{"_id":"6a12ce392a95325744077caf","slug":"court-stays-demand-for-list-of-private-school-employees-for-census-duty-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : जनगणना में ड्यूटी के लिए निजी स्कूलों के कर्मचारियों की सूची मांगने पर कोर्ट की रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : जनगणना में ड्यूटी के लिए निजी स्कूलों के कर्मचारियों की सूची मांगने पर कोर्ट की रोक
Sun, 24 May 2026 03:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 24 May 2026 03:38 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य के लिए निजी सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची मांगने संबंधी गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के आदेश पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य के लिए निजी सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची मांगने संबंधी गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के आदेश पर रोक लगा दी है। कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसे संस्थानों के कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम-1948 के तहत ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने स्ववित्तपोषित स्कूल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर दिया। एसोसिएशन ने डीआईओएस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सभी सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधन से शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची जनगणना में ड्यूटी के लिए मांगी थी।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया कि जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-4ए के तहत केवल लोक प्राधिकरण को ही जनगणना कार्य के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का दायित्व सौंपा गया है। निजी शिक्षण संस्थान न तो राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं और न ही उनकी इकाई। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस और जिला पंचायत राज अधिकारी से केवल उनके कार्यालयों में उपलब्ध कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।
विज्ञापन
डीआईओएस ने इसके दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची भी मांग ली। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत शिक्षकों को दशकीय जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्रावधान केवल सरकारी संस्थानों के शिक्षकों पर लागू होता है। कोर्ट ने याचियों को अंतरिम राहत देते हुए डीआईओएस के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-4ए
किसी राज्य में प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण की ओर से जनगणना से संबंधित किसी भी कर्तव्य के निष्पादन के लिए आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराया जाएगा।