{"_id":"60959c07a680e5165309c21e","slug":"corona-beats-mother-at-the-age-of-85-family-also-takes-over","type":"story","status":"publish","title_hn":"85 वर्ष की आयु में कोरोना को हिम्मत से दी मात, परिवार भी संभाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
85 वर्ष की आयु में कोरोना को हिम्मत से दी मात, परिवार भी संभाला
Sat, 08 May 2021 01:29 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 08 May 2021 01:29 AM IST
सार
- 85 वर्ष की आयु में कोरोना को हिम्मत से दी मात, परिवार भी संभाला
विज्ञापन
prayagraj news : पुष्पा केवलानी।
- फोटो : prayagraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना संक्रमण काल में हिम्मत और जज्बे से उबरने वाली एक नहीं कई माताएं परिवार ही नहीं समाज के लिए मिसाल बनी हैं। टैगौर टाउन निवासिनी 85 वर्षीया पुष्पा केवलानी ने दिल की बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी न केवल कोरोना को मात दी बल्कि अपनेे पूरे परिवार को संभाला। बच्चों में जोश भरा कि कोरोना से डरने की नहीं, डटकर मुकाबला करने की जरूरत है। दो दिन पहले वह संक्रमण मुक्त हुईं तो बेटों, बहुओं ने ही नहीं घर के बच्चों ने भी दादी की हिम्मत को दाद देते हुए खुशियां मनाईं।
इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों के व्यवसायी पूरन केवलानी ने मां के कोरोना संक्रमण मुक्त होने की कहानी सिलसिलेवार बताई। उन्होंने बताया कि 17 अप्रैल को मां पुष्पा को सर्दी-जुकाम हुआ। चूंकि साल भर पहले उन्हें हार्टअटैक आया था, इसलिए घर वाले विशेष एहतियात बरत रहे थे। उनकी कोरोना जांच कराई गई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मां ने बच्चों को तसल्ली दी, यह कुछ नहीं है, हम ठीक हो जाएंगे, कहकर खुद को घर के ऊपरी हिस्से के एक कमरे में आइसोलेट कर लिया।
छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष टंडन की सलाह पर पुष्पा देवी का इलाज शुरू किया गया। घर के आठ अन्य सदस्यों की भी कोविड जांच कराई गई। इनमें पलक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। घर में पूरन, बसंत, ओम प्रकाश, सनी, दिव्या घर में ही दो कोरोना संक्रमितों की देखभाल कर खुद के लिए दवाओं के साथ मां के नुख्से के मुताबिक इलाज करने लगे। पूरन के मुताबिक मां कोरोना संक्रमण से बिल्कुल नहीं डरीं, बल्कि अन्य लोगों को भी सामान्य दिनचर्या से रहने, भाप लेने और ताजा भोजन करने के साथ टीवी देखने को कहतीं रहीं। नतीजा सामने था, तीन मई को मां पुष्पा देवी और पलक की रिपोर्ट निगेटिव आई। मां के हौसले और उनकी ममतामयी छांव से घर के सभी सदस्य खुश हैं।
विज्ञापन
रीतेश के मुताबिक 16 अप्रैल को 85 वर्षीया दादी को सर्दी-जुकाम हुआ। घर की बुजुर्ग की कोविड जांच कराई तो 17 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिर एहतियातन घर के सभी सदस्यों की जांच कराई तो रीतेश की पत्नी आस्था, छह वर्षीय बेटा आरुष, बहन शिवानी, छोटा भाई यशी, उसकी पत्नी गुड़िया की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने डॉक्टरों से सलाह लेकर दवाएं शुरू की लेकिन दादी की हिम्मत और घरेलू नुख्सों ने संक्रमणमुक्त होने में ज्यादा मदद की। चूंकि सभी संक्रमित थे, इसलिए आरूष और दादी की विशेष देखभाल के साथ होम आइसोलेशन में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया। नतीजा सामने हैं, सभी की रिपोर्ट निगेटिव और स्वस्थ हैं। रीतेश का कहना है कि कोरोना के खौफ को दिमाग पर न हावी होने देंगे तो जल्द स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने दादी की हिम्मत को दाद देते हुए कहा कि बुजुर्ग दादी ने मां की तरह खुद की चिंता छोड़कर सबको ठीक होने का हौसला दिया।
