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बोर्ड अध्यक्ष को कमरे में किया कैद

Fri, 05 Dec 2014 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 05 Dec 2014 02:01 AM IST
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Board chairman and imprisoned in the room
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माननीय सदस्यों ने एक बार फिर से मर्यादा लांघी। प्रदेश के माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में खाली संस्था प्रमुखों के साक्षात्कार की ठप पड़ी प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सदस्यों ने चयन बोर्ड अध्यक्ष को बुधवार शाम उनके कक्ष में बंद कर दिया।
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सदस्यों ने शासन के आदेश पर ठप पड़ी साक्षात्कार प्रक्रिया को फिर से शुरू करवाने का दबाव बनाकर एक बार फिर से मनमानी का प्रयास किया है।
चयन बोर्ड के इन सदस्यों ने बुधवार को अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल से संस्था प्रमुखों के साक्षात्कार की तिथि घोषित करने की मांग की। जब अध्यक्ष ने साक्षात्कार की तिथि घोषित करने में असमर्थता जताई तो चयन बोर्ड के सदस्यों डॉ. आशाराम, मनोज कुमार, राम अवतार यादव, योगेन्द्र बेचैन प्रजापति, मो. उमर ने उनको उनके कक्ष में अंदर से बंद कर लिया।
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इन सदस्यों ने अध्यक्ष को उनके कक्ष में लगभग दो घंटे बंद रखकर साक्षात्कार की तिथि घोषित करने के लिए दबाव बनाते रहे। अध्यक्ष का आरोप है कि सदस्यों ने उनका हाथ पकड़कर जबरन फाइल पर हस्ताक्षर करने को कहा और कुर्सी से धकेलने की कोशिश की। इस बीच अध्यक्ष के कक्ष के बाहर सचिव सहित चयन बोर्ड के सभी कर्मचारी जुट गए थे। बाहर कर्मचारियों के दबाव के बाद किसी प्रकार अध्यक्ष को उनके कक्ष से मुक्त कराया।
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अध्यक्ष ने चयन बोर्ड सदस्यों की मनमानी के आगे झुकने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि इस बारे में पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अध्यक्ष का कहना है कि पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर से जून महीने में हुए साक्षात्कार की जांच करके शासन ने उनसे रिपोर्ट देने को कहा है।
इसके बाद भी सदस्य दोबारा बचे मंडल के साक्षात्कार आयोजित करने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें से कुछ सदस्यों का कार्यकाल फरवरी के पहले सप्ताह में पूरा हो रहा है। इसलिए वे चाह रहे हैं कि साक्षात्कार प्रक्रिया इससे पहले पूरी कर ली जाए।
चयन बोर्ड की ओर से जून महीने में संस्था प्रमुखों का साक्षात्कार आयोजित किया गया था। इस साक्षात्कार का चयन बोर्ड के तत्कालीन सचिव एवं उपसचिव ने विरोध किया था।

 इनका आरोप था कि चयन बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम ने बिना मानक पूरा किए साक्षात्कार आयोजित कर रहे थे, इसलिए इसे पूरी तरह से निरस्त किया जाना चाहिए। इसी के बाद सरकार ने साक्षात्कार को रोककर इस मामले में विधान परिषद में भी जवाब दिया था।
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