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रेलवे की जमीन घोटाले में लेखपाल गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:20 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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झूंसी में रेलवे की 41 बीघा जमीन घोटाले में क्राइम ब्रांच ने कटका के लेखपाल धर्मपाल यादव को शनिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेखपाल को क्राइम ब्रांच में बयान के लिए बुलाया था। धर्मपाल के पास दोषी न होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे और उसके बयान भी लड़खड़ा रहे थे, इसी आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस जमीन का अपने नाम इकरारनामा और मुख्तारनामा कराने वाले छह लोगों को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया जा चुका है।
क्राइम ब्रांच ने जांच में माफिया के साथ-साथ जमीन हड़पने की साजिश में लेखपाल धर्मपाल यादव को संगठित आपराधिक गिरोह में शामिल माना है। उसी ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी करके कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के बाबा बजीमुल्ला का नाम अंकित किया था। हालांकि, लेखपाल ने पेशबंदी में अपने को बचाने के उद्देश्य से ऐसा करने के लिए राजस्व अधिकारियों में तहसीलदार और एसडीएम के नाम लिए थे। एसएसपी आकाश कुलहरि, एसपी क्राइम बीके मिश्रा तथा अन्य अधिकारियों ने लेखपाल से झूंसी में रेलवे की जमीन को राजस्व अभिलेखों में व्यक्तिगत नाम से दर्ज करने के बारे में विस्तार से जानकारी की। इसमें सपा नेता राजेश यादव की साजिश को उजागर किया गया है। उसी ने अपने भतीजे के नाम इकरारनामा और मुख्तारनामा में शामिल होने की बात कही है।
पुुलिस सूत्रों का कहना है कि इस जमीन को हड़पने की साजिश में कई राजनेता और अफसरों के शामिल होने की भी जानकारी मिली है। इस पहलू पर भी पुलिस एवं क्राइम ब्रांच टीम जांच कर रही है। दिसंबर 2015 में एसडीएम फूलपुर राजकुमार द्विवेदी की अदालत से झूंसी के कटका गांव में रेलवे की 41 बीघा जमीन व्यक्ति के नाम कर दी गई थी। इसको लेकर वकीलों ने आंदोलन भी किए थे, लेकिन सपा सरकार में यह प्रकरण दबा दिया गया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही यह मुद्दा उठा और शासन के निर्देश पर कमिश्नर ने जांच बैठाई।
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इसमें खुलासा किया कि निवर्तमान एसडीएम फूलपुर ने लेखपाल और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर रेलवे की जमीन बजीमुल्ला के नाम दर्ज करके उसके प्रपोत्र कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के नाम कर दी थी। कमिश्नर ने इस रिपोर्ट के आधार पर कटका की इस जमीन को राजस्व अभिलेखों में रेलवे के नाम दर्ज कराया और दोषियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश किए थे। उन दिनों एफआईआर कराने में भी राजस्व अधिकारियों ने खेल किया। सिर्फ कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के नाम रिपोर्ट दर्ज हुई। बाकी के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने में चुप्पी साध ली। इसी दौरान कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन को हाईकोर्ट से स्टे दिला दिया। क्राइम ब्रांच ने यह जांच शुरू की तो भूमि हड़पने में परत दर परत सपा नेता की साजिश खुलकर सामने आ गई। इसमें राजस्व और रेलवे के अधिकारियों ने जमीन हड़पवाने में भरपूर मदद की।
लेखपाल की गिरफ्तारी साक्ष्यों के आधार पर की गई है। पांच दिसंबर को कुछ अधिकारियों और राजनेताओं को जांच में सहयोग के लिए बुलाया गया है। इनके बयान से कुछ साक्ष्य जुटाए जाएंगे। - बीके मिश्रा, एसपी क्राइम
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क्राइम ब्रांच ने जांच में माफिया के साथ-साथ जमीन हड़पने की साजिश में लेखपाल धर्मपाल यादव को संगठित आपराधिक गिरोह में शामिल माना है। उसी ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी करके कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के बाबा बजीमुल्ला का नाम अंकित किया था। हालांकि, लेखपाल ने पेशबंदी में अपने को बचाने के उद्देश्य से ऐसा करने के लिए राजस्व अधिकारियों में तहसीलदार और एसडीएम के नाम लिए थे। एसएसपी आकाश कुलहरि, एसपी क्राइम बीके मिश्रा तथा अन्य अधिकारियों ने लेखपाल से झूंसी में रेलवे की जमीन को राजस्व अभिलेखों में व्यक्तिगत नाम से दर्ज करने के बारे में विस्तार से जानकारी की। इसमें सपा नेता राजेश यादव की साजिश को उजागर किया गया है। उसी ने अपने भतीजे के नाम इकरारनामा और मुख्तारनामा में शामिल होने की बात कही है।
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पुुलिस सूत्रों का कहना है कि इस जमीन को हड़पने की साजिश में कई राजनेता और अफसरों के शामिल होने की भी जानकारी मिली है। इस पहलू पर भी पुलिस एवं क्राइम ब्रांच टीम जांच कर रही है। दिसंबर 2015 में एसडीएम फूलपुर राजकुमार द्विवेदी की अदालत से झूंसी के कटका गांव में रेलवे की 41 बीघा जमीन व्यक्ति के नाम कर दी गई थी। इसको लेकर वकीलों ने आंदोलन भी किए थे, लेकिन सपा सरकार में यह प्रकरण दबा दिया गया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही यह मुद्दा उठा और शासन के निर्देश पर कमिश्नर ने जांच बैठाई।
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इसमें खुलासा किया कि निवर्तमान एसडीएम फूलपुर ने लेखपाल और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर रेलवे की जमीन बजीमुल्ला के नाम दर्ज करके उसके प्रपोत्र कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के नाम कर दी थी। कमिश्नर ने इस रिपोर्ट के आधार पर कटका की इस जमीन को राजस्व अभिलेखों में रेलवे के नाम दर्ज कराया और दोषियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश किए थे। उन दिनों एफआईआर कराने में भी राजस्व अधिकारियों ने खेल किया। सिर्फ कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के नाम रिपोर्ट दर्ज हुई। बाकी के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने में चुप्पी साध ली। इसी दौरान कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन को हाईकोर्ट से स्टे दिला दिया। क्राइम ब्रांच ने यह जांच शुरू की तो भूमि हड़पने में परत दर परत सपा नेता की साजिश खुलकर सामने आ गई। इसमें राजस्व और रेलवे के अधिकारियों ने जमीन हड़पवाने में भरपूर मदद की।
लेखपाल की गिरफ्तारी साक्ष्यों के आधार पर की गई है। पांच दिसंबर को कुछ अधिकारियों और राजनेताओं को जांच में सहयोग के लिए बुलाया गया है। इनके बयान से कुछ साक्ष्य जुटाए जाएंगे। - बीके मिश्रा, एसपी क्राइम