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अब सेकंडों में मिलेगी टूटी रेल पटरियों की जानकारी

Fri, 10 Feb 2017 01:46 AM IST
राहुल शर्मा , अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
राहुल शर्मा , अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद। Updated Fri, 10 Feb 2017 01:46 AM IST
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crack track information in few minuts
रेल ट्रेक - फोटो : demo pic
आए दिन रेल फ्रैक्चर से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेल पहली बार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लखनऊ स्थित रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मंडल में ऐसी तकनीक का प्रयोग होने जा रहा है, जिससे रेल फ्रैक्चर की सूचनाएं संबंधित अफसरों को सेकंडों में मिल जाएंगी। यह संभव होगा अल्ट्रासोनिक ब्रोकेन रेल डिटेक्शन सिस्टम की मदद से। इस तकनीक का प्रयोग देश में पहली बार इलाहाबाद के निकट बम्हरौली से भरवारी स्टेशन के बीच किया जा रहा है। इसके बाद उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के लक्सर-सहारनपुर सेक्शन में भी इसका प्रयोग किया जाएगा।
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रेल पटरी टूटने से वर्ष 2011 में इलाहाबाद के निकट मलबा में कालका मेल का दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 70 यात्रियों की जान गई थी। इस हादसे के बाद भी देश भर के तमाम जोनल रेलवे में रेल पटरी टूटने से हादसे हुए। एक के बाद एक हुई दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे में लंबे समय से मंथन चल रहा है। भारतीय रेलवे में पहली बार उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मंडल और उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में अल्ट्रासोनिक ब्रोकेन रेल डिटेक्शन सिस्टम (यूबीआरडीएस) तकनीक का प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है। आरडीएसओ ने दक्षिण अफ्रीका की फर्म आईएमटी (इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम टेक्नोलॉजी) को यह काम सौंपा है। यह प्रणाली सेंसर के प्रयोग से रेल वेल्ड फ्रैक्चर की पहचान करके संबंधित अफसरों एवं कर्मचारियों को सावधान कर देगी।
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यूबीआरडीएस को इलाहाबाद मंडल के बम्हरौली और भरवारी स्टेशन के बीच लगाया जाएगा। 25 किलोमीटर के इस रेलखंड में यूबीआरटीएस लगाने के बाद अगर कहीं कोई रेल फ्रैक्चर होगा तो उसकी सीधी जानकारी आसपास के स्टेशन मास्टर एवं कंट्रोल रूम में बैठे अफसरों को एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से सेकंडों में ही मिल जाएगी। उनको यह भी मालूम पड़ जाएगा कि किस स्पॉट पर रेल फ्रैक्चर हुआ है। ऐेसे में समय रहते वहां ट्रैक को दुरुस्त कर लिया जाएगा। बता दें कि सर्दी के मौसम में रेल फ्रैक्चर की घटनाएं ज्यादा होती हैं। अभी इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 5.56 करोड़ रुपये है।
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देश में पहली बार इस तकनीक का प्रयोग एनसीआर में अभी प्रयोग के रूप में होने जा रहा है। कई देशों में इसे आजमाया जा चुका है। इससे रेल फ्रैक्चर से होने वाली दुर्घटनाएं रोकी जा सकेंगी। - अमित मालवीय, पीआरओ एनसीआर।
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