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यमुनापार के कई किसानों की गिरवी रखा ली जमीन
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 18 Jan 2017 01:11 AM IST
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जीवन ज्योति अस्पताल के निदेशक डॉ.एके बंसल के चिकित्सा पेशे से जुड़ा एक स्याह पक्ष भी है। उनके खिलाफ बार-बार आरोप लगते रहे थे कि इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत हो गई, लेकिन बिल चुकता करने लिए शव को जबरन रोक लिया। इसी वजह से उनके खिलाफ बीस मुकदमे दर्ज हुए। इससे भी ज्यादा गंभीर बात ये सामने आई है कि बिल नहीं चुकता कर पाने पर तमाम मरीजों से जमीन और खेत गिरवी रखवा लिए थे, जिनमें ज्यादातर यमुनापार के गरीब किसान हैं।
दस साल में जीवन ज्योति हॉस्पिटल में मरीज की मौत या भारी भरकम बिल को लेकर मारपीट और हंगामे की कम से कम सौ घटनाएं हो चुकी थीं। भारी बवाल के भी तकरीबन दस केस थाने पहुंचे, जिनमें एक वकील की भी मौत का मामला है। कई बार इसलिए बखेड़ा हुआ कि बिल जरूरत से ज्यादा था और किसी मरीज की मौत के बाद परिजनों ने बिल पर ऐतराज जताया तो शव रोक लिया गया। हॉस्पिटल से जुड़े कुछ लोगों से पता चला कि यमुनापार और पड़ोसी जिलों रीवा-सतना या सीधी से आए कई मरीज इलाज में बना लाखों रुपये का बिल नहीं चुकता कर सके तो उनसे डॉक्टर के किसी करीबी के नाम से स्टाम्प पर जमीन या मकान गिरवी रखवा दिया गया।
बताया गया कि जमीन या संपत्ति गिरवी रखवाने का काम डॉ.बंसल के ही कहने पर होता था। कुछ महीने पहले कोरांव इलाके के एक ही परिवार के दो लोगों का दुर्घटना में घायल होने के बाद इसी हॉस्पिटल में कई दिन तक इलाज हुआ था। बिल बना था करीब दो लाख रुपये। वे बिल चुकाने में असमर्थ थे इसलिए उनकी एक बीघा जमीन डॉ.बंसल के करीबी के नाम गिरवी रखा दी गई। इस बाबत स्टाम्प में लिखापढ़ी की गई थी। इस पहलू पर इसलिए जांच टीम गौर कर रही है कि किसी की जमीन चली जाए या बेघर हो तो वह गुस्से में किसी भी हद तक जा सकता है। यमुनापार और खासतौर से कोरांव के बहुत से लोगों का नक्सलियों से जुड़ाव का पहले भी खुलासा हो चुका है। ऐसे में यह भी एंगल है कि किसी पीड़ित किसान का कोई करीबी शूटर तो ऐसा नहीं कर गया? यह तो साफ है कि शूटर पेशेवर हैं, लेकिन यह भी सच है कि यमुनापार में ऐसे दर्जनों शूटर हैं जो पांच हजार से 50 हजार रुपये में किसी को भी निशाना बनाते रहे हैं।
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डॉक्टर के लोन में फंसे कई कर्मचारी
डॉ.बंसल के कत्ल ने बहुत से कर्मचारियों को मुश्किल में डाल दिया है। कुछ कर्मचारी तो एसटीएफ के संदेह के घेरे में होने के कारण कई रोज से पूछताछ की मुसीबत झेल ही रहे हैं, मगर स्टाफ के करीब दस लोग ऐसे भी हैं जिनके नाम से डॉक्टर ने बैंकों से लोन लिया था। अब वे हैरान-परेशान हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों ने अपनी जमीन या मकान पर लोन लिया था। कुछ का वेतन बढ़ाकर बैंक से कर्ज लिया गया था। डॉ.बंसल द्वारा बैंक लोन की किस्त जमा करा दी जाती थी, मगर अब यह कर्ज कर्मचारियों को चुकता करना होगा। डॉ.बंसल की हत्या के बाद कर्मचारियों के बीच बातचीत से इस बारे में जानकारी मिली।
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दस साल में जीवन ज्योति हॉस्पिटल में मरीज की मौत या भारी भरकम बिल को लेकर मारपीट और हंगामे की कम से कम सौ घटनाएं हो चुकी थीं। भारी बवाल के भी तकरीबन दस केस थाने पहुंचे, जिनमें एक वकील की भी मौत का मामला है। कई बार इसलिए बखेड़ा हुआ कि बिल जरूरत से ज्यादा था और किसी मरीज की मौत के बाद परिजनों ने बिल पर ऐतराज जताया तो शव रोक लिया गया। हॉस्पिटल से जुड़े कुछ लोगों से पता चला कि यमुनापार और पड़ोसी जिलों रीवा-सतना या सीधी से आए कई मरीज इलाज में बना लाखों रुपये का बिल नहीं चुकता कर सके तो उनसे डॉक्टर के किसी करीबी के नाम से स्टाम्प पर जमीन या मकान गिरवी रखवा दिया गया।
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बताया गया कि जमीन या संपत्ति गिरवी रखवाने का काम डॉ.बंसल के ही कहने पर होता था। कुछ महीने पहले कोरांव इलाके के एक ही परिवार के दो लोगों का दुर्घटना में घायल होने के बाद इसी हॉस्पिटल में कई दिन तक इलाज हुआ था। बिल बना था करीब दो लाख रुपये। वे बिल चुकाने में असमर्थ थे इसलिए उनकी एक बीघा जमीन डॉ.बंसल के करीबी के नाम गिरवी रखा दी गई। इस बाबत स्टाम्प में लिखापढ़ी की गई थी। इस पहलू पर इसलिए जांच टीम गौर कर रही है कि किसी की जमीन चली जाए या बेघर हो तो वह गुस्से में किसी भी हद तक जा सकता है। यमुनापार और खासतौर से कोरांव के बहुत से लोगों का नक्सलियों से जुड़ाव का पहले भी खुलासा हो चुका है। ऐसे में यह भी एंगल है कि किसी पीड़ित किसान का कोई करीबी शूटर तो ऐसा नहीं कर गया? यह तो साफ है कि शूटर पेशेवर हैं, लेकिन यह भी सच है कि यमुनापार में ऐसे दर्जनों शूटर हैं जो पांच हजार से 50 हजार रुपये में किसी को भी निशाना बनाते रहे हैं।
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डॉक्टर के लोन में फंसे कई कर्मचारी
डॉ.बंसल के कत्ल ने बहुत से कर्मचारियों को मुश्किल में डाल दिया है। कुछ कर्मचारी तो एसटीएफ के संदेह के घेरे में होने के कारण कई रोज से पूछताछ की मुसीबत झेल ही रहे हैं, मगर स्टाफ के करीब दस लोग ऐसे भी हैं जिनके नाम से डॉक्टर ने बैंकों से लोन लिया था। अब वे हैरान-परेशान हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों ने अपनी जमीन या मकान पर लोन लिया था। कुछ का वेतन बढ़ाकर बैंक से कर्ज लिया गया था। डॉ.बंसल द्वारा बैंक लोन की किस्त जमा करा दी जाती थी, मगर अब यह कर्ज कर्मचारियों को चुकता करना होगा। डॉ.बंसल की हत्या के बाद कर्मचारियों के बीच बातचीत से इस बारे में जानकारी मिली।