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सिपाही अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं देने पर जवाब तलब
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प्रयागराज। नागरिक पुलिस और सिपाही भर्ती के 41610 पदों पर नियुक्ति के मामले में व्हाइटनर इस्तेमाल करने वाली महिला अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं देने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा हनुमान प्रसाद शुक्ला केस में दिए गए फैसले का लाभ याची को क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। सिपाही अभ्यर्थी आयुषी की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि 2013 कर सिपाही का परिणाम 16 जुलाई 2015 को आया था। परिणाम घोषित होने के साथ ही विवाद खड़ा हो गया। कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में ब्लेड और व्हाइटनर का इस्तेमाल किया था। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई। हाईकोर्ट ने व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों का परिणाम रद्द करने का आदेश दिया। इससे 6254 अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए।
फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई। हनुमान प्रसाद शुक्ला केस में सुप्रीमकोर्ट ने व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों को अपवाद स्वरूप मौका देने का आदेश दिया। इसी बीच गलत क्षैतिज आरक्षण लागू को लेकर अभ्यर्थी फिर कोर्ट चले गए। इस बार भी कोर्ट ने आरक्षण दुरुस्त कर परिणाम घोषित करने का आदेश दिया। संशोधित परिणाम 10 जून 2019 को जारी हुआ। याची का कहना है कि उसे परीक्षा में व्हाइटनर इस्तेमाल करने के कारण नियुक्ति नहीं दी गई, जबकि उसका कटऑफ अंक 290 है, जो कि कट ऑफ मेरिट 246 से अधिक है। इस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि याची को सुप्रीमकोर्ट के आदेश का लाभ क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। याचिका पर 25 जुलाई को सुनवाई होगी।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि 2013 कर सिपाही का परिणाम 16 जुलाई 2015 को आया था। परिणाम घोषित होने के साथ ही विवाद खड़ा हो गया। कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में ब्लेड और व्हाइटनर का इस्तेमाल किया था। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई। हाईकोर्ट ने व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों का परिणाम रद्द करने का आदेश दिया। इससे 6254 अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए।
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फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई। हनुमान प्रसाद शुक्ला केस में सुप्रीमकोर्ट ने व्हाइटनर इस्तेमाल करने वालों को अपवाद स्वरूप मौका देने का आदेश दिया। इसी बीच गलत क्षैतिज आरक्षण लागू को लेकर अभ्यर्थी फिर कोर्ट चले गए। इस बार भी कोर्ट ने आरक्षण दुरुस्त कर परिणाम घोषित करने का आदेश दिया। संशोधित परिणाम 10 जून 2019 को जारी हुआ। याची का कहना है कि उसे परीक्षा में व्हाइटनर इस्तेमाल करने के कारण नियुक्ति नहीं दी गई, जबकि उसका कटऑफ अंक 290 है, जो कि कट ऑफ मेरिट 246 से अधिक है। इस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि याची को सुप्रीमकोर्ट के आदेश का लाभ क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। याचिका पर 25 जुलाई को सुनवाई होगी।
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