीमत के नकली नोटों को बरामद कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। एटीएफ ने प्रतापगढ़ के इस शख्स को मऊआइमा पुलिस के साथ मिलकर दबोचा जब वह मोटरसाइकिल पर नकली नोटों की खेप लेकर जा रहा था। उससे पूछताछ में पता चला कि वह कई सालों से यूपी के पूर्वांचल के कई जिलों में जाली नोटों की सप्लाई करता रहा है। अब तक वह कई करोड़ के जाली नोट बाजार में खपा चुका है। उसके कई साथी पहले भी पकड़े जा चुके हैं। जाली नोटों के नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश हो रही है।
एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के डिप्टी एसपी प्रवीण सिंह चौहान के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने इधर कुछ महीने के दौरान जाली नोटों के कई सौदागरों को दबोचा है। पकड़े गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ की टीम दूसरे धंधेबाजों की तलाश में जुटी है। इसी बीच रविवार शाम मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ के उपनिरीक्षक अतुल कुमार सिंह और अजय सिंह ने मऊआइमा के सब इंस्पेक्टर शैलेश सिंह के साथ रामफल इनारी रेलवे क्रासिंग के पास घेराबंदी कर प्रतापगढ़ की ओर से आ रहे बाइक सवार एक व्यक्ति को पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास दो मोबाइल फोन और सात लाख छप्पन हजार रुपये बरामद हुए। पता चला कि उसमें सात लाख छह हजार रुपये के जाली नोट हैं जबकि 50 हजार रुपये असली थे। नकली रकम में एक हजार के 356 नोट, पांच सौ के 700 नोट थे। उसने अपना नाम अच्छे लाल चौरसिया उर्फ बच्चालाल और पता माधवपुर महेशपुर थाना लालगंज अझारा जनपद प्रतापगढ़ बताया। पूछताछ में अच्छेलाल ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से जाली नोटों के धंधे में है।
बिहार में मधुबनी जनपद के जयमोहन झा से वह दस हजार असली के बदले 15 हजार के नकली नोट लाकर यहां खपाता था। फिर वह जयमोहन की बजाय पश्चिम बंगाल से जाली नोट लाने वाले कटिहार बिहार के अशोक बारी से सीधे मिलकर नोट लेने लगा। पहले वह खुद कटिहार जाकर वहां अशोक से धर्मशाला में मिलकर नकली नोट लाता था। फिर प्रतापगढ़ से अपने साथियों लालजी और मिठाईलाल को वहां भेजने लगा। इलाहाबाद, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी से लेकर आजमगढ़ और दिल्ली तक उसने नकली नोटों का नेटवर्क तैयार कर लिया। उसके पास हर वक्त लगभग 20 लाख के जाली नोटों का स्टॉक रहता है। मगर 17 अगस्त को कटिहार से पटना-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में खेप लाते वक्त साथी लालजी और मिठाईलाल रेलवे पुलिस के डर से 13 लाख के जाली नोट बोगी में ही छोड़ भाग आए थे। इसलिए उसके पास कम जाली नोट मिले।
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एसटीएफ के मुताबिक, अच्छेलाल कई साल पहले दिल्ली में मधुबनी बिहार के जयमोहन झा के संपर्क में आया। उसने अच्छेलाल को अपने ठग गिरोह में शामिल कर लिया। वे लोगों को पैसे दोगुना करने का झांसा देकर ठगते थे। वे नोटों की गड्डी के ऊपर-नीचे असली नोट लगाकर बीच में नोट के आकार के सादे कागज लगाकर ठगी अंजाम देते थे। इस करतूत में वह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में पकड़ा गया था। फिर जयमोहन ने उसे बिहार के मधुबनी में अपने पास बुलाकर नकली नोटों के धंधे से जोड़ दिया। पिछले पांच साल में नकली नोटों के धंधेबाजों को उस पर ऐसा भरोसा हो गया कि वे उसे जाली नोट भेज देते हैं और बाद में असली नोट लेते हैं । वह चार करोड़ से ज्यादा के जाली नोट खपा चुका है। अच्छेलाल ने प्रतापगढ़ की विमला नामक एक महिला को भी मददगार बना रखा है। वह उसे बाइक पर बैठाता और नकली नोटों से भरा थैला उसे थमा देता है ताकि रास्ते में पुलिस रोके तो भी महिला देखकर तलाशी लेने की बजाय जाने दें। अब पुलिस विमला की तलाश में जुटी है।
