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हाईकोर्ट : खुद के बुने जाल में फंसे हत्यारे पति को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, तीन दोस्त दोषमुक्त

Sun, 30 Jul 2023 02:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 30 Jul 2023 02:17 PM IST
सार

आठ साल पुराना यह मामला प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र का है। पीपलगांव निवासी साजिद ने एफआईआर दर्ज करवाई कि पांच सितंबर 2015 की रात लगभग साढ़े बारह बजे अपनी पत्नी तैयबा के साथ चंद्रलोक सिनेमाहाल से फिल्म देख कर लौट रहा था, तभी आईआईटी के करीब यामाहा मोटर साइकिल सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने उसके गले से सोने की चेन खींच ली।

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Court sentenced life imprisonment to the murderer husband, three friends acquitted
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पत्नी की हत्या करने के लिए खुद के बुने जाल में फंसे पति को इलाहाबाद की सत्र अदालत ने सश्रम आजीवन कारावास और दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि उसके तीन दोस्तों को कोर्ट ने बेगुनाह करार देते हुए दोषमुक्त कर दिया। यह आदेश जनपद न्यायालय इलाहाबाद के अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय ने परिस्थितिजन्य और अंतिम दृश्य के साक्ष्य के आधार पर दिया है।

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आठ साल पुराना यह मामला प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र का है। पीपलगांव निवासी साजिद ने एफआईआर दर्ज करवाई कि पांच सितंबर 2015 की रात लगभग साढ़े बारह बजे अपनी पत्नी तैयबा के साथ चंद्रलोक सिनेमाहाल से फिल्म देख कर लौट रहा था, तभी आईआईटी के करीब यामाहा मोटर साइकिल सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने उसके गले से सोने की चेन खींच ली। विरोध करने पर उसे मारा पीटा और उसकी पत्नी की गोली मार के हत्या कर दी। पत्नी की लाश एसआरएन अस्पताल की मोर्चरी में पड़ी है।
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फिल्मी अंदाज में पत्नी की हत्या के बुने जाल में विवेचना के दौरान उसके तीन दोस्त गेंदालाल, भीम और अनिल फंस गए। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और गेंदालाल की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया। जैसे जैसे विवेचना बढ़ी वैसे वैसे साजिद शक के दायरे में आ गया। पुलिस ने साजिद और उसके तीन दोस्तों के खिलाफ तैयबा की हत्या करने और आयुध अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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वर्ष 2016 से सत्र न्यायालय में शुरू हुए विचारण में अभियोजन पक्ष की ओर से तैयबा के पिता वसीम और मां आबिदा बेगम समेत सात गवाहों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करवाया गया।

मृतका के माता पिता ने अपनी गवाही में बताया की साजिद की शादी भले ही उनकी बेटी से हो गई थी, लेकिन उसके दिल में कोई और लड़की बसी हुई थी, जिसको लेकर अक्सर साजिद और उनकी बेटी के बीच कहासुनी होती थी। उनकी बेटी का ससुराल और मायका आमने-सामने है। उनकी बेटी अक्सर अपनी हत्या की आशंका जताती थी।

विवेचना के दौरान एक बात स्पष्ट हुई की इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह साजिद है। हत्या के पहले और हत्या के बाद केवल साजिद की मौजूदगी साबित हो रही थी। गवाहों के बयान और साक्ष्य पर गौर करते हुए सत्र अदालत ने पाया कि साजिद ने अपनी पत्नी को गोली मारी और खुद को बचाने के लिए अज्ञात के खिलाफ लूट और हत्या का नाटक रचते हुए एफआईआर दर्ज करवाई। परिस्थितिजन्य और अंतिम दृश्य साक्ष्यों के आधार पर साजिद को तैयबा की हत्या का दोषी करार दिया।

साजिद द्वारा पत्नी की हत्या के लिए बुने इस जाल में फंसे उसके तीन दोस्त गेंदालाल, अनिल और भीम को अदालत ने बेगुनाह पाया। सात साल चले इस आपराधिक विचारण के बाद सत्र न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में निर्दोष पाए गए गेंदालाल, भीम और अनिल को दोषमुक्त करते हुए मामले से उन्मोचित कर दिया और दोषी पाए गए साजिद को पत्नी की हत्या के लिए सश्रम आजीवन कारावास और दस हजार रुपए का अर्थ दंड सुना दिया।
 

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