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वित्तीय कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे पार्षद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 22 May 2015 02:18 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। राज्य वित्त आयोग से हुई 60 फीसदी की कटौती के खिलाफ नगर निगम के पार्षद बृहस्पतिवार को सड़क पर उतर पड़े। पार्षदों ने आशंका जताई है कि भारी-भरकम कटौती से कर्मचारियों के वेतन और पेंशन मिलने में मुश्किलें खड़ी होंगी। साथ ही शहर के विकास कार्य भी प्रभावित होंगे। वेतन न मिलने पर बारिश के पहले शहर की गलियों, नाले-नालियों की सफाई भी प्रभावित हो सकती हैं।
पार्षदों का कहना है कि राज्य वित्त आयोग ने निगम की देनदारी में 60 फीसदी की कटौती कर दी है। पहले वित्त आयोग प्रति माह 13.5 करोड़ रुपये निगम को देता रहा है। इस रकम से कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन नियमित हो गई। विकास कार्य के लिए भी धन बचा। कटौती के बाद निगम को 4.93 करोड़ रुपये ही मिले हैं। जबकि, निगम कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन के मद में करीब 11 करोड़ रुपये का खर्च है। साफ है कि निगम को वेतन, भत्ते और पेंशन के भुगतान में ही छह करोड़ रुपये से ज्यादा मिलाना पड़ेगा, जो संभव नहीं है। निगम की मासिक आय इससे कम बताई जा रही है।
पार्षदों ने एडिशनल कमिश्नर डीपी गिरि को ज्ञापन सौंपकर पूरा भुगतान दिलाने की गुहार लगाई। पार्षदों का समूह इसके बाद सीधे सर्किट हाउस पहुंचा। वहां एमएलसी सूरजभान करवरिया के जरिए विधान परिषद सदस्यों की कमेटी के सामने भी यह मुद्दा उठाया। पार्षदों ने दावा किया कि वित्तीय कटौती से शहर के सामने भारी मुश्किलें खड़ी होने जा रही हैं। ज्ञापन देने वालों में शिवसेवक सिंह, राजू शुक्ला, कुसुमलता, बबलू सोनकर, गिरधारी सिंह, सत्येंद्र चोपड़ा, कृष्ण मुरारी, दिनेश गुप्ता, किरन जायसवाल, अनीस अहमद, सरफराज अहमद, इरशाद अहमद, अहमद अली, आनंद घिल्डियाल, उर्मिला सिंह, नेम यादव, रवि गुप्ता आदि शामिल रहे।
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पार्षदों का कहना है कि राज्य वित्त आयोग ने निगम की देनदारी में 60 फीसदी की कटौती कर दी है। पहले वित्त आयोग प्रति माह 13.5 करोड़ रुपये निगम को देता रहा है। इस रकम से कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन नियमित हो गई। विकास कार्य के लिए भी धन बचा। कटौती के बाद निगम को 4.93 करोड़ रुपये ही मिले हैं। जबकि, निगम कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन के मद में करीब 11 करोड़ रुपये का खर्च है। साफ है कि निगम को वेतन, भत्ते और पेंशन के भुगतान में ही छह करोड़ रुपये से ज्यादा मिलाना पड़ेगा, जो संभव नहीं है। निगम की मासिक आय इससे कम बताई जा रही है।
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पार्षदों ने एडिशनल कमिश्नर डीपी गिरि को ज्ञापन सौंपकर पूरा भुगतान दिलाने की गुहार लगाई। पार्षदों का समूह इसके बाद सीधे सर्किट हाउस पहुंचा। वहां एमएलसी सूरजभान करवरिया के जरिए विधान परिषद सदस्यों की कमेटी के सामने भी यह मुद्दा उठाया। पार्षदों ने दावा किया कि वित्तीय कटौती से शहर के सामने भारी मुश्किलें खड़ी होने जा रही हैं। ज्ञापन देने वालों में शिवसेवक सिंह, राजू शुक्ला, कुसुमलता, बबलू सोनकर, गिरधारी सिंह, सत्येंद्र चोपड़ा, कृष्ण मुरारी, दिनेश गुप्ता, किरन जायसवाल, अनीस अहमद, सरफराज अहमद, इरशाद अहमद, अहमद अली, आनंद घिल्डियाल, उर्मिला सिंह, नेम यादव, रवि गुप्ता आदि शामिल रहे।
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