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एक्सिस बैंक अधिकारी और संस्था के लेखाकार के खिलाफ मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 06 May 2017 02:17 AM IST
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axis bank and max newyork life insurance logo
- फोटो : file photo
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एक्सिस बैंक में एक संस्था के 22.39 करोड़ के गबन के मामले में बैंक प्रबंधन की ओर से थाना सिविल लाइंस में बैंक अधिकारी कमाल एहसान और शिक्षण संस्थान के लेखाकार राजेश कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। यह रिपोर्ट बैंक के असिस्टेंट प्रेसिडेंट योगेश वाजपेयी की ओर से दर्ज कराई गई है।
बैंक के असिस्टेंट प्रेसिडेंट ने रिपोर्ट में कहा है कि इलाहाबाद की एक शिक्षण संस्था के लेखाकार राजेश कुमार ने बैंक के अधिकारी कमाल एहसान से सांठगांठ करके 2013 से 2016 के बीच 370 चेक के माध्यम से 22,39,64,118 रुपये का गबन किया है। बैंक की ओर से संस्था को दिए गए चेक दूसरे खातों में धनराशि हस्तांतरित करने के दौरान जमा नहीं किया गया था, जबकि धनराशि निकासी के दौरान बैंक के अभिलेखों में उन चेक का उल्लेख किया गया। साजिश करके लेखाकार ने अपनी पत्नी, रिश्तेदार तथा कुछ अन्य लोगों के नामों से आधा दर्जन फर्जी खाते खोलकर यह रकम हस्तांतरित करा ली थी। इस अवधि में इन खातों से कई करोड़ रुपयों की निकासी भी होती रही।
थाना प्रभारी सिविल लाइंस मनोज तिवारी ने बताया कि एसएसपी के आदेश पर दो लोगों के खिलाफ यह मुकदमा धारा 409,419,420,421,430,467,477,478,201 और 120 बी के अंतर्गत दर्ज कर लिया गया है। इस केस की विवेचना खुद थाना प्रभारी करेंगे। दूसरी ओर बैंक प्रबंधन ने एफआईआर, हाई पावर कमेटी और विजिलेंस टीम की जांच रिपोर्ट रिजर्व बैंक आफ इंडिया को भेज दी है। यह प्रकरण 22 करोड़ से अधिक के गबन का होने के कारण आर्थिक अनुसंधान शाखा से जांच कराने की सिफारिश की गई है। इस बारे में आरबीआई की ओर से निर्णय लिया जाना है।
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थाना प्रभारी सिविल लाइंस का कहना है कि इस जांच में आधा दर्जन और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर भुगतान के लिए चेक प्रेषित करने वाले बैंक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है। चेक पास करने वाले अधिकारी और उसके बाद भुगतान की संस्तुति और भुगतान करने वाले बैंक अधिकारी भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। इन अफसरों के नाम भी विवेचना में खुलेंगे। जो कि बैंक के नियमों के अनुसार दोषी हैं, इतना ही नहीं बैंक प्रबंधक भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। तीन साल के दौरान 370 चेक आए नहीं और भुगतान होता रहा। यह अहम सवाल विवेचना अधिकारी का है। तीन साल के दौरान इंटरनल आडिट भी हुए, उस दौरान चेक के बिना हुए भुगतान को अफसरों ने संज्ञान में नहीं लिया।
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बैंक के असिस्टेंट प्रेसिडेंट ने रिपोर्ट में कहा है कि इलाहाबाद की एक शिक्षण संस्था के लेखाकार राजेश कुमार ने बैंक के अधिकारी कमाल एहसान से सांठगांठ करके 2013 से 2016 के बीच 370 चेक के माध्यम से 22,39,64,118 रुपये का गबन किया है। बैंक की ओर से संस्था को दिए गए चेक दूसरे खातों में धनराशि हस्तांतरित करने के दौरान जमा नहीं किया गया था, जबकि धनराशि निकासी के दौरान बैंक के अभिलेखों में उन चेक का उल्लेख किया गया। साजिश करके लेखाकार ने अपनी पत्नी, रिश्तेदार तथा कुछ अन्य लोगों के नामों से आधा दर्जन फर्जी खाते खोलकर यह रकम हस्तांतरित करा ली थी। इस अवधि में इन खातों से कई करोड़ रुपयों की निकासी भी होती रही।
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थाना प्रभारी सिविल लाइंस मनोज तिवारी ने बताया कि एसएसपी के आदेश पर दो लोगों के खिलाफ यह मुकदमा धारा 409,419,420,421,430,467,477,478,201 और 120 बी के अंतर्गत दर्ज कर लिया गया है। इस केस की विवेचना खुद थाना प्रभारी करेंगे। दूसरी ओर बैंक प्रबंधन ने एफआईआर, हाई पावर कमेटी और विजिलेंस टीम की जांच रिपोर्ट रिजर्व बैंक आफ इंडिया को भेज दी है। यह प्रकरण 22 करोड़ से अधिक के गबन का होने के कारण आर्थिक अनुसंधान शाखा से जांच कराने की सिफारिश की गई है। इस बारे में आरबीआई की ओर से निर्णय लिया जाना है।
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थाना प्रभारी सिविल लाइंस का कहना है कि इस जांच में आधा दर्जन और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर भुगतान के लिए चेक प्रेषित करने वाले बैंक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है। चेक पास करने वाले अधिकारी और उसके बाद भुगतान की संस्तुति और भुगतान करने वाले बैंक अधिकारी भी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। इन अफसरों के नाम भी विवेचना में खुलेंगे। जो कि बैंक के नियमों के अनुसार दोषी हैं, इतना ही नहीं बैंक प्रबंधक भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। तीन साल के दौरान 370 चेक आए नहीं और भुगतान होता रहा। यह अहम सवाल विवेचना अधिकारी का है। तीन साल के दौरान इंटरनल आडिट भी हुए, उस दौरान चेक के बिना हुए भुगतान को अफसरों ने संज्ञान में नहीं लिया।