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शंकरगढ़ में भी ठिकाना बना रहा था धोनी
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:04 AM IST
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शंकरगढ़ में भी ठिकाना बना रहा था धोनी
बरगढ़ी के आसपास के गांवों में थी महेंद्र की गतिविधियां
इलाहाबाद। पुलिस एनकांउटर में मारा गया एक लाख रुपये का इनामिया डकैत महेंद्र पासी उर्फ धोनी उप्र-मप्र के समीपवर्ती जिलों में पिछले करीब छह साल से आतंक का पर्याय बना था। उसने बरगढ़ के समीपवर्ती इलाके शंकरगढ़ में भी पैठ बनानी शुरु की थी। पुलिस सूत्रों की मानें इनका इस्तेमाल वह वारदात के बाद छिपने में कर चुका है। गैंग को बढ़ाने के लिए वह यहां से युवक भी तलाश रहा था। मुठभेड़ में उसे मार गिराने के बाद अब पुलिस शंकरगढ़ में उसको शरण देने वालों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
चित्रकूट के थाना रैपुरा का मूल निवासी महेंद्र पासी अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद से रैपुरा, मानिकपुर, मऊ के अलावा मध्यप्रदेश के रींवा आदि इलाकों को केंद्र बनाकर वहां अपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। यूपी के इन तीन थानों में उसके खिलाफ कुल 21 मामले दर्ज हैं जिनमें फिरौती के लिए अपहरण, हत्या जैसे तमाम संगीन मामले भी शामिल हैं। रैपुरा थाने में दर्ज हिस्ट्रीशीट संख्या 145-ए में यह पचास हजार के इनामिया के तौर पर दर्ज है। लगातार कई वारदात अंजाम देने के बाद मप्र एवं उप्र सरकार ने महेंद्र पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। उसके बाद जब मप्र-उप्र पुलिस ने इसे पकड़ने का साझा अभियान चलाया तब चोरी छिपे भागकर यह शंकरगढ़ की बरगढ़ी पहाड़ी में भी आकर छिप गया। पुलिस सूत्रों का कहना है शंकरगढ़ इलाके के आसपास के कुछ गांवों में महेंद्र की मदद करने वाले लोग हैं हालांकि करीब दस साल पहले इंजीनियर नीरज अग्रवाल की फिरौती के लिए हुई हत्या के बाद पुलिस ने यहां बड़ी कार्रवाई करते हुए दो डकैत मार गिराए थे। उसके बाद से बरगढ़ से इधर की ओर डकैत नहीं आते थे लेकिन महेंद्र पासी ने कुछ समय से इधर आवाजाही शुरु कर दी थी। सूत्रों का कहना है वह अपने गैंग को बढ़ाना चाहता था। उसके लिए बेरोजगार युवकों की वह तलाश कर रहा था। कहा जाता है इसी आवाजाही के बीच पुलिस की निगाह में महेंद्र पासी आ गया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। अब पुलिस शंकरगढ़ इलाके में उसके साथ देने वाले लोगों की तलाश कर रही है हालांकि एसपी यमुनापार ने शंकरगढ़ इलाके में किसी भी डकैत की गतिविधियों की संभावना से इंकार किया है।
बरगढ़ी के आसपास के गांवों में थी महेंद्र की गतिविधियां
इलाहाबाद। पुलिस एनकांउटर में मारा गया एक लाख रुपये का इनामिया डकैत महेंद्र पासी उर्फ धोनी उप्र-मप्र के समीपवर्ती जिलों में पिछले करीब छह साल से आतंक का पर्याय बना था। उसने बरगढ़ के समीपवर्ती इलाके शंकरगढ़ में भी पैठ बनानी शुरु की थी। पुलिस सूत्रों की मानें इनका इस्तेमाल वह वारदात के बाद छिपने में कर चुका है। गैंग को बढ़ाने के लिए वह यहां से युवक भी तलाश रहा था। मुठभेड़ में उसे मार गिराने के बाद अब पुलिस शंकरगढ़ में उसको शरण देने वालों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
चित्रकूट के थाना रैपुरा का मूल निवासी महेंद्र पासी अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद से रैपुरा, मानिकपुर, मऊ के अलावा मध्यप्रदेश के रींवा आदि इलाकों को केंद्र बनाकर वहां अपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। यूपी के इन तीन थानों में उसके खिलाफ कुल 21 मामले दर्ज हैं जिनमें फिरौती के लिए अपहरण, हत्या जैसे तमाम संगीन मामले भी शामिल हैं। रैपुरा थाने में दर्ज हिस्ट्रीशीट संख्या 145-ए में यह पचास हजार के इनामिया के तौर पर दर्ज है। लगातार कई वारदात अंजाम देने के बाद मप्र एवं उप्र सरकार ने महेंद्र पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। उसके बाद जब मप्र-उप्र पुलिस ने इसे पकड़ने का साझा अभियान चलाया तब चोरी छिपे भागकर यह शंकरगढ़ की बरगढ़ी पहाड़ी में भी आकर छिप गया। पुलिस सूत्रों का कहना है शंकरगढ़ इलाके के आसपास के कुछ गांवों में महेंद्र की मदद करने वाले लोग हैं हालांकि करीब दस साल पहले इंजीनियर नीरज अग्रवाल की फिरौती के लिए हुई हत्या के बाद पुलिस ने यहां बड़ी कार्रवाई करते हुए दो डकैत मार गिराए थे। उसके बाद से बरगढ़ से इधर की ओर डकैत नहीं आते थे लेकिन महेंद्र पासी ने कुछ समय से इधर आवाजाही शुरु कर दी थी। सूत्रों का कहना है वह अपने गैंग को बढ़ाना चाहता था। उसके लिए बेरोजगार युवकों की वह तलाश कर रहा था। कहा जाता है इसी आवाजाही के बीच पुलिस की निगाह में महेंद्र पासी आ गया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। अब पुलिस शंकरगढ़ इलाके में उसके साथ देने वाले लोगों की तलाश कर रही है हालांकि एसपी यमुनापार ने शंकरगढ़ इलाके में किसी भी डकैत की गतिविधियों की संभावना से इंकार किया है।
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