{"_id":"f222d5b4ba3280eb632a3618d8d010e9","slug":"allahabad-news-hindi-news-632","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस के लिए तो कमाई का जरिया बने रहे कोठे","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुलिस के लिए तो कमाई का जरिया बने रहे कोठे
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 13 Jan 2016 11:42 PM IST
विज्ञापन
जिस्मफरोसी के लिए बदनाम रेड लाइट एरिया मीरगंज के कोठे दरअसल खाकी की सरपरस्ती में ही गुलजार रहे हैं। गाहे-बगाहे छापेमारी का दिखावा करने के अलावा पुलिस ने लाखों की कमाई के चलते मीरगंज में देह व्यापार को पनपने ही दिया। बादशाही मंडी चौकी में तैनाती के लिए सिपाही और दरोगा लालायित रहते हैं तो इसकी वजह से रोज मोटी रकम का लालच ही है। पुलिस ने सख्ती की होती तो मीरगंज में यह गलीच धंधा कब का सिमट गया होता लेकिन दलालों से सेटिंग के चलते पुलिस आंखें मूंदे रही। उसे सिर्फ घिनौने व्यापार से मिलने वाले पैसों का ख्याल रहा।अब हाईकोर्ट का आदेश पर देखना होगा कि पुलिस मीरगंज के कोठों में जिस्मफरोसी बंद करती है या केवल फर्जी रिपोर्ट देकर पल्ला झाड़ा जाएगा।
सौ साल से भी ज्यादा पुराने मीरगंज के कोठों में पहले मुजरा होता था जहां शौकीन रईस मनोरंजन के लिए जाते थे। मगर समय गुजरने के साथ वहां पायल की झंकार की बजाय देह का धंधा जोड़ पकड़ता गया। पिछले तीन दशक के दौरान वहां जिम्सफरोशी खुलकर होने लगी। मीरगंज की गलियों में सुबह से लेकर रात तक कोठों के दवाजे पर खड़ी लड़कियां और आसपास दलाल तथा ग्राहक दिखने लगे। बादशाही मंडी चौकी और कोतवाली में तैनाती के लिए सिपाही से लेकर दरोगा तक जोर-जुगत लगाने लगे।
कोतवाली प्रभारी को केवल मीरगंज से एक दिन में 20 हजार से ज्यादा कमाई होने लगी थी। कोठों से महीना बंधा होने के अलावा पुलिसवाले रोज मीरगंज की गलियों में दो-चार ग्राहकों को पकड़कर घरवालों को बताने की धमकी देकर पैसे लेकर छोडते। यूं पुलिस की सरपरस्ती में मीरगंज में घिनौना धंधा चलता रहा। पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी से दलाल गरीब लड़कियों को नौकरी के नाम पर लाकर इन कोठों में जिस्म बेचने के लिए मजबूर करते। नेपाल से भी गरीब परिवार की तमाम लड़कियों को लाकर इन कोठों में कैद किया गया।
विज्ञापन
पिछले कई साल से मीरगंज में देह व्यापार बंद कराने के लिए आंदोलन कर रहे जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि पुलिस पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मस्थली पर हो रहे इस अवैध कारोबार करो बंद कराएगी। इससे मीरगंज को बदनामी से निजात मिलेगी। पुलिस ने ऐसा नहीं किया तो फिर आंदोलन होगा।
विज्ञापन
सौ साल से भी ज्यादा पुराने मीरगंज के कोठों में पहले मुजरा होता था जहां शौकीन रईस मनोरंजन के लिए जाते थे। मगर समय गुजरने के साथ वहां पायल की झंकार की बजाय देह का धंधा जोड़ पकड़ता गया। पिछले तीन दशक के दौरान वहां जिम्सफरोशी खुलकर होने लगी। मीरगंज की गलियों में सुबह से लेकर रात तक कोठों के दवाजे पर खड़ी लड़कियां और आसपास दलाल तथा ग्राहक दिखने लगे। बादशाही मंडी चौकी और कोतवाली में तैनाती के लिए सिपाही से लेकर दरोगा तक जोर-जुगत लगाने लगे।
विज्ञापन
कोतवाली प्रभारी को केवल मीरगंज से एक दिन में 20 हजार से ज्यादा कमाई होने लगी थी। कोठों से महीना बंधा होने के अलावा पुलिसवाले रोज मीरगंज की गलियों में दो-चार ग्राहकों को पकड़कर घरवालों को बताने की धमकी देकर पैसे लेकर छोडते। यूं पुलिस की सरपरस्ती में मीरगंज में घिनौना धंधा चलता रहा। पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी से दलाल गरीब लड़कियों को नौकरी के नाम पर लाकर इन कोठों में जिस्म बेचने के लिए मजबूर करते। नेपाल से भी गरीब परिवार की तमाम लड़कियों को लाकर इन कोठों में कैद किया गया।
विज्ञापन
पिछले कई साल से मीरगंज में देह व्यापार बंद कराने के लिए आंदोलन कर रहे जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि पुलिस पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मस्थली पर हो रहे इस अवैध कारोबार करो बंद कराएगी। इससे मीरगंज को बदनामी से निजात मिलेगी। पुलिस ने ऐसा नहीं किया तो फिर आंदोलन होगा।