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एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के डिप्टी एसपी प्रवीण सिंह चौहान के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने इधर कुछ महीने के दौरान जाली नोटों के कई सौदागरों को दबोचा है। पकड़े गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ की टीम दूसरे धंधेबाजों की तलाश में जुटी है। इसी बीच रविवार शाम मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ के उपनिरीक्षक अतुल कुमार सिंह और अजय सिंह ने मऊआइमा के सब इंस्पेक्टर शैलेश सिंह के साथ रामफल इनारी रेलवे क्रासिंग के पास घेराबंदी कर प्रतापगढ़ की ओर से आ रहे बाइक सवार एक व्यक्ति को पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास दो मोबाइल फोन और सात लाख छप्पन हजार रुपये बरामद हुए। पता चला कि उसमें सात लाख छह हजार रुपये के जाली नोट हैं जबकि 50 हजार रुपये असली थे। नकली रकम में एक हजार के 356 नोट, पांच सौ के 700 नोट थे। उसने अपना नाम अच्छे लाल चौरसिया उर्फ बच्चालाल और पता माधवपुर महेशपुर थाना लालगंज अझारा जनपद प्रतापगढ़ बताया। पूछताछ में अच्छेलाल ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से जाली नोटों के धंधे में है।
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बिहार में मधुबनी जनपद के जयमोहन झा से वह दस हजार असली के बदले 15 हजार के नकली नोट लाकर यहां खपाता था। फिर वह जयमोहन की बजाय पश्चिम बंगाल से जाली नोट लाने वाले कटिहार बिहार के अशोक बारी से सीधे मिलकर नोट लेने लगा। पहले वह खुद कटिहार जाकर वहां अशोक से धर्मशाला में मिलकर नकली नोट लाता था। फिर प्रतापगढ़ से अपने साथियों लालजी और मिठाईलाल को वहां भेजने लगा। इलाहाबाद, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी से लेकर आजमगढ़ और दिल्ली तक उसने नकली नोटों का नेटवर्क तैयार कर लिया। उसके पास हर वक्त लगभग 20 लाख के जाली नोटों का स्टॉक रहता है। मगर 17 अगस्त को कटिहार से पटना-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में खेप लाते वक्त साथी लालजी और मिठाईलाल रेलवे पुलिस के डर से 13 लाख के जाली नोट बोगी में ही छोड़ भाग आए थे। इसलिए उसके पास कम जाली नोट मिले।
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एसटीएफ के मुताबिक, अच्छेलाल कई साल पहले दिल्ली में मधुबनी बिहार के जयमोहन झा के संपर्क में आया। उसने अच्छेलाल को अपने ठग गिरोह में शामिल कर लिया। वे लोगों को पैसे दोगुना करने का झांसा देकर ठगते थे। वे नोटों की गड्डी के ऊपर-नीचे असली नोट लगाकर बीच में नोट के आकार के सादे कागज लगाकर ठगी अंजाम देते थे। इस करतूत में वह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में पकड़ा गया था। फिर जयमोहन ने उसे बिहार के मधुबनी में अपने पास बुलाकर नकली नोटों के धंधे से जोड़ दिया। पिछले पांच साल में नकली नोटों के धंधेबाजों को उस पर ऐसा भरोसा हो गया कि वे उसे जाली नोट भेज देते हैं और बाद में असली नोट लेते हैं । वह चार करोड़ से ज्यादा के जाली नोट खपा चुका है। अच्छेलाल ने प्रतापगढ़ की विमला नामक एक महिला को भी मददगार बना रखा है। वह उसे बाइक पर बैठाता और नकली नोटों से भरा थैला उसे थमा देता है ताकि रास्ते में पुलिस रोके तो भी महिला देखकर तलाशी लेने की बजाय जाने दें। अब पुलिस विमला की तलाश में जुटी है।