विज्ञापन
इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों के व्यवसायी पूरन केवलानी ने मां के कोरोना संक्रमण मुक्त होने की कहानी सिलसिलेवार बताई। उन्होंने बताया कि 17 अप्रैल को मां पुष्पा को सर्दी-जुकाम हुआ। चूंकि साल भर पहले उन्हें हार्टअटैक आया था, इसलिए घर वाले विशेष एहतियात बरत रहे थे। उनकी कोरोना जांच कराई गई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मां ने बच्चों को तसल्ली दी, यह कुछ नहीं है, हम ठीक हो जाएंगे, कहकर खुद को घर के ऊपरी हिस्से के एक कमरे में आइसोलेट कर लिया।
विज्ञापन
छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष टंडन की सलाह पर पुष्पा देवी का इलाज शुरू किया गया। घर के आठ अन्य सदस्यों की भी कोविड जांच कराई गई। इनमें पलक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। घर में पूरन, बसंत, ओम प्रकाश, सनी, दिव्या घर में ही दो कोरोना संक्रमितों की देखभाल कर खुद के लिए दवाओं के साथ मां के नुख्से के मुताबिक इलाज करने लगे। पूरन के मुताबिक मां कोरोना संक्रमण से बिल्कुल नहीं डरीं, बल्कि अन्य लोगों को भी सामान्य दिनचर्या से रहने, भाप लेने और ताजा भोजन करने के साथ टीवी देखने को कहतीं रहीं। नतीजा सामने था, तीन मई को मां पुष्पा देवी और पलक की रिपोर्ट निगेटिव आई। मां के हौसले और उनकी ममतामयी छांव से घर के सभी सदस्य खुश हैं।
विज्ञापन
बुजुर्ग दादी के साथ घर के छह लोग
हुए संक्रमित पर कोरोना को हिम्मत से दी मात मां की मौजूदगी, उनका दुलार बड़े से बड़ा दुख दूर कर देता है। जिले में एक ऐसा भी परिवार है जहां मां नहीं दादी की जिंदादिली ने छह वर्षीय बच्चे सहित परिवार के छह लोगों को कोरोना संक्रमण से उबार लिया। दवाओं और एहतियात के साथ हिम्मत से कोरोना को मात दी। आईआरसीटीसी के स्टेशन मैनेजर रितेश मिश्रा कोरोना संक्रमित होने फिर परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी देते समय यह कहना नहीं भूले कि तनाव और भय से मुक्त होकर किसी भी मुश्किल से उबरा जा सकता है।रीतेश के मुताबिक 16 अप्रैल को 85 वर्षीया दादी को सर्दी-जुकाम हुआ। घर की बुजुर्ग की कोविड जांच कराई तो 17 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिर एहतियातन घर के सभी सदस्यों की जांच कराई तो रीतेश की पत्नी आस्था, छह वर्षीय बेटा आरुष, बहन शिवानी, छोटा भाई यशी, उसकी पत्नी गुड़िया की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उन्होंने डॉक्टरों से सलाह लेकर दवाएं शुरू की लेकिन दादी की हिम्मत और घरेलू नुख्सों ने संक्रमणमुक्त होने में ज्यादा मदद की। चूंकि सभी संक्रमित थे, इसलिए आरूष और दादी की विशेष देखभाल के साथ होम आइसोलेशन में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया। नतीजा सामने हैं, सभी की रिपोर्ट निगेटिव और स्वस्थ हैं। रीतेश का कहना है कि कोरोना के खौफ को दिमाग पर न हावी होने देंगे तो जल्द स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने दादी की हिम्मत को दाद देते हुए कहा कि बुजुर्ग दादी ने मां की तरह खुद की चिंता छोड़कर सबको ठीक होने का हौसला दिया।